फसलों से अनाज की प्राप्ति एवं पौधों में पोषण
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1 फसल क्या है और फसलों के प्रकार (Crops and Cropping Seasons)
हमारा अधिकांश भोजन खेतों में उगाई गई फसलों से आता है। जब किसी एक प्रकार के पौधे बड़े पैमाने पर एक ही जगह उगाए जाते हैं, तो उन्हें फसल कहते हैं। भारत में मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं, इसलिए ऋतु के आधार पर फसलों का वर्गीकरण सबसे महत्वपूर्ण है।
- फसल (Crop) = किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले एक ही प्रकार के पौधे।
- कृषि (Agriculture) = फसल उगाने, पशु पालने और उनसे उत्पाद पाने की प्रक्रिया।
- खाद्यान्न: गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार (अनाज); चना, अरहर, मूँग, मसूर (दलहन); सरसों, मूँगफली, सोयाबीन (तिलहन)।
| ऋतु-आधारित फसल | बुवाई / कटाई | उदाहरण |
|---|---|---|
| खरीफ (Kharif) | बुवाई: जून-जुलाई (वर्षा का आरंभ); कटाई: सितंबर-अक्टूबर | धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, मूँगफली, कपास |
| रबी (Rabi) | बुवाई: अक्टूबर-नवंबर (सर्दी); कटाई: मार्च-अप्रैल | गेहूँ, चना, मटर, सरसों, जौ, अलसी |
| जायद (Zaid) | रबी और खरीफ के बीच (गर्मी) | तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा |
- खरीफ फसलों को पर्याप्त वर्षा और गर्मी चाहिए; रबी को बुवाई के समय ठंडा और पकने के समय गर्म मौसम चाहिए।
- झारखंड में धान प्रमुख खरीफ फसल है।
याद रखें
याद रखें: खरीफ = मानसून की फसल (धान); रबी = सर्दी की फसल (गेहूँ)।
NCF-SE 2023 से जुड़ाव
NCF-SE 2023 बच्चों को अपने क्षेत्र की कृषि, फसलें और आजीविका से जोड़कर सीखने की बात करता है। स्थानीय फसल-चक्र का अध्ययन कक्षा में उपयोगी परियोजना हो सकता है।
2 फसल उगाने की क्रियाएँ: बुवाई से कटाई तक (Agricultural Practices)
खेत में बीज डाल देने भर से फसल नहीं हो जाती। अच्छी उपज के लिए एक क्रम से कई काम करने पड़ते हैं। इन्हें कृषि-क्रियाएँ कहते हैं। नीचे इन्हें उसी क्रम में समझाया गया है जिस क्रम में किसान इन्हें करता है।
- मृदा की तैयारी: जुताई (मिट्टी पलटना और ढीला करना), मिट्टी के ढेले तोड़ना और समतल करना। इससे जड़ें गहराई तक जाती हैं और केंचुए तथा सूक्ष्मजीव मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।
- बीज का चयन: स्वस्थ, अच्छी गुणवत्ता और रोग-रहित बीज। पानी में डालने पर हल्के/क्षतिग्रस्त बीज तैरते हैं और अच्छे बीज डूब जाते हैं।
- बुवाई (Sowing): बीजों को सही गहराई और दूरी पर डालना। पारंपरिक रूप से हाथ से या कीप से; आधुनिक रूप से बीज-वपित्र (Seed Drill) से।
- खाद एवं उर्वरक देना: मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति।
- सिंचाई (Irrigation): खेत में उचित अंतराल पर पानी देना।
- निराई-गुड़ाई: खरपतवार हटाना।
- फसल-सुरक्षा: कीट, रोग और पशु-पक्षियों से बचाव।
- कटाई (Harvesting): पकी फसल को काटना।
- गहाई और ओसाई: दानों को भूसे से अलग करना।
- भंडारण (Storage): अनाज को सुरक्षित रखना।
| औज़ार / मशीन | उपयोग |
|---|---|
| हल (Plough) | जुताई, मिट्टी पलटना |
| कुदाली (Hoe) | खरपतवार निकालना, मिट्टी ढीली करना |
| कल्टीवेटर | ट्रैक्टर से जुताई |
| बीज-वपित्र | समान दूरी पर बुवाई |
| हँसिया (Sickle) | हाथ से कटाई |
| कंबाइन (Combine) | कटाई और गहाई एक साथ |
- बीज-वपित्र से बीज समान गहराई पर गिरते हैं, समय और श्रम बचता है, और पक्षी बीज नहीं खा पाते।
