जीव-जगत, सजीवों का वर्गीकरण एवं वासस्थान
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1 आस-पास की वस्तुएँ: सजीव और निर्जीव (Living and Non-living Things)
हमारे चारों ओर पेड़, पशु, पत्थर, पानी, हवा और मशीनें, सब कुछ है। इनमें से कुछ सजीव हैं और कुछ निर्जीव। सजीव और निर्जीव का भेद पहली नज़र में आसान लगता है, पर बादल का चलना या बीज का न हिलना जैसे उदाहरण भ्रम पैदा करते हैं। इसलिए वैज्ञानिक रूप से सजीव के लक्षण जानना ज़रूरी है।
- सजीव (Living): वे जिनमें जीवन के सभी लक्षण हों।
- निर्जीव (Non-living): जिनमें जीवन के लक्षण नहीं होते।
सजीवों के लक्षण
| लक्षण | अर्थ |
|---|---|
| कोशिकीय संरचना | सभी सजीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं |
| पोषण | भोजन से ऊर्जा और पदार्थ प्राप्त करना |
| श्वसन | भोजन से ऊर्जा मुक्त करना |
| वृद्धि | आकार और भार में बढ़ना (भीतर से) |
| उत्सर्जन | अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालना |
| उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया | वातावरण के परिवर्तन को महसूस कर प्रतिक्रिया देना |
| जनन | अपने जैसी संतान पैदा करना |
| गति | अपने या अंगों की गति (पौधों में भी धीमी) |
| अनुकूलन और जीवन-काल | परिवेश के अनुसार ढलना; जन्म से मृत्यु तक |
| पहलू | सजीव | निर्जीव |
|---|---|---|
| वृद्धि | भीतर से | केवल बाहर से जुड़कर (जैसे रेत का ढेर) |
| श्वसन, पोषण | होता है | नहीं होता |
| जनन | करते हैं | नहीं करते |
| उदाहरण | पौधे, पशु, जीवाणु, कवक | पत्थर, पानी, मशीन, हवा |
भ्रम से बचें
कोई वस्तु हिलती-डुलती हो तो वह सजीव नहीं हो जाती (बादल, नदी, कार)। और बीज बिना हिले भी सजीव है, क्योंकि उसमें जीवन सुप्त रूप में है और उचित परिस्थिति पर अंकुरित होता है।
- विषाणु (Virus) सजीव-निर्जीव के बीच की कड़ी हैं। ये कोशिका के बाहर निर्जीव जैसे रहते हैं, पर जीवित कोशिका के भीतर जाकर जनन करते हैं।
NCF-SE 2023 से जुड़ाव
NCF-SE 2023 के आधारभूत और प्रारंभिक चरण में बच्चे अपने परिवेश का अवलोकन करके चीज़ों को समूह में बाँटना सीखते हैं। प्रकृति-भ्रमण और स्कूल परिसर के पौधों/जन्तुओं का सर्वेक्षण अच्छी गतिविधि है।
2 कोशिका: जीवन की इकाई (Cell — Unit of Life)
हर सजीव, चाहे वह सबसे छोटा जीवाणु हो या सबसे बड़ा व्हेल, कोशिकाओं से बना है। कोशिका जीवन की मूल संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। इसे समझे बिना जीवों की संरचना, वर्गीकरण और जीवन-क्रियाओं को समझना कठिन है, इसलिए यह भाग पूरे विषय की नींव है।
| वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| रॉबर्ट हुक (1665) | कॉर्क की पतली काट में मृत कोशिकाएँ देखीं और "Cell" नाम दिया |
| ल्यूवेनहॉक (1674) | जीवित कोशिकाएँ (जीवाणु, प्रोटोज़ोआ) देखीं |
| रॉबर्ट ब्राउन (1831) | कोशिका में केंद्रक की खोज |
| श्लाइडन (1838) और श्वान (1839) | कोशिका सिद्धांत: सभी पौधे/जन्तु कोशिकाओं से बने |
