पर्यावरण अध्ययन का महत्व एवं आवश्यकता
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1 पर्यावरण अध्ययन का महत्व (Importance of EVS)
हम जो हवा लेते हैं, जो पानी पीते हैं और जो भोजन खाते हैं, सब पर्यावरण से मिलता है। अगर यही पर्यावरण बिगड़ गया तो जीवन संकट में पड़ेगा। इसलिए बचपन से पर्यावरण को समझना और उसके प्रति ज़िम्मेदार बनना आज की सबसे ज़रूरी शिक्षाओं में से एक है।
- जीवन का आधार: हवा, पानी, मिट्टी और जैव-विविधता के बिना जीवन असंभव।
- जागरूकता: बच्चे समस्याओं (प्रदूषण, कचरा, जल-संकट) को पहचानना सीखते हैं।
- मूल्य-निर्माण: प्रकृति के प्रति प्रेम, करुणा, सहयोग और ज़िम्मेदारी।
- स्वास्थ्य और स्वच्छता की आदतें।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अवलोकन, प्रश्न, परीक्षण, निष्कर्ष।
- सामाजिक समझ: समुदाय, विविधता, समानता और पारस्परिक निर्भरता की समझ।
- आजीविका: कृषि, वानिकी, पर्यावरण-विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अवसर।
- सतत विकास: आज की ज़रूरतों को इस तरह पूरा करना कि आने वाली पीढ़ियों की ज़रूरतें प्रभावित न हों।
याद रखें
सतत विकास की यह परिभाषा ब्रंटलैंड आयोग रिपोर्ट "Our Common Future" (1987) से प्रसिद्ध हुई।
2 प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ (Environmental Problems)
आज धरती कई एक-दूसरे से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, जैसे प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और जैव-विविधता का ह्रास। इन समस्याओं के कारण मानव-निर्मित हैं, इसलिए समाधान भी मानवीय प्रयासों से ही संभव है। प्राथमिक शिक्षक को इनकी बुनियादी समझ होनी चाहिए।
| समस्या | मुख्य कारण / प्रभाव |
|---|---|
| वायु-प्रदूषण | वाहन, कारखाने, पराली/कचरा जलाना; साँस की बीमारियाँ |
| जल-प्रदूषण | सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट; जल-जनित रोग |
| मृदा-प्रदूषण / अपरदन | रसायन, प्लास्टिक; उपजाऊपन घटना |
| ध्वनि-प्रदूषण | हॉर्न, लाउडस्पीकर; तनाव, बहरापन |
| वनों की कटाई | खेती, खनन, निर्माण; जैव-विविधता और वर्षा पर असर |
| ग्लोबल वार्मिंग / जलवायु परिवर्तन | ग्रीनहाउस गैसें (CO2, मीथेन); तापमान वृद्धि |
| ओज़ोन परत का क्षय | CFC; पराबैंगनी किरणों का ख़तरा |
| प्लास्टिक और ई-कचरा | अनिम्नीकरणीय; मृदा, जल और पशुओं को हानि |
| जैव-विविधता का ह्रास | आवास-नाश, शिकार; प्रजातियाँ लुप्त |
- अम्लीय वर्षा: SO2 और NOx के कारण।
- मरुस्थलीकरण: उपजाऊ भूमि का बंजर होना।
- जनसंख्या-दबाव संसाधनों की माँग बढ़ाता है।
- झारखंड में खनन-क्षेत्रों में भूमि-क्षरण, कोयला क्षेत्रों में वायु-प्रदूषण, और नदी-प्रदूषण (जैसे दामोदर के कुछ हिस्सों में) जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं।
3 पर्यावरण से जुड़े संवैधानिक प्रावधान और कानून
भारत में पर्यावरण की रक्षा केवल नैतिक कर्तव्य नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी ज़िम्मेदारी भी है। संविधान राज्य और नागरिक दोनों पर यह दायित्व डालता है, और संसद ने समय-समय पर अनेक कानून बनाए हैं। TET और अन्य परीक्षाओं में ये प्रावधान बार-बार पूछे जाते हैं।
| प्रावधान | विषय |
|---|---|
| अनुच्छेद 48A (नीति-निदेशक तत्त्व) | राज्य पर्यावरण का संरक्षण-संवर्धन करे और वन-वन्यजीवों की रक्षा करे; 42वें संशोधन 1976 से जुड़ा |
| अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य) | नागरिक वन, झील, नदी, वन्यजीव सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें और जीवों पर दया रखें |