- गहाई (Threshing): डंठल से दाना अलग करना। ओसाई (Winnowing): हवा के सहारे भारी दाने और हल्के भूसे को अलग करना।
3 खाद, उर्वरक एवं जैविक खेती (Manure, Fertilisers and Organic Farming)
फसलें मिट्टी से लगातार पोषक तत्व लेती हैं, इसलिए उनकी भरपाई करनी पड़ती है। यह काम खाद और उर्वरक से होता है, जिनके बीच का अंतर परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है। इसके साथ फसल-चक्र और जैविक खेती का महत्व भी समझें।
| आधार | खाद (Manure) | उर्वरक (Fertiliser) |
|---|---|---|
| प्राप्ति | पौधों/पशु-अपशिष्ट के अपघटन से (प्राकृतिक) | कारखाने में निर्मित (रासायनिक) |
| पोषक तत्व | कम मात्रा, अनेक तत्व | अधिक सांद्र, विशिष्ट तत्व |
| मृदा पर प्रभाव | ह्यूमस बढ़ाती है, मिट्टी को उपजाऊ बनाती है | अधिक उपयोग से मृदा व जल प्रदूषण |
| उदाहरण | गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद | यूरिया, डी.ए.पी., सुपरफॉस्फेट, NPK |
- कम्पोस्ट (Compost): कृषि/रसोई के कचरे का सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन।
- वर्मीकम्पोस्ट: केंचुओं की सहायता से बना कम्पोस्ट।
- हरी खाद: सनई, ढैंचा जैसी फसल को उगाकर खेत में ही दबा देना।
- फसल-चक्र (Crop Rotation): एक ही खेत में बारी-बारी से अलग फसलें उगाना। फलीदार (दलहनी) फसल उगाने से मृदा में नाइट्रोजन बढ़ती है।
- राइज़ोबियम (Rhizobium) जीवाणु दलहनी पौधों की जड़ों की गाँठों में रहकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधे के उपयोगी रूप में बदलते हैं (नाइट्रोजन-स्थिरीकरण)।
- यूरिया नाइट्रोजन का सबसे प्रचलित उर्वरक है।
भ्रम से बचें
उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता, भूजल और नदी-तालाबों को हानि पहुँचाता है। संतुलित उपयोग और जैविक विकल्प अपनाना बेहतर है।
NEP-2020 से जुड़ाव
NEP-2020 और NCF-SE में सतत विकास और पर्यावरण-संरक्षण पर बल है। जैविक/प्राकृतिक खेती, कम्पोस्टिंग और विद्यालय में किचन गार्डन अनुभव-आधारित सीखने के अच्छे साधन हैं।
4 सिंचाई के साधन एवं जल-संरक्षण (Irrigation)
हर फसल को समय पर पर्याप्त पानी चाहिए। जब वर्षा कम या अनियमित हो, तो खेत को कृत्रिम रूप से पानी देना पड़ता है, इसे सिंचाई कहते हैं। पानी सीमित है, इसलिए सिंचाई की आधुनिक विधियाँ जल बचाने पर भी ध्यान देती हैं।
| साधन / विधि | विशेषता |
|---|---|
| कुआँ और नलकूप | भूजल का उपयोग; पंप से पानी |
| नहर | नदी/जलाशय से दूर तक पानी |
| तालाब / जलाशय | वर्षा-जल संचय |
| पारंपरिक: मोट, चैन-पंप, ढेकली, रहट | पशु/मानव शक्ति आधारित |
| फव्वारा सिंचाई (Sprinkler) | वर्षा जैसी बौछार; असमतल भूमि और कम पानी के लिए उपयुक्त |
| टपक सिंचाई (Drip) | पौधे की जड़ों के पास बूँद-बूँद पानी; सबसे अधिक जल-बचत; फल-सब्ज़ी, बाग़ के लिए उत्तम |
- टपक सिंचाई में वाष्पीकरण और बहाव से पानी की हानि बहुत कम होती है।
- वर्षा-जल संचयन और खेत तालाब से भूजल का स्तर बना रहता है।
- अधिक सिंचाई से जलभराव और लवणता की समस्या हो सकती है।
NEP-2020 से जुड़ाव
NEP-2020 और NCF-SE जल-संरक्षण और संसाधनों के संरक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं। विद्यालय में वर्षा-जल संचयन जैसी परियोजनाएँ उपयोगी हैं।
5 खरपतवार, फसल-सुरक्षा, कटाई और भंडारण (Weeding, Harvesting and Storage)
खेत में फसल के साथ अनचाहे पौधे और कीट भी आ जाते हैं, और पकने के बाद अनाज को सुरक्षित रखना भी एक चुनौती है। इस भाग में फसल की देखभाल से लेकर अनाज के भंडारण तक की सारी बातें एक साथ हैं।
