प्रदूषण एवं कचरा प्रबंधन
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1 प्रदूषण: अर्थ, प्रदूषक और प्रकार (Pollution)
जब हवा, पानी या मिट्टी में कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जो जीवों और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो, तो उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण आज किसी एक शहर की नहीं, पूरी पृथ्वी की समस्या है। इस भाग में प्रदूषण का अर्थ, प्रदूषकों के प्रकार और मुख्य कारण संक्षेप में दिए गए हैं।
परिभाषा
प्रदूषण (Pollution) = पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों या ऊर्जा का ऐसा समावेश जो जीवों के स्वास्थ्य और पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा प्रभाव डाले। जो पदार्थ प्रदूषण उत्पन्न करता है उसे प्रदूषक (Pollutant) कहते हैं।
| प्रदूषक का प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| जैव-निम्नीकरणीय | सूक्ष्मजीव इन्हें सड़ा देते हैं | सब्ज़ी के छिलके, पत्ते, कागज़, गोबर |
| अजैव-निम्नीकरणीय | आसानी से नहीं सड़ते | प्लास्टिक, काँच, DDT, धातु |
| प्राथमिक प्रदूषक | सीधे उत्सर्जित | CO, SO₂, धूल, धुआँ |
| द्वितीयक प्रदूषक | प्राथमिक प्रदूषकों की क्रिया से बने | स्मॉग, PAN, ऐसिड वर्षा, क्षोभमंडलीय ओज़ोन |
| प्रदूषण का प्रकार | प्रभावित भाग |
|---|---|
| वायु प्रदूषण | वायुमंडल |
| जल प्रदूषण | नदी, तालाब, भूजल, समुद्र |
| मृदा प्रदूषण | भूमि |
| ध्वनि प्रदूषण | शोर |
| प्रकाश प्रदूषण | अत्यधिक कृत्रिम रोशनी |
| तापीय प्रदूषण | गर्म जल का जलाशयों में छोड़ा जाना |
| रेडियोधर्मी प्रदूषण | नाभिकीय विकिरण |
- प्रदूषण के कारण: तेज़ जनसंख्या-वृद्धि, शहरीकरण, उद्योग, वाहन, कृषि-रसायन, कचरा, वन-कटाई।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (भोपाल गैस त्रासदी 1984 के बाद) देश का मुख्य क़ानून है।
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; जल अधिनियम, 1974; राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), 2010; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), 1974।
2 वायु प्रदूषण: कारण, प्रभाव, AQI और नियंत्रण (Air Pollution)
सुबह की धुंध में जब आँखें जलने लगें या साँस लेने में कठिनाई हो, तो यह वायु प्रदूषण का संकेत है। भारत के कई शहर सर्दियों में वायु-गुणवत्ता के संकट से जूझते हैं। इस भाग में वायु प्रदूषण के कारण, प्रदूषक, स्वास्थ्य-प्रभाव और रोकथाम के उपाय दिए गए हैं।
| प्रदूषक | प्रमुख स्रोत | प्रभाव |
|---|---|---|
| कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) | वाहन, अधूरा दहन | हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन-परिवहन रोकती है; दम घुटना |
| सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) | कोयला, थर्मल प्लांट, रिफ़ाइनरी | श्वसन-रोग, अम्लीय वर्षा |
| नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) | वाहन, बिजलीघर | स्मॉग, अम्लीय वर्षा |
| कण पदार्थ PM10, PM2.5 | धूल, धुआँ, निर्माण, पराली दहन | फेफड़ों और रक्त में प्रवेश; PM2.5 सबसे ख़तरनाक |
| सीसा (Pb) | पुराने समय का पेट्रोल | मस्तिष्क पर असर; अब सीसा-रहित पेट्रोल |
| क्षोभमंडलीय ओज़ोन | वाहन-धुआँ + धूप | आँख, फेफड़ों में जलन |