| अनुच्छेद 21 | न्यायालयों ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना |
| अधिनियम | वर्ष |
|---|---|
| वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम | 1972 |
| जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम | 1974 |
| वन (संरक्षण) अधिनियम | 1980 |
| वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम | 1981 |
| पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम | 1986 |
| जैव-विविधता अधिनियम | 2002 |
| राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) अधिनियम | 2010 |
- NGT पर्यावरण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के लिए है (अक्टूबर 2010 से कार्यरत)।
- राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006 में आई।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना 1974 में।
4 पर्यावरण आंदोलन, दिवस और अंतर्राष्ट्रीय पहल
जन-आंदोलनों ने भारत में पर्यावरण की समझ बदली है। चिपको से लेकर नर्मदा बचाओ तक, इन आंदोलनों में स्थानीय समुदाय, खासकर महिलाओं की भूमिका अग्रणी रही। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय दिवस और समझौते वैश्विक जागरूकता बनाए रखते हैं।
| आंदोलन | वर्ष / स्थान / विशेष |
|---|---|
| चिपको आंदोलन | 1973, उत्तराखंड (चमोली); पेड़ों से चिपककर कटाई रोकना; सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी |
| अप्पिको आंदोलन | 1983, कर्नाटक; चिपको से प्रेरित |
| साइलेंट वैली बचाओ | केरल, 1970 के दशक के अंत में |
| नर्मदा बचाओ आंदोलन | 1985 के बाद, मेधा पाटकर |
| जंगल बचाओ आंदोलन | 1982 के आसपास सिंहभूम (झारखंड) में साल वनों की कटाई के विरुद्ध जनजातीय आंदोलन |
| दिवस | तारीख |
|---|---|
| विश्व आर्द्रभूमि दिवस | 2 फ़रवरी |
| विश्व वन्यजीव दिवस | 3 मार्च |
| विश्व वन दिवस | 21 मार्च |
| विश्व जल दिवस | 22 मार्च |
| पृथ्वी दिवस | 22 अप्रैल |
| अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस | 22 मई |
| विश्व पर्यावरण दिवस | 5 जून |
| विश्व ओज़ोन दिवस | 16 सितंबर |
| वन्यजीव सप्ताह | 1-7 अक्टूबर |
| वन महोत्सव | जुलाई का पहला सप्ताह |
- स्टॉकहोम सम्मेलन 1972 की स्मृति में 5 जून को पर्यावरण दिवस; पहली बार 1974 में मनाया गया।
- पेरिस समझौता (2015): तापमान वृद्धि 2 डिग्री से नीचे, प्रयास 1.5 डिग्री।
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): अक्टूबर 2022 में शुरू; पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली।
- SDGs (2015): 17 सतत विकास लक्ष्य; लक्ष्य 4.7 शिक्षा द्वारा सतत विकास की समझ से जुड़ा।
5 झारखंड का पर्यावरणीय संदर्भ और जनजातीय परंपराएँ
झारखंड वनों, खनिजों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रकृति पूजा जीवन का हिस्सा है। साथ ही खनन और विकास-परियोजनाओं के दबाव भी हैं, इसलिए यह राज्य पर्यावरण और विकास के संतुलन का सजीव उदाहरण है।
- सरना / जाहेरथान: जनजातियों के पवित्र उपवन, जहाँ वृक्षों की रक्षा आस्था से जुड़ी है।
- सरहुल (साल वृक्ष की पूजा) और करम (करम वृक्ष की पूजा) प्रकृति-पर्व हैं।
- सारंडा (पश्चिमी सिंहभूम): एशिया के सबसे घने साल वनों में से एक के रूप में प्रसिद्ध।
- राष्ट्रीय उद्यान: बेतला (पलामू) झारखंड का प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान।
- हाथी और बाघ अभ्यारण्य: पलामू व्याघ्र आरक्षित क्षेत्र (Project Tiger का हिस्सा)।
