वन उत्पाद, हरित गृह प्रभाव एवं ओजोन परत
Join WhatsApp Channel
Get instant updates, mock tests & exam alerts
Subscribe on YouTube
Watch free video lectures & exam strategy tips
1 वन: प्रकार, महत्व और भारत की वन-स्थिति (Forests)
वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, वे जल, वायु, मिट्टी, जीव-जंतुओं और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं। झारखंड जैसे राज्य में तो वन और आदिवासी जीवन आपस में गहराई से जुड़े हैं। यहाँ वनों के प्रकार, उनके लाभ और भारत की वन-स्थिति दी गई है।
| वन का प्रकार | विशेषता | उदाहरण / क्षेत्र |
|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय सदाबहार | अधिक वर्षा; वर्ष भर हरे | पश्चिमी घाट, अंडमान, पूर्वोत्तर |
| उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (मानसूनी) | शुष्क ऋतु में पत्ते गिरते हैं; साल, सागौन | झारखंड, ओडिशा, मध्य भारत |
| कँटीले वन / मरुस्थलीय | कम वर्षा; बबूल, खेजड़ी, कैक्टस | राजस्थान, गुजरात |
| पर्वतीय वन | ऊँचाई के अनुसार बदलते | हिमालय |
| मैंग्रोव (ज्वारीय वन) | खारे जल में; श्वसन-मूल | सुंदरबन |
- झारखंड के वन मुख्यतः उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती हैं; साल (सखुआ) प्रमुख वृक्ष, महुआ, पलाश, केंदू, बाँस, आसन आदि।
- भारत में कुल वन-आवरण (ISFR 2023 के अनुसार) देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 21.76% तथा वन एवं वृक्ष आवरण मिलाकर लगभग 25.17% है। यह रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI, देहरादून) हर दो वर्ष में निकालता है।
- राष्ट्रीय वन नीति 1988: लक्ष्य 33% भूभाग पर वन/वृक्ष (पहाड़ी क्षेत्र में 66%)।
- वन-आवरण में सघन, मध्यम सघन और खुले वन शामिल हैं। मैंग्रोव और वृक्ष-आवरण अलग वर्ग।
वनों का महत्व
- पारिस्थितिक: O₂ देना, CO₂ सोखना, वर्षा-चक्र बनाए रखना, मिट्टी का कटाव रोकना, बाढ़-नियंत्रण, भूजल-पुनर्भरण।
- जैव-विविधता का घर: पौधे, जंतु, कवक, सूक्ष्मजीव।
- आर्थिक: लकड़ी, ईंधन, औषधि, लघु वनोपज, रोज़गार।
- सांस्कृतिक: आदिवासी समुदायों की आस्था और जीवनशैली, सरना स्थल (झारखंड), पवित्र उपवन।
- जलवायु-नियामक: कार्बन का भंडार (कार्बन सिंक)।
2 वन उत्पाद: प्रमुख और लघु वनोपज (Forest Products)
जंगल से हमें लकड़ी ही नहीं मिलती; शहद, लाख, तेंदू पत्ता, महुआ, जड़ी-बूटियाँ और बहुत कुछ मिलता है। इन्हें वन उत्पाद कहते हैं और ये करोड़ों वनवासियों की आजीविका हैं। झारखंड में वन उत्पादों की बड़ी भूमिका है, इसलिए इस विषय को ध्यान से समझें।
| वर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रमुख वन उत्पाद | वृक्षों से मिलने वाले मुख्य उत्पाद | इमारती लकड़ी (साल, सागौन, शीशम), जलाऊ लकड़ी, लुगदी |
| लघु वन उत्पाद (NTFP / MFP) | लकड़ी के अतिरिक्त सभी जैव उत्पाद | तेंदू पत्ता, महुआ, साल बीज, लाख, शहद, बाँस, गोंद, कत्था, चिरौंजी, औषधीय पौधे, रेशम (तसर) |
प्रमुख वन उत्पादों के उपयोग
| उत्पाद | स्रोत / उपयोग |
|---|---|
| लकड़ी / इमारती | फर्नीचर, मकान, कागज़ की लुगदी (बाँस), दियासलाई |
| लाख (Lac) | कीट (लाख कीट) द्वारा; चूड़ी, पॉलिश, रोगन। झारखंड देश में लाख का प्रमुख उत्पादक |
| तसर रेशम | तसर रेशमकीट (अर्जुन/साल पत्तों पर); झारखंड प्रसिद्ध |
| महुआ | फूल और बीज; खाद्य, तेल |
| तेंदू (केंदू) पत्ता | बीड़ी; वनवासियों की प्रमुख आय |
| गोंद, राल, कत्था | बबूल, चीड़, खैर |