- खरपतवार (Weeds): फसल के साथ उग आने वाले अनचाहे पौधे, जो पानी, पोषक तत्व, धूप और जगह के लिए फसल से होड़ करते हैं। जैसे गाजर घास (पार्थेनियम), चौलाई।
- निराई (Weeding): हाथ/कुदाली से, या खरपतवारनाशी (Weedicides) जैसे 2,4-D से हटाना।
- कीटनाशक (Pesticides): कीट, कवक आदि को मारने के लिए रसायन। इनका उपयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि ये भोजन, मिट्टी और जल को प्रदूषित कर सकते हैं।
- जैविक कीट-नियंत्रण: नीम की पत्तियाँ/तेल, कीट-भक्षी पक्षी और मित्र कीट।
- कटाई (Harvesting): फसल पकने पर काटना। हाथ से हँसिया से, या कंबाइन हार्वेस्टर से।
- कटाई के त्योहार: पोंगल, बैसाखी, ओणम, बिहू, नवान्न आदि। झारखंड में करम, सरहुल जैसे पर्व भी प्रकृति और कृषि से जुड़े हैं।
अनाज का भंडारण
- भंडारण से पहले दानों को सुखाना (नमी हटाना) ज़रूरी है, ताकि कवक और कीट न लगें।
- हानि के कारण: कृंतक (चूहे), कीट, कवक/फफूँद, नमी, ऊष्मा।
- घरेलू उपाय: नीम की पत्तियाँ, राख; बड़े स्तर पर: साइलो, गोदाम, धूमन (Fumigation)।
- भारत में अनाज की खरीद व भंडारण का काम भारतीय खाद्य निगम (FCI, 1965) करता है।
हरित क्रांति
- हरित क्रांति (Green Revolution) 1960 के दशक के मध्य में शुरू हुई। इसमें उच्च उपज वाली किस्में (HYV), उर्वरक, सिंचाई और आधुनिक तकनीक अपनाई गईं।
- भारत में इसके प्रमुख वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन माने जाते हैं।
- इसने गेहूँ और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि की, पर साथ में रसायनों के अधिक प्रयोग और भूजल दोहन जैसी समस्याएँ भी लाई।
6 पौधों में पोषण: प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis)
पौधों का सबसे अनोखा गुण यह है कि वे अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। यह काम पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण नामक क्रिया से होता है। यही क्रिया लगभग पूरी पृथ्वी के जीवन के लिए भोजन और ऑक्सीजन का आधार है, इसलिए इसे विस्तार से समझना ज़रूरी है।
परिभाषा
प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) = वह क्रिया जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज़ (भोजन) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
| आवश्यक घटक | स्रोत |
|---|---|
| सूर्य का प्रकाश | सूर्य |
| क्लोरोफिल (हरा वर्णक) | पत्तियों की कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट में |
| कार्बन डाइऑक्साइड | वायुमंडल, पत्ती के रंध्रों द्वारा |
| जल | मिट्टी से जड़ों द्वारा, तने से पत्तियों तक |
- समीकरण: 6CO₂ + 6H₂O → (सूर्य-प्रकाश, क्लोरोफिल) → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
- बना हुआ ग्लूकोज़ स्टार्च (मंड) के रूप में संचित होता है।
- रंध्र (Stomata): पत्ती की सतह पर छोटे छिद्र; गैसों का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन; द्वार-कोशिकाओं (Guard cells) से घिरे।
- क्लोरोफिल वही हरा रंग है जो पत्तियों को हरा दिखाता है।
- यह क्रिया पत्तियों में सबसे अधिक होती है। हरे तने भी कुछ मात्रा में करते हैं।
प्रकाश-संश्लेषण के प्रमुख प्रयोग
| प्रयोग | निष्कर्ष |
|---|---|
| पत्ते का आधा भाग काले कागज़ से ढँकना, फिर आयोडीन परीक्षण | जिस भाग पर प्रकाश पड़ा, उसी में स्टार्च बनता है, यानी प्रकाश आवश्यक |
| पत्ती को अल्कोहल में गर्म करके क्लोरोफिल हटाना | स्टार्च की जाँच साफ़ दिखाने के लिए |