- कणीय पदार्थ: PM10 = व्यास 10 माइक्रोन या कम; PM2.5 = 2.5 माइक्रोन या कम (बाल की मोटाई का लगभग 1/30)।
- स्मॉग (Smog): धुएँ (Smoke) + कोहरे (Fog) का मिश्रण। फोटोकेमिकल स्मॉग (धूप में वाहन-धुएँ से, लॉस एंजिलिस) और सल्फ़ुरस स्मॉग (लंदन 1952)।
- अम्लीय वर्षा: SO₂ और NOx वर्षा-जल में घुलकर सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं; वर्षा-जल का pH 5.6 से कम। संगमरमर की इमारतें (जैसे ताजमहल) और धातु की संरचनाएँ इससे क्षरित होती हैं।
- घरेलू वायु प्रदूषण: चूल्हे में लकड़ी/उपले का धुआँ; उज्ज्वला योजना (2016) में LPG कनेक्शन।
- भारत की वाहन उत्सर्जन मानक: BS-VI अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू।
- पराली जलाना: उत्तर भारत में सर्दियों के प्रदूषण का एक कारण।
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
| AQI | श्रेणी |
|---|---|
| 0–50 | अच्छा |
| 51–100 | संतोषजनक |
| 101–200 | मध्यम |
| 201–300 | ख़राब |
| 301–400 | बहुत ख़राब |
| 401–500 | गंभीर |
- AQI भारत में 2014 में शुरू हुआ। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), 2019।
- रोकथाम: सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, वृक्षारोपण, उद्योगों में स्क्रबर और इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपक, कैटेलिटिक कन्वर्टर, निर्माण-स्थल पर धूल-नियंत्रण।
3 जल प्रदूषण: कारण, प्रभाव और उपचार (Water Pollution)
पानी जीवन है, पर वही पानी जब बीमारी का कारण बन जाए तो यह चिंता की बात है। कारखानों का गंदा पानी, घरेलू मल-जल और खेतों के रसायन नदियों, तालाबों और भूजल को प्रदूषित कर रहे हैं। इस भाग में इसके कारण, प्रभाव, मापदंड और समाधान दिए गए हैं।
- स्रोत: घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि का उर्वरक-कीटनाशक बहाव, तेल रिसाव, शवों/मूर्तियों का विसर्जन, खनन।
- बिंदु स्रोत (पाइप/नाले से) और अबिंदु स्रोत (खेतों का बहाव)।
| मापदंड | अर्थ |
|---|---|
| DO (घुलित ऑक्सीजन) | जल में घुली ऑक्सीजन; जितनी अधिक, उतना स्वच्छ |
| BOD (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग) | सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थ सड़ाने में लगी ऑक्सीजन; जितनी अधिक, उतना प्रदूषित |
| COD (रासायनिक ऑक्सीजन माँग) | कुल रासायनिक ऑक्सीकरण हेतु ऑक्सीजन |
| TDS | कुल घुलित ठोस |
| pH | जल की अम्लीयता/क्षारीयता (पेयजल सामान्यतः 6.5–8.5) |
प्रमुख परिघटनाएँ
- सुपोषण (Eutrophication): फॉस्फेट-नाइट्रेट के कारण शैवाल का अत्यधिक विकास (शैवाल प्रस्फुटन); मरकर सड़ने पर O₂ घटता है और मछलियाँ मरती हैं।
- जैव-आवर्धन (Biomagnification): खाद्य शृंखला में विषैले पदार्थ (DDT, पारा) का ऊपरी स्तर पर बढ़ता संकेंद्रण।
- मिनामाता रोग: पारे के प्रदूषण (जापान)। इताई-इताई: कैडमियम से।
- जल-जनित रोग: हैज़ा, टाइफाइड, पेचिश, पीलिया (हेपेटाइटिस A), डायरिया।
- फ्लोरोसिस (फ्लोराइड की अधिकता) और आर्सेनिकोसिस (आर्सेनिक की अधिकता)।
नियंत्रण और उपचार
- सीवेज शोधन संयंत्र (STP), औद्योगिक अपशिष्ट शोधन (ETP)।
- जैविक खेती, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, वर्षा-जल संचयन।
- पेयजल शुद्धिकरण: फिटकरी से अवसादन, निस्यंदन, क्लोरीनीकरण, उबालना, UV/RO।
- गंगा एक्शन प्लान (1985), नमामि गंगे (2014); जल जीवन मिशन (2019): हर घर नल से जल।
- ORS से निर्जलीकरण का उपचार।
