प्राकृतिक घटनाएँ, प्रबंधन तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत
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1 प्राकृतिक घटनाएँ और आपदाएँ: अर्थ एवं वर्गीकरण (Natural Phenomena and Disasters)
सूर्योदय, ऋतुएँ, वर्षा और बादल प्राकृतिक घटनाएँ हैं जो जीवन को चलाती हैं। पर जब यही घटनाएँ अत्यधिक उग्र हो जाएँ और जन-धन की हानि करें, तो वे आपदा बन जाती हैं। इस भाग में प्राकृतिक घटनाओं और आपदाओं का भेद तथा उनके प्रकार स्पष्ट किए गए हैं।
- प्राकृतिक घटना: प्रकृति में अपने आप घटने वाली प्रक्रिया (दिन-रात, ऋतु, ज्वार-भाटा, वर्षा, बिजली, भूकंप)।
- आपदा (Disaster): ऐसी घटना जिससे जन-धन, संपत्ति और पर्यावरण की भारी क्षति हो और समाज की सामना करने की क्षमता से बाहर हो जाए।
- खतरा (Hazard) संभावित ख़तरा है; संवेदनशीलता (Vulnerability) प्रभावित होने की संभावना; जोखिम (Risk) दोनों का संयुक्त परिणाम।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| भूगर्भीय (भू-वैज्ञानिक) | भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, सुनामी |
| जल-मौसम संबंधी | बाढ़, सूखा, चक्रवात, ओलावृष्टि, शीत लहर, लू, आकाशीय बिजली |
| जैविक | महामारी, टिड्डी-दल, पशु-रोग |
| मानवजनित | औद्योगिक दुर्घटना, आग, रासायनिक/नाभिकीय दुर्घटना, भोपाल गैस त्रासदी (1984) |
- कारण: केवल प्रकृति नहीं, मानवीय क्रियाएँ (वन-कटाई, अनियोजित निर्माण, नदी-तट पर बसावट, जलवायु परिवर्तन) भी आपदाओं को बढ़ाती हैं।
- प्रभाव: जन-हानि, संपत्ति-हानि, आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर।
2 भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी (Earthquake, Volcano and Tsunami)
भूकंप और ज्वालामुखी धरती के भीतर की हलचल से पैदा होते हैं और बिना चेतावनी के आते हैं। समुद्र के भीतर भूकंप से जन्मी विशाल लहरें सुनामी कहलाती हैं। इन घटनाओं का विज्ञान और उनसे बचाव जानना ज़रूरी है।
भूकंप (Earthquake)
- पृथ्वी की सतह के अचानक काँपने को भूकंप कहते हैं। प्रमुख कारण प्लेटों की गति (टेक्टोनिक प्लेट)।
- फोकस (Focus / उद्गम केंद्र): जहाँ भूगर्भ में भूकंप उत्पन्न होता है। अधिकेंद्र (Epicentre): फोकस के ठीक ऊपर सतह पर बिंदु; यहाँ क्षति सर्वाधिक।
- भूकंपीय तरंगें: P तरंग (प्राथमिक, अनुदैर्घ्य, तेज़, ठोस-द्रव दोनों में); S तरंग (द्वितीयक, अनुप्रस्थ, केवल ठोस में); सतही तरंगें (सबसे अधिक विनाशकारी)।
- सिस्मोग्राफ / भूकंपमापी: तरंगों को दर्ज करने का यंत्र।
- रिक्टर स्केल: परिमाण (तीव्रता) मापता है; प्रत्येक एक इकाई की वृद्धि पर ऊर्जा लगभग 32 गुना। मरकेली स्केल: प्रभाव/क्षति का मापन। आधुनिक रूप से अब आघूर्ण परिमाण (Moment Magnitude) प्रयुक्त होता है।
- भारत में भूकंपीय क्षेत्र: ज़ोन II, III, IV और V (अब चार)। ज़ोन V सबसे अधिक संवेदनशील (पूर्वोत्तर, कश्मीर, कच्छ आदि)। 2025 में प्रस्तावित अतिरिक्त "ज़ोन VI" वाला नया मानचित्र मार्च 2026 में BIS ने वापस ले लिया; इसलिए अभी चार ज़ोन ही लागू हैं।
- भारत के उल्लेखनीय भूकंप: लातूर (1993), भुज-कच्छ (2001), कश्मीर (2005)।
भूकंप के समय सुरक्षा
- झुकें, ढकें और पकड़ें (Drop, Cover, Hold On): मज़बूत मेज़ के नीचे जाकर उसे पकड़ें।
- काँच, खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें। लिफ्ट का प्रयोग न करें।