| शहद और मोम | मधुमक्खी |
| बाँस | टोकरी, चटाई, कागज़, निर्माण |
| औषधीय पौधे | नीम, तुलसी, सर्पगंधा, आँवला, अश्वगंधा, गिलोय |
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act): अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वनवासियों के वन-अधिकार मान्य।
- लघु वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP for MFP) योजना तथा वन-धन विकास केंद्र (2018) से मूल्यवर्धन।
- वन उत्पादों का सतत् (Sustainable) उपयोग: उतना ही लेना जितना वन पुनः उत्पन्न कर सके।
- वन-कटाई (Deforestation), अतिचराई, वनाग्नि, खनन वन उत्पादों को घटाते हैं।
3 वन-संरक्षण: कारण, उपाय और आंदोलन (Forest Conservation)
वनों के कटने से जलवायु, मिट्टी, जल और जैव-विविधता, सब पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए वनों का संरक्षण केवल सरकार का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है। यहाँ वन-क्षरण के कारण, संरक्षण के उपाय और भारत के महत्वपूर्ण आंदोलनों तथा क़ानूनों की जानकारी है।
वन-क्षरण के कारण
- कृषि विस्तार, झूम (स्थानांतरी) खेती, बस्ती और उद्योगों का विस्तार, खनन, बाँध-परियोजनाएँ।
- ईंधन-लकड़ी और इमारती लकड़ी की माँग, अतिचराई, वनाग्नि, अवैध कटाई।
संरक्षण के उपाय
- वृक्षारोपण और पुनर्वनीकरण (Reforestation); वनरोपण (Afforestation) नए क्षेत्र में।
- सामाजिक वानिकी, कृषि-वानिकी, संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): समुदाय की भागीदारी।
- वन्यजीव अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
- ईंधन के वैकल्पिक स्रोत (LPG, बायोगैस), कागज़ का पुनर्चक्रण, जनजागरूकता।
प्रमुख आंदोलन और क़ानून
| नाम | वर्ष | विशेषता |
|---|---|---|
| चिपको आंदोलन | 1973 | उत्तराखंड (चमोली); पेड़ों से चिपककर कटाई रोकना; गौरा देवी, सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट |
| अप्पिको आंदोलन | 1983 | कर्नाटक; चिपको से प्रेरित |
| भारतीय वन अधिनियम | 1927 | वनों का वर्गीकरण (आरक्षित, संरक्षित, ग्रामीण) |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 | वन्यजीवों की सुरक्षा |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 | वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग नियंत्रित |
| जैव-विविधता अधिनियम | 2002 | जैविक संसाधनों का संरक्षण |
| वन अधिकार अधिनियम | 2006 | वनवासियों के अधिकार |
- वन महोत्सव: जुलाई के पहले सप्ताह में; 1950 में के.एम. मुंशी द्वारा शुरू।
- विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून। अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस: 21 मार्च।
- "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान (5 जून 2024 को शुरू)।
- झारखंड में सरहुल, करमा जैसे पर्व प्रकृति-पूजा से जुड़े हैं और संरक्षण की परंपरा दर्शाते हैं।
4 हरित गृह प्रभाव और हरित गृह गैसें (Greenhouse Effect and Gases)
काँच के बने पौधा-घर (ग्रीनहाउस) में बाहर से अधिक गर्मी रहती है, क्योंकि काँच ऊष्मा को भीतर रोक लेता है। पृथ्वी के वायुमंडल में भी कुछ गैसें यही काम करती हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया जीवन के लिए ज़रूरी है, पर जब वह बहुत बढ़ जाए तो समस्या बन जाती है।
परिभाषा
हरित गृह प्रभाव (Greenhouse Effect) = पृथ्वी से लौटती अवरक्त (ऊष्मीय) विकिरण को वायुमंडल की कुछ गैसों द्वारा सोखकर वापस पृथ्वी की ओर भेज देना, जिससे पृथ्वी गर्म रहती है।