| जलीय पौधा (हाइड्रिला) और कीप में बुलबुले | प्रकाश में ऑक्सीजन के बुलबुले निकलते हैं |
| पौधे को चूने के पानी/KOH वाले वातावरण में रखना | CO₂ के बिना स्टार्च नहीं बनता |
भ्रम से बचें
पौधे दिन में प्रकाश-संश्लेषण करते हैं और श्वसन दिन-रात दोनों समय करते हैं। यह कहना गलत है कि पौधे रात में केवल CO₂ छोड़ते हैं और दिन में केवल O₂। श्वसन हमेशा चलता है।
NEP-2020 / NCF-SE से जुड़ाव
NEP-2020 और NCF-SE प्रयोग, अवलोकन और खोज-आधारित विज्ञान-शिक्षण पर ज़ोर देते हैं। प्रकाश-संश्लेषण के सरल प्रयोग बच्चों को स्वयं करके सीखने का अच्छा अवसर देते हैं।
7 पौधों में पोषण के अन्य प्रकार: परजीवी, मृतोपजीवी, सहजीवी, कीटभक्षी
सभी पौधे हरे नहीं होते और सभी अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते। कुछ पौधे और कवक दूसरों से भोजन लेते हैं, तो कुछ मिट्टी की कमी पूरी करने के लिए कीड़े पकड़ते हैं। पोषण के इन विविध तरीकों को समझना जीव-जगत की विविधता समझने में मदद करता है।
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वपोषी (Autotrophic) | स्वयं भोजन बनाना | सभी हरे पौधे, शैवाल |
| परजीवी (Parasitic) | दूसरे जीव (पोषी) से भोजन लेना, उसे हानि पहुँचाना | अमरबेल (कस्कूटा) |
| मृतोपजीवी (Saprophytic) | मृत/सड़ते पदार्थ से भोजन | कवक, ब्रेड-मोल्ड, मशरूम, खमीर |
| सहजीवी (Symbiotic) | दो जीव साथ रहकर परस्पर लाभ पाते हैं | लाइकेन (शैवाल + कवक); दलहनी पौधे + राइज़ोबियम |
| कीटभक्षी (Insectivorous) | कीटों को पकड़कर पचाना | घटपर्णी (पिचर प्लांट), वीनस फ्लाईट्रैप, सनड्यू |
- अमरबेल पीले धागे जैसा पौधा है, जिसमें क्लोरोफिल नहीं होता। यह दूसरे पौधे पर लिपटकर उसका भोजन सोख लेता है।
- लाइकेन में शैवाल भोजन बनाता है, और कवक आश्रय तथा जल/खनिज देता है।
- कीटभक्षी पौधे प्रायः उन मिट्टियों में उगते हैं जिनमें नाइट्रोजन की कमी होती है। इसलिए वे कीटों से यह कमी पूरी करते हैं। ये हरे होते हैं और प्रकाश-संश्लेषण भी करते हैं।
- घटपर्णी (Nepenthes) की पत्ती घड़े जैसी होती है। वीनस फ्लाईट्रैप (Dionaea) की पत्ती दो पाटों वाले जाल जैसी होती है।
याद रखें
कीटभक्षी पौधे आंशिक परपोषी हैं: वे अपना भोजन स्वयं भी बनाते हैं और नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कीट भी पचाते हैं।
8 पौधों के खनिज पोषक तत्व एवं मृदा (Plant Nutrients and Soil)
पौधे प्रकाश-संश्लेषण से कार्बन-आधारित भोजन तो बनाते हैं, पर उनकी वृद्धि के लिए मिट्टी से लिए गए खनिज तत्व भी चाहिए। इन तत्वों की कमी के अपने-अपने लक्षण होते हैं। यह भाग पोषक तत्वों, उनकी कमी के लक्षणों और मृदा के प्रकार की जानकारी देता है।
| तत्व | कार्य | कमी का लक्षण |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | प्रोटीन, क्लोरोफिल | पुरानी पत्तियों का पीला पड़ना, वृद्धि कम |
| फॉस्फोरस (P) | जड़ों का विकास, फूल-फल | पत्तियों पर बैंगनी आभा, कमज़ोर जड़ |
| पोटैशियम (K) | रोग-प्रतिरोध, जल-नियमन | पत्तियों के किनारे पीले/भूरे |
| मैग्नीशियम (Mg) | क्लोरोफिल का अंश | पत्तियों में हरिमाहीनता (क्लोरोसिस) |
| लोहा (Fe) | क्लोरोफिल-निर्माण में सहायक | नई पत्तियों में क्लोरोसिस |
- बृहत् पोषक तत्व: N, P, K, Ca, Mg, S। सूक्ष्म पोषक तत्व: Fe, Zn, Mn, Cu, B, Mo, Cl।
- NPK उर्वरक के तीन मुख्य घटक हैं।
- कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन पौधे हवा और जल से लेते हैं।
नाइट्रोजन-स्थिरीकरण