- खुले में हों तो इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर जाएँ।
- सुरक्षित और भूकंप-रोधी भवन-निर्माण; भारी वस्तुएँ दीवार से सुरक्षित।
ज्वालामुखी
- पृथ्वी की पर्पटी की दरार से मैग्मा, राख और गैसों का बाहर निकलना। बाहर आया मैग्मा लावा कहलाता है।
- प्रशांत महासागर का "अग्नि वलय" (Ring of Fire) में अधिकांश ज्वालामुखी और भूकंप।
- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी अंडमान-निकोबार का बैरन द्वीप है।
सुनामी (Tsunami)
- जापानी शब्द ("बंदरगाह की लहर")। समुद्र के भीतर भूकंप, ज्वालामुखी या भूस्खलन से उठने वाली विशाल लहरें।
- खुले सागर में तरंगदैर्घ्य बहुत अधिक पर ऊँचाई कम; तट के पास आकर ऊँचाई तेज़ी से बढ़ती है।
- 26 दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी ने भारत सहित कई देशों में भारी तबाही मचाई।
- भारतीय सुनामी पूर्व-चेतावनी केंद्र (ITEWC), INCOIS हैदराबाद में स्थित है।
- सुरक्षा: समुद्र का अचानक पीछे हटना चेतावनी हो सकती है; तुरंत ऊँची और भीतरी जगह की ओर जाएँ।
3 चक्रवात, बाढ़, सूखा, भूस्खलन और बिजली (Cyclone, Flood, Drought, Landslide, Lightning)
भारत में आपदाओं में सबसे अधिक बार आने वाली हैं बाढ़, सूखा और चक्रवात। इनका मुख्य कारण मानसून की अनियमितता, भौगोलिक स्थिति और मानवीय हस्तक्षेप है। झारखंड जैसे राज्यों के लिए आकाशीय बिजली, सूखा और बाढ़ विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
| आपदा | अर्थ और कारण | बचाव / प्रबंधन |
|---|---|---|
| चक्रवात | समुद्र में निम्न दाब से घूर्णनशील तेज़ पवनें (हिंद महासागर में "साइक्लोन") | पूर्व-चेतावनी, सुरक्षित आश्रय, तटीय वृक्षारोपण (मैंग्रोव) |
| बाढ़ | नदी का जल तटबंध पार कर आबादी में फैलना; अत्यधिक वर्षा, बाँध टूटना, वन-कटाई | तटबंध, जलाशय, वन लगाना, पूर्व-चेतावनी |
| सूखा | लंबे समय तक वर्षा की कमी; जल-संकट | वर्षा-जल संचयन, सिंचाई, सूखा-सहिष्णु फसलें |
| भूस्खलन | ढलान से चट्टान/मिट्टी का नीचे खिसकना; भारी वर्षा, वन-कटाई | वृक्षारोपण, ढलान पर निर्माण पर रोक, दीवार |
| आकाशीय बिजली | बादलों से धरती पर विद्युत-विसर्जन | पक्के भवन में शरण, पेड़/जलाशय से दूर, तड़ित चालक |
- चक्रवात के नाम क्षेत्रीय सूची के अनुसार दिए जाते हैं; उत्तरी हिंद महासागर में इसका समन्वय भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) करता है।
- चक्रवात की आँख (Eye) केंद्र में शांत क्षेत्र होता है।
- शीत लहर और लू: तापमान के अत्यधिक गिरने या बढ़ने पर।
- ओलावृष्टि फसलों के लिए हानिकारक है।
- लू से बचाव: पर्याप्त जल, ORS, हल्के रंग के सूती कपड़े, दोपहर में बाहर जाने से बचना।
भ्रम से बचें
आकाशीय बिजली से झारखंड सहित अनेक राज्यों में हर साल जनहानि होती है। गरज के समय पेड़ के नीचे शरण लेना सबसे ख़तरनाक है।
4 आपदा प्रबंधन: चक्र, संस्थाएँ और विद्यालय की भूमिका (Disaster Management)
आपदाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, पर उनके नुकसान को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है। इसी काम को आपदा प्रबंधन कहते हैं। इसमें आपदा से पहले, उसके दौरान और बाद की सभी तैयारियाँ और कार्यवाहियाँ आती हैं।
परिभाषा
आपदा प्रबंधन = आपदा के जोखिम को घटाने के लिए योजना, तैयारी, तुरंत प्रतिक्रिया और पुनर्वास की सतत प्रक्रिया।
| चरण | कार्य |
|---|---|