- प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव के बिना पृथ्वी का औसत ताप लगभग −18 °C होता; इसके कारण लगभग 15 °C है। अर्थात यह प्रभाव जीवन के लिए आवश्यक है।
- समस्या बढ़ा हुआ (वर्धित) हरित गृह प्रभाव है, जिसमें मानवीय क्रियाओं से गैसें बढ़ गई हैं।
| गैस | प्रमुख स्रोत |
|---|---|
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | जीवाश्म ईंधन का दहन, वन-कटाई, सीमेंट उद्योग; सबसे बड़ा मानवजनित योगदान |
| मीथेन (CH₄) | धान के खेत, पशुपालन (जुगाली), लैंडफ़िल, कोयला/गैस खनन; CO₂ से कहीं अधिक प्रभावी |
| नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) | रासायनिक उर्वरक, औद्योगिक प्रक्रियाएँ |
| जलवाष्प (H₂O) | प्राकृतिक; सबसे प्रचुर हरित गृह गैस |
| क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC), HFC, SF₆ | एयर-कंडीशनर, फ़्रिज, एयरोसोल, उद्योग; कृत्रिम गैसें |
| ओज़ोन (O₃, क्षोभमंडल में) | वाहन-धुएँ से बनी (प्रदूषक) |
- वैश्विक तापन क्षमता (GWP): CO₂ का मान 1 लिया जाता है; मीथेन, N₂O, CFC और SF₆ का मान कहीं अधिक।
- CO₂ सोखने के प्राकृतिक भंडार (कार्बन सिंक): वन, महासागर, मृदा।
- कार्बन फुटप्रिंट: किसी व्यक्ति/संस्था द्वारा उत्सर्जित कुल हरित गृह गैसें।
5 भूमंडलीय ऊष्मीकरण, जलवायु परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास (Global Warming and Climate Change)
बीते दशकों में धरती का औसत तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसे वैश्विक ऊष्मीकरण कहते हैं। इससे मौसम का चक्र बिगड़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। इस भाग में कारण, प्रभाव और भारत तथा विश्व के प्रयास दिए गए हैं।
- वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming): हरित गृह गैसों के बढ़ने से पृथ्वी के औसत ताप में दीर्घकालीन वृद्धि।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change): तापमान, वर्षा और मौसम के पैटर्न में दीर्घकालीन बदलाव।
- मुख्य कारण: जीवाश्म ईंधन, वन-कटाई, कृषि, उद्योग, अनियंत्रित शहरीकरण।
प्रभाव
- ग्लेशियरों और ध्रुवीय बर्फ़ का पिघलना, समुद्र-स्तर में वृद्धि; तटीय क्षेत्रों और द्वीपों पर संकट।
- चरम मौसम: लू, बाढ़, सूखा, चक्रवात की बारंबारता और तीव्रता में वृद्धि।
- कृषि-उत्पादन पर असर, जल-संकट, मलेरिया-डेंगू का विस्तार।
- प्रजातियों का विलुप्त होना, प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching)।
- महासागरीय अम्लीकरण: अधिक CO₂ समुद्री जल में घुलकर उसे अम्लीय बनाती है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रयास
| समझौता | वर्ष | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| पृथ्वी सम्मेलन (रियो) | 1992 | UNFCCC की स्थापना |
| क्योटो प्रोटोकॉल | 1997 | विकसित देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन-कटौती |
| पेरिस समझौता | 2015 | औसत वैश्विक तापवृद्धि को 2 °C से काफ़ी नीचे और प्रयास 1.5 °C तक सीमित करना |
| COP26 (ग्लासगो) | 2021 | भारत का 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य |
- IPCC: जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल।
- भारत: राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC, 2008); मिशन LiFE (2022)।
- व्यक्तिगत स्तर पर: ऊर्जा-बचत, पेड़ लगाना, प्लास्टिक कम, सार्वजनिक परिवहन, पुनर्चक्रण।