- वायुमंडल की लगभग 78% गैस नाइट्रोजन है, पर पौधे इसे सीधे नहीं ले सकते।
- नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में बदलने वाले: राइज़ोबियम (दलहनी पौधों की गाँठों में), एज़ोटोबैक्टर, नील-हरित शैवाल, और बिजली चमकना।
मृदा (Soil) के प्रकार
| मृदा | विशेषता |
|---|---|
| बलुई (Sandy) | कण बड़े; पानी जल्दी बह जाता है; जलधारण कम |
| चिकनी (Clayey) | कण बहुत महीन; जलधारण अधिक; जल-निकास कम |
| दोमट (Loamy) | बालू, चिकनी मिट्टी और ह्यूमस का मिश्रण; खेती के लिए सर्वोत्तम |
| लाल/लैटेराइट | लौह-ऑक्साइड के कारण लाल; झारखंड में व्यापक |
- ह्यूमस (Humus) = सड़े-गले जैविक पदार्थ, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।
- मृदा-अपरदन को रोकने के लिए वृक्षारोपण, सीढ़ीदार खेती और समोच्च जुताई उपयोगी हैं।
9 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: कृषि और पोषण की शिक्षा
यह विषय केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा अनुभव है। नई शिक्षा नीति चाहती है कि बच्चे ऐसे विषयों को खेत, बगीचे और अपने परिवेश से जोड़कर सीखें। नीचे इससे जुड़े मुख्य बिंदु हैं।
- अनुभवात्मक अधिगम: स्कूल में छोटा बगीचा या किचन गार्डन बनाना, बीज अंकुरण का प्रयोग, कम्पोस्ट गड्ढा।
- स्थानीय व्यावसायिक विशेषज्ञों से सीख: NEP में कक्षा 6–8 के दौरान बगीचे, मिट्टी, कुम्हारी जैसे स्थानीय कौशलों में अनुभव का प्रावधान है।
- बैगलेस दिन: बच्चों को खेती, बाग़वानी जैसे कार्यों से परिचित कराने का अवसर।
- पोषण और स्वास्थ्य: पौष्टिक नाश्ता, मोटे अनाज (श्री अन्न/मिलेट्स) की जानकारी; 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया गया।
- पर्यावरणीय शिक्षा: जल-संरक्षण, जैविक खेती, मृदा-संरक्षण और सतत विकास।
- स्थानीय ज्ञान: परंपरागत खेती, लोक-ज्ञान और स्थानीय पर्व (करम, सरहुल) को पाठ्यक्रम से जोड़ना।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 चाहती है कि विज्ञान का सीखना करके सीखना हो। खेती और पौधों से जुड़े विषय बच्चे खेत-बाग़ में स्वयं अनुभव से सीखें, ताकि विज्ञान रटने की नहीं, जीवन की चीज़ बने।
10 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
11 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. खरीफ की फसल कौन-सी है?
Q2. रबी की फसल की बुवाई सामान्यतः कब होती है?
Q3. कंबाइन मशीन क्या काम करती है?
Q4. अनाज को भूसे से हवा के सहारे अलग करना क्या कहलाता है?
Q5. सबसे अधिक जल-बचत करने वाली सिंचाई विधि कौन-सी है?
Q6. उर्वरक और खाद में सही अंतर क्या है?
Q7. दलहनी पौधों की जड़-गाँठों में कौन-सा जीवाणु रहता है?
Q8. प्रकाश-संश्लेषण में कौन-सी गैस मुक्त होती है?
Q9. पत्तियों को हरा रंग किस वर्णक से मिलता है?
Q10. पत्ती पर गैसों के आदान-प्रदान वाले छोटे छिद्र क्या कहलाते हैं?
Q11. अमरबेल किस प्रकार का पौधा है?
Q12. लाइकेन में कौन-से जीव साथ रहते हैं?
Q13. घटपर्णी (पिचर प्लांट) किस प्रकार का पौधा है?
Q14. कीटभक्षी पौधे किस तत्व की कमी पूरी करने के लिए कीट पचाते हैं?
Q15. खेती के लिए सर्वोत्तम मृदा कौन-सी मानी जाती है?
Q16. मृत पदार्थों से भोजन लेने वाले जीव कहलाते हैं
Q17. हरित क्रांति से जुड़े भारतीय वैज्ञानिक कौन हैं?
Q18. पौधों में प्रोटीन और क्लोरोफिल के निर्माण के लिए कौन-सा तत्व मुख्य है?
Q19. कौन-सा औज़ार बीज को समान दूरी पर बोने में काम आता है?
Q20. पौधे के भोजन का संचित रूप क्या है?
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