| आपदा-पूर्व (शमन और तैयारी) | जोखिम-आकलन, चेतावनी-तंत्र, भवन-संहिता, मॉक-ड्रिल, प्रशिक्षण, आपातकालीन किट |
| आपदा के दौरान (प्रतिक्रिया) | चेतावनी, निकासी, खोज और बचाव, प्राथमिक उपचार, राहत-शिविर |
| आपदा के बाद (पुनर्वास) | राहत, पुनर्निर्माण, मनोवैज्ञानिक सहायता, सीख |
भारत में संस्थाएँ और क़ानून
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act): भारत का मुख्य क़ानून।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA): शीर्ष संस्था; अध्यक्ष प्रधानमंत्री।
- राज्य (SDMA) और ज़िला (DDMA) स्तर पर भी प्राधिकरण।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF): विशेषज्ञ बचाव दल; राज्य बल: SDRF।
- भारत ने सेंडाई फ्रेमवर्क (2015–2030) को अपनाया है।
- आपदा-किट में पानी, सूखा खाना, प्राथमिक चिकित्सा, टॉर्च, रेडियो, ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ।
- आपातकालीन नंबर: 112 (एकीकृत आपातकालीन), 108 (एम्बुलेंस), 101 (अग्निशमन), 100 (पुलिस)।
विद्यालय की भूमिका
- विद्यालय आपदा प्रबंधन योजना; मॉक-ड्रिल (भूकंप, आग) का नियमित अभ्यास।
- बच्चों को प्राथमिक उपचार, आपातकालीन नंबर और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण।
- विद्यालय भवन की सुरक्षा-जाँच, निकास-द्वार खुले रखना।
- आपदा के बाद बच्चों के भय और तनाव को समझकर उन्हें भावनात्मक सहारा देना।
5 ऊर्जा: रूप और स्रोत; परंपरागत एवं वैकल्पिक स्रोत (Sources of Energy)
हमारे घर की रोशनी, गाड़ियाँ और कारखाने सब ऊर्जा पर चलते हैं। ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत सीमित हैं और प्रदूषण भी फैलाते हैं, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ना आज की आवश्यकता है। यहाँ पहले ऊर्जा के रूप और फिर स्रोतों का वर्गीकरण दिया गया है।
- ऊर्जा: कार्य करने की क्षमता। SI मात्रक जूल (J)।
- रूप: यांत्रिक (गतिज, स्थितिज), ऊष्मीय, प्रकाश, ध्वनि, विद्युत, रासायनिक, नाभिकीय।
- गतिज ऊर्जा = ½ mv²; स्थितिज ऊर्जा = mgh।
- ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा न उत्पन्न होती है, न नष्ट; केवल एक रूप से दूसरे में बदलती है।
| वर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| नवीकरणीय | प्रकृति में पुनः-पूर्ति होती रहती है | सौर, पवन, जल, ज्वारीय, भूतापीय, बायोमास, हरित हाइड्रोजन |
| अनवीकरणीय | सीमित भंडार, बनने में लाखों वर्ष | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम |
- परंपरागत (पारंपरिक) स्रोत: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलाऊ लकड़ी, बड़े जल-विद्युत।
- जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) जलने पर CO₂ और अन्य प्रदूषक देते हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है।
- एक अच्छे ईंधन में: उच्च ऊष्मा-मान, सस्ता, आसानी से उपलब्ध, कम धुआँ और प्रदूषण, सुरक्षित भंडारण।
- ऊष्मीय मान (Calorific value): 1 kg ईंधन के पूर्ण दहन से निकली ऊष्मा (kJ/kg)। हाइड्रोजन का ऊष्मीय मान सबसे अधिक।
- LPG: प्रोपेन-ब्यूटेन का मिश्रण; CNG: मुख्यतः मीथेन।
भारत की ऊर्जा-नीति के प्रमुख बिंदु
- 2021 (COP26) में भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा-क्षमता और 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य घोषित किया।
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत और फ़्रांस की पहल (2015), मुख्यालय गुरुग्राम।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023)।