- खनिज: कोयला, लोहा, बॉक्साइट, अभ्रक, तांबा, यूरेनियम आदि; खनन से रोज़गार के साथ भूमि-क्षरण भी।
- जंगल-आधारित आजीविका: तसर, लाख, महुआ, तेंदू पत्ता, सखुआ पत्ता।
याद रखें
जनजातीय समुदायों का परंपरागत ज्ञान (TEK) पर्यावरण-शिक्षा का मूल्यवान स्रोत है। शिक्षक इसे कक्षा में शामिल करें।
6 NEP-2020 के संदर्भ में: पर्यावरण अध्ययन का महत्व सिखाना
बच्चों को डराने के बजाय उन्हें आशावान, सक्रिय और ज़िम्मेदार बनाना पर्यावरण-शिक्षा की असली सफलता है। NEP-2020 पाठ्यक्रम में पर्यावरण-शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को शामिल करने की बात कहती है। साथ ही NCF भी "सीखने से कार्य तक" की यात्रा पर बल देते हैं।
- ईको-क्लब और विद्यालय में हरित पहल (वृक्षारोपण, कम्पोस्ट, जल-बचत)।
- हरित ऑडिट: विद्यालय में बिजली, पानी, कचरे का मापन।
- प्रकृति-भ्रमण और स्थानीय जैव-विविधता सूची।
- समुदाय से जुड़ाव: पंचायत, वन-विभाग और स्थानीय बुज़ुर्गों से संवाद।
- आशा-आधारित दृष्टि: समस्या के साथ समाधान और स्थानीय सफल उदाहरण भी दिखाना।
- आदतें बनाना: दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव (बैग साथ ले जाना, बिजली बंद करना)।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 के अनुसार पर्यावरण-शिक्षा जागरूकता से कार्य तक, स्थानीय ज्ञान, आशावादी दृष्टि और सतत जीवन-शैली पर केंद्रित हो।
7 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
8 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. पर्यावरण संरक्षण से संबंधित राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व में कौन-सा अनुच्छेद आता है?
Q2. संविधान का कौन-सा प्रावधान नागरिकों को प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य देता है?
Q3. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष बना?
Q4. वन (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ?
Q5. चिपको आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?
Q6. चिपको आंदोलन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व कौन थे?
Q7. विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
Q8. विश्व ओज़ोन दिवस कब मनाया जाता है?
Q9. पृथ्वी दिवस (Earth Day) की तारीख क्या है?
Q10. सतत विकास (Sustainable Development) की प्रसिद्ध परिभाषा किस रिपोर्ट से आई?
Q11. कथन (A): वनों की कटाई से जैव-विविधता घटती है। कथन (R): वन अनेक जीवों के प्राकृतिक आवास हैं। सही विकल्प?
Q12. ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण कौन-सी गैसें हैं?
Q13. ओज़ोन परत के क्षय का मुख्य कारण कौन-से रसायन हैं?
Q14. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) किस उद्देश्य से बना है?
Q15. "मिशन LiFE" का क्या अर्थ है?
Q16. झारखंड का प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कौन-सा है?
Q17. जनजातीय समुदाय के पवित्र उपवन को झारखंड में किस नाम से जाना जाता है?
Q18. एक शिक्षक स्कूल में ईको-क्लब बनवाता है और बच्चे कचरा-पृथक्करण का अभियान चलाते हैं। यह किस शिक्षण-दृष्टि को दर्शाता है?
Q19. बच्चों को पर्यावरणीय समस्याएँ पढ़ाते समय सर्वाधिक उचित दृष्टि कौन-सी है?
Q20. अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस कब मनाया जाता है?
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| Category | JTET Resources |
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