6 ओज़ोन परत: संरचना, क्षरण, प्रभाव और संरक्षण (Ozone Layer)
पृथ्वी की सतह से लगभग 15 से 35 किलोमीटर ऊपर एक पतली गैसीय परत है, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है। इसे ओज़ोन परत कहते हैं। इसके क्षरण से मानव और पर्यावरण दोनों पर संकट आ सकता है। यहाँ इसकी पूरी जानकारी दी गई है।
- ओज़ोन (O₃): ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी गैस। हल्का नीला रंग और विशिष्ट गंध।
- स्थिति: मुख्यतः समतापमंडल (Stratosphere) में; 15 से 35 km के बीच, सर्वाधिक सांद्रता लगभग 20–25 km पर।
- कार्य: सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों, विशेषकर हानिकारक UV-B और UV-C को सोखना।
- बनना: ऑक्सीजन (O₂) पर UV किरणों की क्रिया से O₂ → 2O, फिर O + O₂ → O₃।
- मापन इकाई: डॉब्सन यूनिट (DU)।
- क्षोभमंडल का ओज़ोन प्रदूषक है (स्मॉग का भाग); समताप मंडल का ओज़ोन लाभदायक है।
ओज़ोन क्षरण
- मुख्य कारण: क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC)। इनके क्लोरीन परमाणु ओज़ोन के अणुओं को तोड़ते हैं; एक क्लोरीन परमाणु हज़ारों ओज़ोन अणु नष्ट कर सकता है।
- अन्य पदार्थ: हैलोन (अग्निशामक), कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल ब्रोमाइड, मिथाइल क्लोरोफ़ॉर्म, HCFC।
- ओज़ोन छिद्र: अंटार्कटिका के ऊपर वसंत (सितंबर–अक्टूबर) में ओज़ोन की भारी कमी। 1985 में फ़ॉर्मैन, गार्डिनर और शैंकलिन (ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे) ने इसकी खोज की।
- CFC का उपयोग: फ़्रिज/AC में शीतलक, एयरोसोल स्प्रे, फ़ोम, सफ़ाई विलायक।
UV किरणों के हानिकारक प्रभाव
- त्वचा कैंसर, झुर्रियाँ, मोतियाबिंद और आँखों के रोग; रोग-प्रतिरोधक क्षमता का घटना।
- पौधों की वृद्धि और फसलों की पैदावार में कमी; फाइटोप्लैंक्टन (समुद्री खाद्य शृंखला का आधार) पर असर।
- जलीय जीवों और उभयचरों पर बुरा प्रभाव।
7 ओज़ोन संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय प्रयास (Vienna, Montreal, Kigali)
ओज़ोन परत का संकट दुनिया की सबसे सफल पर्यावरण-कथाओं में से एक है, क्योंकि सब देशों ने मिलकर हानिकारक रसायनों का उपयोग रोका। इस सहयोग का आधार कुछ अंतर्राष्ट्रीय समझौते हैं, जिनकी तिथियाँ और विशेषताएँ परीक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
| समझौता | वर्ष | विशेषता |
|---|---|---|
| वियना कन्वेंशन | 1985 | ओज़ोन परत की सुरक्षा हेतु ढाँचा-समझौता |
| मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल | 1987 (प्रभावी 1989) | ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों (ODS) का चरणबद्ध उन्मूलन; विश्व का पहला सार्वभौमिक रूप से अनुसमर्थित पर्यावरण समझौता |
| किगाली संशोधन | 2016 | HFC (हाइड्रोफ़्लोरोकार्बन) घटाना; ये ओज़ोन को नुकसान नहीं पहुँचाते पर शक्तिशाली हरित गृह गैसें हैं |
- विश्व ओज़ोन दिवस: 16 सितंबर (मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की स्मृति में)।
- भारत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का सदस्य है और उसने ODS के चरणबद्ध उन्मूलन के लक्ष्य पूरे किए हैं। भारत ने किगाली संशोधन को 2021 में स्वीकार किया।
- परिणाम: वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार इन प्रयासों से ओज़ोन परत धीरे-धीरे पुनः ठीक हो रही है; सदी के मध्य तक सामान्य स्तर की उम्मीद है।