6 सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा (Solar and Wind Energy)
सूर्य हमारे लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा और स्वच्छ स्रोत है, और हवा भी लगातार चलती रहती है। भारत में सौर और पवन ऊर्जा तेज़ी से बढ़ रही है। यहाँ इनके काम करने के ढंग, उपयोग और सीमाएँ दी गई हैं।
सौर ऊर्जा
- सौर स्थिरांक लगभग 1.37–1.4 kW/m² (वायुमंडल के बाहर)।
- सौर सेल (फोटोवोल्टेइक): सिलिकॉन के अर्धचालक; प्रकाश को सीधे विद्युत में बदलते हैं। कई सेल = सौर पैनल।
- सौर कुकर: अवतल परावर्तक/दर्पण और काले बर्तन, काँच के ढक्कन से ऊष्मा रोककर खाना पकाता है।
- सौर जल-तापक (Solar water heater), सौर लालटेन, सौर पंप, सौर स्ट्रीट-लाइट।
- सीमाएँ: रात और बादल में कम; प्रारंभिक लागत अधिक; अधिक जगह; भंडारण (बैटरी) की ज़रूरत।
- लाभ: स्वच्छ, मुफ्त ईंधन, लगातार, दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोगी।
- राष्ट्रीय सौर मिशन (2010); PM-KUSUM (2019) किसानों के सौर पंपों के लिए।
- PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना (2024): घरों की छत पर सौर पैनल।
- भारत का प्रसिद्ध भादला सौर पार्क (राजस्थान) विश्व के बड़े सौर पार्कों में है।
- गुजरात का मोढेरा भारत का पहला सौर-ऊर्जा संचालित गाँव घोषित (2022)।
पवन ऊर्जा
- चलती हवा की गतिज ऊर्जा से टरबाइन घुमाकर विद्युत बनाई जाती है।
- पवन-चक्की में ब्लेड, रोटर और जनित्र। कई टरबाइनों का समूह पवन-फार्म (विंड फार्म)।
- भारत में पवन ऊर्जा में तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान अग्रणी हैं। मुप्पंडल (तमिलनाडु) प्रसिद्ध है।
- सीमाएँ: हवा की गति (न्यूनतम लगभग 15–20 km/h) की आवश्यकता; सीमित क्षेत्र; शोर; पक्षियों पर प्रभाव।
- लाभ: स्वच्छ, नवीकरणीय, कोई ईंधन-लागत नहीं।
7 जल-विद्युत, बायोगैस, बायोमास, ज्वारीय, भूतापीय और नाभिकीय ऊर्जा
सौर और पवन के अलावा भी कई स्रोत ऊर्जा देते हैं। कोई बहते जल से बिजली बनाता है, कोई गोबर और कचरे से गैस, तो कोई धरती की गर्मी या परमाणु से। हर स्रोत की अपनी खूबियाँ और सीमाएँ हैं।
| स्रोत | सिद्धांत | उदाहरण / विशेष |
|---|---|---|
| जल-विद्युत | ऊँचाई से गिरते जल की स्थितिज → गतिज → विद्युत ऊर्जा | भाखड़ा, टिहरी, सरदार सरोवर; झारखंड में सुवर्णरेखा परियोजना |
| ज्वारीय ऊर्जा | समुद्र के ज्वार-भाटे से | कच्छ और खंभात की खाड़ी संभावित क्षेत्र |
| तरंग ऊर्जा | समुद्री लहरों की गति से | तटीय क्षेत्र |
| भूतापीय ऊर्जा | पृथ्वी के भीतर की गर्मी से | लद्दाख (पुगा), हिमाचल (मणिकरण), झारखंड की गर्म झरनें (संभावित) |
| बायोमास / बायोगैस | जैविक कचरे से | गोबर गैस, कृषि अवशेष, लकड़ी |
| नाभिकीय ऊर्जा | यूरेनियम का विखंडन | तारापुर, कैगा, कलपक्कम, कुडनकुलम |
बायोगैस
- गोबर, फसल-अवशेष और रसोई के जैविक कचरे को अवायवीय (बिना ऑक्सीजन) स्थिति में सड़ाकर बनी गैस।
- संघटन: मुख्यतः मीथेन (लगभग 55–70%), साथ में CO₂ आदि।
- बचा हुआ अवशेष (स्लरी) उत्तम जैविक खाद।
- ग्रामीण भारत में खाना पकाने और रोशनी में उपयोग; धुएँ रहित, प्रदूषणरहित।
- गोबरधन योजना (2018) जैविक कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए।
नाभिकीय ऊर्जा
- नाभिकीय विखंडन: भारी नाभिक का टूटकर हल्के नाभिकों में बदलना और भारी ऊर्जा निकलना (परमाणु-रिएक्टर)।