| रुडोल्फ़ विर्चो (1855) | नई कोशिका पूर्व-स्थित कोशिका से बनती है |
- कोशिका सिद्धांत: (1) सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं; (2) कोशिका जीवन की मूल इकाई है; (3) नई कोशिकाएँ पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं।
- एककोशिकीय (Unicellular): अमीबा, पैरामीशियम, यीस्ट, जीवाणु। बहुकोशिकीय (Multicellular): पौधे, अधिकांश जन्तु।
- संगठन का क्रम: कोशिका → ऊतक → अंग → अंग-तंत्र → जीव।
कोशिका के भाग
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कोशिका झिल्ली | कोशिका को घेरती है; पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है |
| कोशिका भित्ति (केवल पादप में) | सेलुलोज़ की बनी; आकार और सुरक्षा |
| केंद्रक (Nucleus) | कोशिका का नियंत्रण-केंद्र; DNA (गुणसूत्र) |
| कोशिका-द्रव्य (Cytoplasm) | जेली जैसा द्रव; अंगकों का आधार |
| माइटोकॉन्ड्रिया | श्वसन द्वारा ऊर्जा (ATP): कोशिका का ऊर्जा-घर |
| हरित-लवक (क्लोरोप्लास्ट) | प्रकाश-संश्लेषण (पादप कोशिका में) |
| रिक्तिका (Vacuole) | भंडारण; पादप में बड़ी |
| राइबोसोम | प्रोटीन-निर्माण |
| अंतःप्रद्रव्यी जालिका (ER) | पदार्थों का परिवहन |
| गॉल्जी उपकरण | पदार्थों का पैकिंग और स्राव |
| लयनकाय (Lysosome) | अपशिष्ट का पाचन; "आत्मघाती थैली" |
| आधार | पादप कोशिका | जन्तु कोशिका |
|---|---|---|
| कोशिका भित्ति | होती है | नहीं होती |
| हरित-लवक | होते हैं | नहीं |
| रिक्तिका | बड़ी, केंद्रीय | छोटी या नहीं |
| आकार | निश्चित, प्रायः आयताकार | अनिश्चित, गोलाकार |
- प्रोकैरियोटिक कोशिका: स्पष्ट केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु। यूकैरियोटिक कोशिका: स्पष्ट केंद्रक सहित झिल्ली-युक्त अंगक।
- सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा और सबसे छोटी कोशिकाओं में माइकोप्लाज़्मा मानी जाती है।
3 सजीवों का वर्गीकरण: आधार और नामकरण (Classification and Nomenclature)
पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव हैं। उन्हें व्यवस्थित ढंग से जानने और याद रखने के लिए उन्हें समूहों में बाँटना पड़ता है। यह काम जीवों की समानताओं और अंतरों के आधार पर होता है। वैज्ञानिक नामकरण भी इसी का हिस्सा है, ताकि पूरी दुनिया में एक ही जीव के लिए एक ही नाम रहे।
- वर्गीकरण (Classification) = जीवों को उनके गुणों की समानता और भिन्नता के आधार पर समूहों में बाँटना।
- वर्गिकी (Taxonomy) = वर्गीकरण का विज्ञान।
- मूल आधार: कोशिका-प्रकार (प्रोकैरियोटिक/यूकैरियोटिक), एक/बहुकोशिकीय, पोषण का तरीका (स्वपोषी/विषमपोषी), शरीर का संगठन, जनन।
| वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| अरस्तू | जीवों को पौधे और जन्तु में बाँटा; जन्तुओं को निवास के आधार पर |
| कैरोलस लिनियस | द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature); "Systema Naturae" (1735) |