4 मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और अन्य प्रदूषण (Soil, Noise and Other Pollution)
प्रदूषण केवल हवा और पानी तक सीमित नहीं है। खेतों की मिट्टी, गलियों का शोर, रात की चमकदार रोशनी और परमाणु विकिरण भी प्रदूषण के रूप हैं। इनके कारण, प्रभाव और उपाय यहाँ एक साथ दिए गए हैं।
मृदा प्रदूषण
- कारण: अत्यधिक रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक, प्लास्टिक कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट, खनन, अम्लीय वर्षा।
- प्रभाव: उर्वरता घटना, फसल में विषैले तत्व, खाद्य शृंखला में प्रवेश, मृदा-जीवों (केंचुए, सूक्ष्मजीव) की हानि।
- उपाय: जैविक खेती, फसल-चक्र, जैव-उर्वरक, मृदा-परीक्षण (मृदा स्वास्थ्य कार्ड), प्लास्टिक पर नियंत्रण, वर्मीकम्पोस्ट।
ध्वनि प्रदूषण
- अवांछित या अत्यधिक तीव्र ध्वनि। मात्रक डेसिबल (dB)।
- स्रोत: वाहन-हॉर्न, लाउडस्पीकर, पटाखे, उद्योग, निर्माण, हवाई जहाज़।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, उच्च रक्तचाप, तनाव, बहरापन (लगभग 85 dB से अधिक का लंबा संपर्क)।
- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000: आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 dB और रात में 45 dB सीमा; रात (रात 10 बजे से सुबह 6 बजे) में लाउडस्पीकर पर रोक।
- उपाय: साइलेंस ज़ोन, पेड़-पौधे (ध्वनि अवशोषक), हॉर्न कम बजाना, ध्वनि-रोधी दीवारें, जागरूकता।
अन्य
- प्रकाश प्रदूषण: रात में अत्यधिक कृत्रिम रोशनी; खगोल-अवलोकन में बाधा; पक्षियों और समुद्री कछुओं का दिशा-भ्रम।
- तापीय प्रदूषण: बिजलीघर का गर्म जल नदी में छोड़ना; जल में O₂ घटता है।
- रेडियोधर्मी प्रदूषण: नाभिकीय दुर्घटना (चेर्नोबिल 1986, फुकुशिमा 2011), परमाणु परीक्षण, रेडियोधर्मी अपशिष्ट।
- भोपाल गैस त्रासदी: 2–3 दिसंबर 1984; यूनियन कार्बाइड कारख़ाने से मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस का रिसाव।
5 कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन: प्रकार, 3R और घरेलू पृथक्करण (Waste Management)
हर परिवार रोज़ कुछ न कुछ कचरा पैदा करता है, पर वह कचरा कहाँ जाता है, यह सोचना भी हमारी ज़िम्मेदारी है। सही प्रबंधन से कचरा संसाधन बन सकता है। इस भाग में अपशिष्ट के प्रकार, प्रबंधन के सिद्धांत और घर पर पृथक्करण के तरीके दिए गए हैं।
| अपशिष्ट | उदाहरण |
|---|---|
| ठोस (नगरपालिका) अपशिष्ट | घरेलू, बाज़ार, कार्यालय का कचरा |
| जैविक / गीला | सब्ज़ी-फल के छिलके, बचा खाना, पत्ते |
| सूखा | प्लास्टिक, कागज़, धातु, काँच |
| जैव-चिकित्सा अपशिष्ट | अस्पताल का कचरा (सुई, पट्टी, अंग) |
| ई-अपशिष्ट | मोबाइल, कंप्यूटर, बैटरी, चार्जर |
| ख़तरनाक अपशिष्ट | रसायन, पेंट, कीटनाशक, ऑइल |
| निर्माण एवं ध्वंस अपशिष्ट | ईंट, मलबा |
| रेडियोधर्मी अपशिष्ट | नाभिकीय बिजलीघर, अनुसंधान |
कचरे का प्रबंधन: 5R
- Refuse (मना करें): अनावश्यक प्लास्टिक/थैली को।
- Reduce (घटाएँ): कम सामान, कम कचरा।
- Reuse (पुनः उपयोग): बोतल, थैले, कपड़े।
- Recycle (पुनर्चक्रण): कागज़, काँच, धातु, प्लास्टिक।
- Recover / Rot (विघटित/ऊर्जा): खाद, बायोगैस।
- सामान्यतः 3R: Reduce, Reuse, Recycle।
निपटान की विधियाँ
- खाद बनाना (Composting): जैविक कचरे से खाद; वर्मीकम्पोस्टिंग में केंचुए।
- बायोगैस / बायो-मीथेनेशन।