- नाभिकीय संलयन: हल्के नाभिकों का जुड़ना (सूर्य की ऊर्जा का स्रोत)।
- सूत्र: E = mc² (आइंस्टाइन)।
- लाभ: बहुत अधिक ऊर्जा, कम CO₂। हानि: रेडियोधर्मी अपशिष्ट, दुर्घटना का ख़तरा (चेर्नोबिल 1986, फुकुशिमा 2011)।
- भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा हैं।
ऊर्जा संरक्षण
- बिजली और ईंधन की बचत, LED और स्टार-रेटिंग वाले उपकरण।
- सार्वजनिक परिवहन, पैदल/साइकिल का उपयोग, कारपूल।
- घरों में प्राकृतिक रोशनी और हवा का उपयोग।
- 3R सिद्धांत: Reduce, Reuse, Recycle।
8 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: आपदा एवं ऊर्जा का शिक्षण
आपदा और ऊर्जा, दोनों विषय बच्चों को न केवल जानकारी देते हैं बल्कि उन्हें ज़िम्मेदार नागरिक भी बनाते हैं। NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण-चेतना, स्थानीय संदर्भ और व्यावहारिक अनुभव पर बल देते हैं। इस दृष्टि से इन विषयों के शिक्षण के सुझाव यहाँ दिए गए हैं।
- मॉक-ड्रिल: भूकंप और आग की स्थिति में बाहर निकलने का अभ्यास।
- स्थानीय आपदा-मानचित्र: गाँव/शहर में बाढ़, सूखा, बिजली से प्रभावित स्थानों को चिह्नित करना।
- ऊर्जा ऑडिट: विद्यालय/घर में बिजली की खपत का आकलन और बचत के उपाय।
- परियोजना: सोलर कुकर, पवन-चक्की का मॉडल, बायोगैस के चार्ट।
- समुदाय से जुड़ाव: अभिभावकों और स्थानीय विशेषज्ञों (पंचायत, आपदा मित्र) से संवाद।
- जलवायु-चेतना: पेड़ लगाना, ऊर्जा बचत की शपथ, "मिशन LiFE" (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) जैसी पहल पर चर्चा।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 और NCF-SE पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, जीवन-कौशल और स्थानीय ज्ञान को पाठ्यचर्या का अंग मानते हैं। आपदा-सुरक्षा और ऊर्जा-संरक्षण केवल पढ़ाए नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारे जाएँ।
9 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
10 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. भूकंप का वह बिंदु जहाँ सतह पर सबसे अधिक क्षति होती है, क्या कहलाता है?
Q2. भूकंप की तीव्रता मापने का यंत्र क्या है?
Q3. कौन-सी भूकंपीय तरंग केवल ठोस माध्यम में चलती है?
Q4. भारत में सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र कौन-सा है?
Q5. भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ है?
Q6. सुनामी शब्द किस भाषा का है?
Q7. भूकंप आने पर घर में सबसे सुरक्षित कदम क्या है?
Q8. आपदा प्रबंधन अधिनियम भारत में कब पारित हुआ?
Q9. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अध्यक्ष कौन होते हैं?
Q10. भारत का एकीकृत आपातकालीन नंबर कौन-सा है?
Q11. निम्न में से कौन-सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है?
Q12. बायोगैस में मुख्य घटक क्या है?
Q13. सौर सेल किस ऊर्जा को सीधे विद्युत में बदलता है?
Q14. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय कहाँ है?
Q15. नाभिकीय विखंडन में क्या होता है?
Q16. सूर्य की ऊर्जा का स्रोत क्या है?
Q17. E = mc² का संबंध किससे है?
Q18. गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
Q19. भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक कौन माने जाते हैं?
Q20. भारत ने 2070 तक कौन-सा लक्ष्य रखा है?
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