| अर्न्स्ट हेकेल (1866) | प्रोटिस्टा जगत का प्रस्ताव |
| आर. एच. व्हिटेकर (1969) | पाँच जगत वर्गीकरण |
| कार्ल वोज़ | तीन डोमेन (आर्किया, जीवाणु, यूकैरिया) |
द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature)
- हर जीव का वैज्ञानिक नाम दो शब्दों का होता है: पहला वंश (Genus), दूसरा जाति (Species)।
- वंश का पहला अक्षर बड़ा (Capital) और जाति का छोटा लिखा जाता है; छपे हुए रूप में तिरछे (इटैलिक) अक्षर, हाथ से लिखने पर रेखांकित।
| सामान्य नाम | वैज्ञानिक नाम |
|---|---|
| मनुष्य | Homo sapiens |
| आम | Mangifera indica |
| धान (चावल) | Oryza sativa |
| गेहूँ | Triticum aestivum |
| नीम | Azadirachta indica |
| बाघ | Panthera tigris |
| शेर | Panthera leo |
| आलू | Solanum tuberosum |
वर्गीकरण की श्रेणियाँ (Taxonomic Hierarchy)
- जगत (Kingdom)
- संघ (Phylum) / पादपों में विभाग (Division)
- वर्ग (Class)
- गण (Order)
- कुल (Family)
- वंश (Genus)
- जाति (Species)
याद रखें
जाति (Species) सबसे छोटी श्रेणी है और सबसे अधिक समानता रखने वाले जीवों का समूह है। जगत सबसे बड़ी श्रेणी है।
4 पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification)
व्हिटेकर ने 1969 में जीवों को पाँच बड़े जगतों में बाँटा। यह वर्गीकरण कोशिका-संरचना, शरीर-संगठन, पोषण-तरीके और जनन पर आधारित है। यह आज भी स्कूली शिक्षा का आधार है, इसलिए हर जगत की मुख्य पहचान और उदाहरण याद रखना ज़रूरी है।
| जगत | कोशिका | पोषण | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| मोनेरा (Monera) | प्रोकैरियोटिक, एककोशिकीय | स्वपोषी/विषमपोषी | जीवाणु, नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) |
| प्रोटिस्टा (Protista) | यूकैरियोटिक, प्रायः एककोशिकीय | दोनों | अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डायटम |
| कवक (Fungi) | यूकैरियोटिक; भित्ति में काइटिन | मृतोपजीवी/परजीवी | यीस्ट, मशरूम, पेनिसिलियम, ब्रेड-मोल्ड |
| पादप (Plantae) | यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय; सेलुलोज़ भित्ति | स्वपोषी | काई, फर्न, चीड़, आम |
| जन्तु (Animalia) | यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय; भित्ति नहीं | विषमपोषी | स्पंज, मछली, मनुष्य |
- कवक की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है (पादप में सेलुलोज़)।
- मोनेरा में सबसे सरल और सबसे प्राचीन जीव आते हैं।
- विषाणु पाँच जगतों में सम्मिलित नहीं हैं, क्योंकि वे अकोशिकीय हैं।
- लाइकेन शैवाल और कवक का सहजीवी समूह है।
जीवाणु और विषाणु: सूक्ष्मजीव
| आधार | जीवाणु | विषाणु |
|---|---|---|
| कोशिका | प्रोकैरियोटिक कोशिका | अकोशिकीय |
| स्वतंत्र जनन | हाँ | नहीं (पोषी कोशिका में) |
| उदाहरण रोग | हैज़ा, टाइफाइड, टी.बी. | एड्स (HIV), कोविड-19, डेंगू, चेचक |
| दवा | प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) असरदार | एंटीबायोटिक असरदार नहीं |