- वैकल्पिक पदार्थ: HFC, हाइड्रोकार्बन (जैसे आइसोब्यूटेन), CO₂, अमोनिया आधारित शीतलक।
हम क्या कर सकते हैं
- ओज़ोन-मित्र उत्पाद (CFC-रहित फ़्रिज/AC/स्प्रे) खरीदना।
- पुराने AC/फ़्रिज का सुरक्षित निपटान, गैस रिसाव की मरम्मत।
- बच्चों में जागरूकता, 16 सितंबर को पोस्टर, नाटक, प्रतियोगिताएँ।
8 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: वन, जलवायु और ओज़ोन का शिक्षण
वन, जलवायु और ओज़ोन के पाठ बच्चों को पर्यावरण का संरक्षक बनाने के अवसर हैं। NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण शिक्षा को केवल किताब तक नहीं, बल्कि व्यवहार और जीवन-शैली तक ले जाने की बात कहते हैं। नीचे कुछ गतिविधियाँ और विचार दिए गए हैं।
- वन-भ्रमण / प्रकृति-पथ: स्थानीय जंगल, उद्यान या पेड़ों का अवलोकन; पेड़ों की पहचान।
- वन-उत्पाद सर्वेक्षण: स्थानीय बाज़ार में महुआ, तेंदू पत्ता, लाख, शहद आदि की सूची और उनके स्रोत।
- वृक्षारोपण: "एक बच्चा, एक पेड़"; पौधे की देखभाल का लॉग।
- ग्रीनहाउस प्रयोग: दो बोतलों में एक बंद और एक खुली रखकर तापमान की तुलना।
- कार्बन फुटप्रिंट गणना: विद्यालय-घर की बिजली और यात्रा के आधार पर।
- पोस्टर, नुक्कड़ नाटक (16 सितंबर, 5 जून, 21 मार्च) और पर्यावरण-क्लब।
- स्थानीय ज्ञान: आदिवासी समुदायों से वन-संरक्षण की परंपराएँ (सरना स्थल, जंगल का पर्व) सीखना।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण-जागरूकता, स्थानीय ज्ञान प्रणालियों के सम्मान और ज़िम्मेदार नागरिकता पर बल देते हैं। बच्चों को केवल जानकारी नहीं, कार्य-आधारित अनुभव मिलें।
9 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
10 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. झारखंड के वनों का प्रमुख वृक्ष कौन-सा है?
Q2. राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार मैदानी क्षेत्र में वन का लक्ष्य कितना है?
Q3. निम्न में से कौन-सा लघु वन उत्पाद है?
Q4. लाख किस कीट से प्राप्त होती है?
Q5. वन अधिकार अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
Q6. चिपको आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?
Q7. वन महोत्सव की शुरुआत किसने की?
Q8. अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस कब मनाया जाता है?
Q9. हरित गृह प्रभाव के बिना पृथ्वी का औसत ताप लगभग कितना होता?
Q10. सबसे बड़ा मानवजनित योगदान देने वाली हरित गृह गैस कौन-सी है?
Q11. धान के खेतों और पशुपालन से मुख्यतः कौन-सी हरित गृह गैस निकलती है?
Q12. पेरिस समझौते का मुख्य तापमान-लक्ष्य क्या है?
Q13. ओज़ोन परत वायुमंडल की किस परत में है?
Q14. ओज़ोन के एक अणु में कितने ऑक्सीजन परमाणु होते हैं?
Q15. ओज़ोन परत किससे हमारी रक्षा करती है?
Q16. ओज़ोन परत के क्षरण का मुख्य कारण कौन-सा है?
Q17. ओज़ोन की मोटाई किस इकाई में मापी जाती है?
Q18. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किस वर्ष अपनाया गया?
Q19. विश्व ओज़ोन दिवस कब मनाया जाता है?
Q20. किगाली संशोधन किसे घटाने के लिए है?
Join WhatsApp Channel
Get instant updates, mock tests & exam alerts
Subscribe on YouTube
Watch free video lectures & exam strategy tips
| Category | JTET Resources |
|---|---|
| Practice Set | View Practice Set → |
| PYQ (Previous Year Papers) | View PYQ → |
| Notes | View Notes → |
| Syllabus | View Syllabus → |
| Admit Card | View Admit Card → |
| Exam Date | View Exam Date → |