- पुनर्चक्रण: पुराने कागज़ से नया कागज़, काँच/धातु का पुनः गलाना।
- भस्मीकरण (Incineration): उच्च ताप पर जलाना; ऊर्जा बनती है पर वायु-प्रदूषण का ख़तरा।
- भूमि-भराव (Landfill): गड्ढों में दबाना; मीथेन और रिसाव (लीचेट) की समस्या।
- कचरे से ऊर्जा (Waste-to-Energy), RDF (Refuse Derived Fuel) आदि।
6 भारत में कचरा-प्रबंधन नियम: SWM-2026, प्लास्टिक, ई-कचरा और जैव-चिकित्सा (Rules)
भारत ने कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए अलग-अलग प्रकार के कचरे हेतु अलग नियम बनाए हैं। इनमें सबसे ताज़ा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 हैं, जो स्रोत पर कचरे को चार धाराओं में बाँटने की अनिवार्यता लाए हैं। परीक्षा की दृष्टि से इनके प्रमुख प्रावधान जानना उपयोगी है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 (SWM Rules, 2026)
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी; 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी; इन्होंने 2016 के नियमों का स्थान लिया। शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों पर लागू।
| धारा | क्या शामिल | निपटान |
|---|---|---|
| गीला (Wet) | रसोई का कचरा, बचा भोजन, फल-सब्ज़ी के छिलके | खाद बनाना या बायो-मीथेनेशन |
| सूखा (Dry) | प्लास्टिक, कागज़, धातु, काँच | सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा (MRF) को |
| सैनिटरी | डायपर, सैनिटरी नैपकिन | सुरक्षित रूप से लपेटकर अलग से |
| विशेष देखभाल (Special care) | बल्ब, बैटरी, दवाइयाँ | केवल अधिकृत एजेंसी/संग्रह केंद्र को |
- बल्क अपशिष्ट उत्पादक (BWG): जो इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करे: फ़र्श-क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या अधिक, जल-खपत 40,000 लीटर/दिन, या 100 kg/दिन कचरा। इसमें आवासीय सोसायटियाँ, सरकारी भवन और विश्वविद्यालय शामिल।
- बल्क उत्पादकों को गीला कचरा परिसर में ही संसाधित करना होगा, अन्यथा "विस्तारित बल्क उत्पादक उत्तरदायित्व (EBWGR)" प्रमाणपत्र लेना होगा।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays): नियम-उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति; पृथक्करण न करने पर लैंडफ़िल शुल्क अधिक।
- RDF: सीमेंट और ऊर्जा-संयंत्रों को ठोस ईंधन के स्थान पर RDF का उपयोग लगभग 5% से 15% तक बढ़ाना (छह वर्ष में)।
- लैंडफ़िल केवल गैर-पुनर्चक्रणीय और निष्क्रिय (inert) कचरे के लिए; पुराने कचरे के ढेरों का बायोमाइनिंग और बायोरेमेडिएशन।
- पहाड़ी इलाकों और द्वीपों में पर्यटकों से उपयोगकर्ता शुल्क लगाया जा सकता है।
- ऑनलाइन केंद्रीय पोर्टल से निगरानी; राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति।
अन्य प्रमुख नियम
| नियम | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 (संशोधन 2021–22) | 1 जुलाई 2022 से चुनिंदा एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध; EPR (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व); थैलियों की न्यूनतम मोटाई 120 माइक्रोन (31 दिसंबर 2022 से) |
| ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 | 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी; EPR, पुनर्चक्रण प्रमाणपत्र |
| बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 | बैटरी के संग्रह और पुनर्चक्रण के लिए EPR |