| उपयोगी भूमिका | दही जमाना, नाइट्रोजन-स्थिरीकरण | जीन-अभियांत्रिकी में उपयोग |
- प्रतिजैविक की खोज अलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग (पेनिसिलिन, 1928) ने की।
- विषाणु-रोगों से बचाव का मुख्य उपाय टीकाकरण है।
5 पादप जगत का वर्गीकरण (Plant Kingdom)
पादप जगत में काई जैसे सरल पौधों से लेकर आम जैसे जटिल फूलदार वृक्ष तक सब आते हैं। इनका वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि शरीर में जड़-तना-पत्ती जैसे भाग हैं या नहीं, संवहन-ऊतक है या नहीं, और बीज तथा फल बनते हैं या नहीं। नीचे पाँच प्रमुख समूह क्रम से हैं।
| समूह | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| थैलोफाइटा (शैवाल) | शरीर जड़-तना-पत्ती में विभेदित नहीं (थैलस); अधिकांश जलीय | स्पाइरोगायरा, यूलोथ्रिक्स, क्लैमाइडोमोनास |
| ब्रायोफाइटा | संवहन-ऊतक नहीं; नम जगह; "पादपों के उभयचर" | मॉस (फ्यूनेरिया), मार्केन्शिया |
| टेरिडोफाइटा | संवहन-ऊतक है; बीज और फूल नहीं | फर्न, घोड़े की पूँछ (इक्विसेटम), मार्सीलिया |
| अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) | बीज नंगे (फल नहीं); शंकु | चीड़, देवदार, साइकस |
| आवृतबीजी (एंजियोस्पर्म) | फूल और फल; बीज फल के अंदर बंद | आम, गेहूँ, गुलाब, सरसों |
- संवहन-ऊतक (Vascular Tissue): जाइलम (जल का संवहन) और फ्लोएम (भोजन का संवहन)।
- बीजहीन पादप: शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा। बीजधारी पादप: जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म।
- एंजियोस्पर्म सबसे बड़ा और सबसे विकसित पादप समूह है।
एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधे
| आधार | एकबीजपत्री | द्विबीजपत्री |
|---|---|---|
| बीज में बीजपत्र | एक | दो |
| जड़ | रेशेदार | मूसला |
| पत्ती की शिराएँ | समानांतर | जालिकावत |
| फूल के भाग | तीन के गुणक | चार या पाँच के गुणक |
| उदाहरण | गेहूँ, मक्का, धान, घास | चना, मटर, आम, सरसों |
6 जन्तु जगत का वर्गीकरण (Animal Kingdom)
जन्तु जगत सबसे विविध जगतों में से एक है। इसे मुख्यतः दो बड़े वर्गों में बाँटा जाता है: जिनमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती (अकशेरुकी) और जिनमें होती है (कशेरुकी)। इस भाग में दोनों के वर्ग, पहचान के लक्षण और उदाहरण दिए गए हैं।
अकशेरुकी (Invertebrates)
| संघ | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| पोरीफेरा | शरीर में छिद्र; स्थिर; जलीय | स्पंज |
| सीलेंटरेटा (नाइडेरिया) | खोखला शरीर; दंशक कोशिकाएँ | हाइड्रा, जेलीफ़िश, प्रवाल |
| प्लैटीहेल्मिंथीज़ | चपटे कृमि; परजीवी | फीताकृमि, प्लेनेरिया |
| नेमैटोडा | गोल, बेलनाकार कृमि | एस्केरिस, फाइलेरिया-कृमि |
| एनेलिडा | खंडों वाला शरीर | केंचुआ, जोंक |
| आर्थ्रोपोडा | जुड़े पैर; काइटिन का बाह्य कंकाल; सबसे बड़ा संघ | तिलचट्टा, तितली, मकड़ी, केकड़ा, बिच्छू |
| मोलस्का | कोमल शरीर; प्रायः कवच | घोंघा, सीप, ऑक्टोपस |
| इकाइनोडर्मेटा | काँटेदार त्वचा; समुद्री | तारा मछली, समुद्री अर्चिन |
कशेरुकी (Vertebrates) के वर्ग
| वर्ग | त्वचा | हृदय | तापमान |
|---|---|---|---|
| मत्स्य (Pisces) | शल्क | 2 कक्ष | असमतापी |
| उभयचर (Amphibia) | नम, चिकनी | 3 कक्ष | असमतापी |
| सरीसृप (Reptilia) | शल्क, सूखी | 3 कक्ष (मगरमच्छ में 4) | असमतापी |
| पक्षी (Aves) | पंख | 4 कक्ष | समतापी |
| स्तनधारी (Mammalia) | बाल | 4 कक्ष | समतापी |
- मत्स्य: गिल (क्लोम) से श्वसन; रोहू, शार्क (उपास्थि-कंकाल)। उभयचर: मेंढक, टोड; जल और स्थल, दोनों; कायांतरण।
- सरीसृप: साँप, छिपकली, कछुआ, मगरमच्छ; सूखी भूमि पर अंडे। पक्षी: पंख, चोंच, हल्की हड्डियाँ; शुतुरमुर्ग, पेंगुइन उड़ नहीं सकते।
- स्तनधारी: दुग्ध-ग्रंथियाँ (बच्चों को दूध), बाल, फेफड़ों से श्वसन। अधिकांश बच्चे को जन्म देते हैं (जरायुज); प्लैटिपस और एकिडना अंडे देने वाले स्तनधारी हैं।
- असमतापी (Cold-blooded): शरीर का ताप परिवेश के अनुसार बदलता है। समतापी (Warm-blooded): शरीर का ताप स्थिर रहता है।
भ्रम से बचें
चमगादड़ उड़ने वाला स्तनधारी है, पक्षी नहीं। व्हेल और डॉल्फ़िन जल में रहते हैं, पर मछली नहीं, स्तनधारी हैं।
7 सजीवों का वासस्थान एवं पारितंत्र (Habitat and Ecosystem)
हर जीव किसी न किसी जगह रहता है, जहाँ उसे भोजन, जल, आश्रय और सुरक्षा मिलती है। इस जगह को उसका वासस्थान कहते हैं। वासस्थान के अलग-अलग प्रकार होते हैं, और जीव तथा उसके परिवेश के बीच का संबंध पारितंत्र कहलाता है। यही नींव बाद में अनुकूलन और जैव-विविधता को समझने में काम आती है।
परिभाषा
वासस्थान / आवास (Habitat) = वह स्थान जहाँ कोई जीव प्राकृतिक रूप से रहता है और जहाँ उसे भोजन, जल, आश्रय और सुरक्षा मिलती है।
| वासस्थान | प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्थलीय | वन, घास का मैदान, मरुस्थल, पर्वत, ध्रुवीय क्षेत्र | शेर, ऊँट, याक, ध्रुवीय भालू |
| जलीय (मीठा जल) | तालाब, नदी, झील | रोहू मछली, मेंढक, कमल |
| जलीय (समुद्री) | सागर, महासागर | व्हेल, शार्क, प्रवाल |
| वायवीय/वृक्षीय | पेड़ों पर रहने वाले | गिलहरी, बंदर, चमगादड़ |
पारितंत्र (Ecosystem)
- पारितंत्र = किसी क्षेत्र के जैव (सजीव) और अजैव (निर्जीव) घटकों का आपसी संबंध।
- अजैव घटक: वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, ताप।
- जैव घटक: उत्पादक (हरे पौधे), उपभोक्ता (शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी), अपघटक (जीवाणु, कवक)।
| घटक | भूमिका | उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्पादक | प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाना | घास, पेड़, शैवाल |
| प्राथमिक उपभोक्ता | पौधे खाने वाले (शाकाहारी) | हिरण, टिड्डा, गाय |
| द्वितीयक उपभोक्ता | शाकाहारी खाने वाले | मेंढक, साँप, छोटी चिड़िया |
| तृतीयक उपभोक्ता | मांसाहारी को खाने वाले | बाज, शेर |