| जैव-चिकित्सा अपशिष्ट नियम, 2016 | रंग-कोड वाले थैले: पीला, लाल, सफ़ेद, नीला |
| ख़तरनाक एवं अन्य अपशिष्ट नियम, 2016 | ख़तरनाक कचरे का भंडारण-निपटान |
- स्वच्छ भारत मिशन: 2 अक्टूबर 2014; स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (2021): "कचरा-मुक्त शहर"।
- EPR (Extended Producer Responsibility): उत्पाद के उपयोग के बाद के कचरे की ज़िम्मेदारी उत्पादक की भी।
- पूर्व नियम (2016) में घरेलू कचरे के लिए तीन धाराएँ (गीला-सूखा-घरेलू ख़तरनाक) थीं; नए नियमों में चार हैं।
7 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: प्रदूषण और कचरा प्रबंधन का शिक्षण
प्रदूषण और कचरा-प्रबंधन ऐसा पाठ है जो बच्चों के व्यवहार को सीधे बदल सकता है। NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण-शिक्षा, सतत विकास और जीवन-कौशल पर ज़ोर देते हैं। कक्षा में निम्न गतिविधियाँ इसे अधिक सार्थक बना सकती हैं।
- विद्यालय में गीले-सूखे कचरे के अलग डस्टबिन और बच्चों की निगरानी टीम (ईको-क्लब)।
- कम्पोस्ट-गड्ढा / वर्मीकम्पोस्ट बनाना और बगीचे में उपयोग करना।
- वायु-गुणवत्ता सर्वेक्षण: वैसलीन लगी स्लाइड को बाहर रखकर धूल-कण देखना।
- जल-परीक्षण: अलग-अलग स्रोतों के जल का pH, गंदलापन और गंध की तुलना।
- ध्वनि-सर्वेक्षण: विद्यालय के आसपास डेसिबल मापक ऐप से शोर का मापन।
- बेकार से उपयोगी (Best out of Waste): पुरानी बोतल, कपड़े, कागज़ से वस्तुएँ बनाना।
- स्वच्छता अभियान, रैली, नुक्कड़ नाटक; प्लास्टिक-मुक्त विद्यालय।
- समुदाय से जुड़ाव: पंचायत/नगर निकाय के सफ़ाई-कर्मियों से संवाद और उनके कार्य का सम्मान।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण-चेतना, सतत जीवनशैली और सक्रिय नागरिकता को पाठ्यचर्या का हिस्सा बनाने पर बल देते हैं। बच्चे स्वयं पहल करें, परियोजना करें और घर-समाज में बदलाव लाएँ।
8 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
9 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम भारत में किस वर्ष लागू हुआ?
Q2. सबसे सूक्ष्म और अधिक ख़तरनाक कण कौन-सा है?
Q3. अम्लीय वर्षा में वर्षा-जल का pH कितने से कम होता है?
Q4. अम्लीय वर्षा मुख्यतः किन गैसों के कारण होती है?
Q5. AQI की सबसे ख़राब श्रेणी कौन-सी है?
Q6. कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में किससे जुड़ती है?
Q7. जल में कार्बनिक प्रदूषण का सूचक कौन-सा है?
Q8. जल निकायों में शैवाल का अत्यधिक विकास क्या कहलाता है?
Q9. खाद्य शृंखला में विषैले पदार्थ की मात्रा के बढ़ते जाने को क्या कहते हैं?
Q10. मिनामाता रोग किस धातु के प्रदूषण से हुआ?
Q11. भोपाल गैस त्रासदी में कौन-सी गैस रिसी थी?
Q12. ध्वनि प्रदूषण को किस इकाई में मापा जाता है?
Q13. भारत में BS-VI मानक पूरे देश में कब से लागू हुआ?
Q14. 3R का क्या अर्थ है?
Q15. SWM नियम 2026 कब से प्रभावी हुए?
Q16. SWM नियम 2026 में स्रोत पर कचरे को कितनी धाराओं में बाँटना है?
Q17. सैनिटरी नैपकिन और डायपर किस श्रेणी में आते हैं?
Q18. सीमेंट और ऊर्जा संयंत्रों के लिए RDF संबंधी प्रावधान क्या है?
Q19. कुछ एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध भारत में कब से लगा?
Q20. स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ?
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