| अपघटक | मृत पदार्थ को सड़ाकर पोषक तत्व मिट्टी में लौटाना | जीवाणु, कवक |
- खाद्य शृंखला: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज।
- खाद्य जाल (Food Web): अनेक खाद्य शृंखलाओं का आपस में जुड़ा रूप।
- ऊर्जा का प्रवाह: एक पोषण-स्तर से अगले में लगभग 10% ऊर्जा ही पहुँचती है (लिंडेमन का 10% नियम)। इसलिए खाद्य शृंखला प्रायः 4–5 कड़ियों तक सीमित रहती है।
- अपघटक पारितंत्र के सफ़ाईकर्मी हैं।
याद रखें
मनुष्य द्वारा बनाए गए पारितंत्र, जैसे खेत, बगीचा और एक्वेरियम, कृत्रिम पारितंत्र कहलाते हैं।
8 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: जीव-जगत का शिक्षण
जीव-जगत विज्ञान का सबसे रोचक भाग है, क्योंकि यहाँ सीखने के लिए खुद प्रकृति ही कक्षा है। नीति का ज़ोर इसी पर है कि बच्चे जीवों को देखकर, छूकर और समझकर सीखें, न कि केवल चित्र देखकर रटें। नीचे कक्षा में इस्तेमाल के लिए सुझाव हैं।
- क्षेत्र-भ्रमण: विद्यालय के बगीचे, तालाब, खेत या पास के जंगल में जीवों को देखना।
- अवलोकन-रजिस्टर/डायरी: बच्चे जो भी जीव देखें, उनका चित्र और लक्षण लिखें।
- सूक्ष्मदर्शी का उपयोग: प्याज़ का छिलका, हरी शैवाल, जल की बूँद देखना (शिक्षक की देखरेख में)।
- वर्गीकरण की गतिविधि: पत्तियों, बीजों, कंकड़ों का अपनी-अपनी पहचान से समूह बनाना।
- स्थानीय पर्यावरण: अपने गाँव-शहर के प्रमुख पेड़-पौधे, पक्षी और जन्तुओं की सूची।
- जीवों के प्रति संवेदनशीलता: जन्तुओं पर दया, अहिंसा और सहअस्तित्व के मूल्य।
NEP-2020 / NCF-SE से जुड़ाव
NEP-2020 और NCF-SE में पर्यावरण-जागरूकता, जैव-विविधता का संरक्षण और प्रकृति से जुड़ाव को शिक्षा का हिस्सा माना गया है। NCF-SE के प्रारंभिक स्तर पर आस-पास की दुनिया का खोजी और अनुभव-आधारित अध्ययन है।
9 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
10 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. कोशिका की खोज किसने की?
Q2. कोशिका में केंद्रक की खोज किसने की?
Q3. कोशिका का ऊर्जा-घर किसे कहते हैं?
Q4. केवल पादप कोशिका में पाया जाने वाला भाग कौन-सा है?
Q5. द्विनाम पद्धति किसने दी?
Q6. पाँच जगत वर्गीकरण किसने प्रस्तुत किया?
Q7. मनुष्य का वैज्ञानिक नाम क्या है?
Q8. वर्गीकरण की सबसे छोटी श्रेणी कौन-सी है?
Q9. कवक की कोशिका भित्ति किस पदार्थ की बनी होती है?
Q10. निम्न में से कौन-सा जगत प्रोकैरियोटिक जीवों का है?
Q11. विषाणुओं के विरुद्ध कौन-सी दवा असरदार नहीं है?
Q12. पादपों के उभयचर किसे कहा जाता है?
Q13. नंगे (अनावृत) बीज वाले पौधे कौन-से हैं?
Q14. एकबीजपत्री पौधे की पहचान क्या है?
Q15. सबसे बड़ा जन्तु संघ कौन-सा है?
Q16. तीन कक्ष वाला हृदय किसमें पाया जाता है?
Q17. अंडे देने वाला स्तनधारी कौन-सा है?
Q18. उत्पादक किसे कहा जाता है?
Q19. खाद्य शृंखला में एक पोषण-स्तर से अगले में कितनी ऊर्जा पहुँचती है?
Q20. पारितंत्र के "सफ़ाईकर्मी" किन्हें कहा जाता है?
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