प्रकाश, ऊष्मा एवं ताप
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1 प्रकाश: स्रोत, संचरण और छाया (Light)
हम किसी वस्तु को तभी देख पाते हैं जब उससे प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचे। प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जो देखने की संवेदना उत्पन्न करता है। इस भाग में प्रकाश के स्रोत, उसके चलने के ढंग और छाया बनने की प्रक्रिया की जानकारी है।
- दीप्त (प्रदीप्त) वस्तुएँ: स्वयं प्रकाश उत्पन्न करती हैं। जैसे सूर्य, तारे, बल्ब, मोमबत्ती, जुगनू।
- अदीप्त वस्तुएँ: स्वयं प्रकाश नहीं देतीं, दूसरे के प्रकाश के परावर्तन से दिखती हैं। जैसे चंद्रमा, पुस्तक, मेज़।
- प्रकाश सीधी रेखा में चलता है (ऋजुरेखीय संचरण)। इसी कारण छाया बनती है और छेद से देखने पर ही दिखाई देता है।
- प्रकाश की चाल निर्वात में लगभग 3 × 10⁸ m/s (3 लाख km/s)। सूर्य से पृथ्वी तक आने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं; चंद्रमा से लगभग 1.3 सेकंड।
- प्रकाश को चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं; यह निर्वात में भी चलता है।
- प्रकाश-वर्ष: प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी (लगभग 9.46 × 10¹² km)। यह दूरी का मात्रक है, समय का नहीं।
| पदार्थ | गुण | उदाहरण |
|---|---|---|
| पारदर्शी | प्रकाश को लगभग पूरा पार होने देते हैं | काँच, साफ़ जल, हवा |
| पारभासी | कुछ प्रकाश पार होने देते हैं | घिसा काँच, तेल-लगा कागज़ |
| अपारदर्शी | प्रकाश को पार नहीं होने देते | लकड़ी, धातु, दीवार |
छाया और ग्रहण
- अपारदर्शी वस्तु के पीछे बनने वाला अँधेरा क्षेत्र छाया (Shadow) है। इसका आकार वस्तु और स्रोत की दूरी पर निर्भर।
- प्रछाया (Umbra) पूरी अँधेरी और उपच्छाया (Penumbra) आंशिक अँधेरी।
- सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है, अमावस्या को।
- चंद्र ग्रहण: पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, पूर्णिमा को।
- पिन-होल कैमरा प्रकाश के सीधी रेखा में चलने पर आधारित है; उसमें उलटा और वास्तविक प्रतिबिंब बनता है।
2 प्रकाश का परावर्तन और दर्पण (Reflection and Mirrors)
आईने में अपना चेहरा देखना, पानी में पेड़ का उलटा प्रतिबिंब दिखना या गाड़ी का साइड-मिरर, ये सब परावर्तन के उदाहरण हैं। परावर्तन के नियम सरल हैं और दर्पणों के उपयोग को समझने की नींव हैं।
परिभाषा
परावर्तन (Reflection) = प्रकाश का किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाना।
- आपतित किरण (आने वाली), परावर्तित किरण (लौटने वाली), अभिलंब (सतह पर लंबवत रेखा)।
- पहला नियम: आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r)।
- दूसरा नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- नियमित परावर्तन: चिकनी सतह से (दर्पण)। अनियमित / विसरित परावर्तन: खुरदरी सतह से; इसी से हम सभी वस्तुओं को देख पाते हैं।
समतल दर्पण में प्रतिबिंब
- प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का होता है।
- प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी वस्तु आगे है।
- पार्श्व उलटाव (Lateral inversion): दाएँ-बाएँ अदला-बदली; इसीलिए एम्बुलेंस के आगे "AMBULANCE" उलटा लिखा जाता है।
- दो दर्पणों के बीच कोण θ हो तो प्रतिबिंबों की संख्या (360/θ) − 1। कैलाइडोस्कोप में 60° के तीन दर्पण।
| दर्पण | आकार | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| अवतल दर्पण | भीतर की ओर धँसा | टॉर्च, हेडलाइट (परावर्तक), शेविंग दर्पण, दंत-चिकित्सक, सोलर कुकर |
| उत्तल दर्पण | बाहर की ओर उभरा | वाहन का साइड-मिरर, सड़क के मोड़ों पर, सुरक्षा दर्पण |
- उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है और देखने का क्षेत्र बड़ा होता है।
- अवतल दर्पण वस्तु की दूरी के अनुसार वास्तविक या आभासी प्रतिबिंब बनाता है; पास रखने पर बड़ा, सीधा और आभासी।
- फोकस (F) और वक्रता केंद्र (C): f = R/2 (फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या का आधा)।
- दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f; आवर्धन m = −v/u।
3 प्रकाश का अपवर्तन, लेंस और प्रिज़्म (Refraction, Lenses and Prism)
सीधी छड़ी पानी में डालने पर टेढ़ी क्यों दिखती है? क्योंकि प्रकाश माध्यम बदलने पर अपना रास्ता मोड़ लेता है। इसी अपवर्तन से लेंस, चश्मे, कैमरे और सूक्ष्मदर्शी काम करते हैं।
परिभाषा
अपवर्तन (Refraction) = प्रकाश का एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाते समय अपने पथ से मुड़ जाना। कारण: दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग-अलग होना।
- विरल से सघन माध्यम में प्रकाश अभिलंब की ओर मुड़ता है; सघन से विरल में अभिलंब से दूर।
- अपवर्तनांक n = c/v (निर्वात में चाल ÷ माध्यम में चाल)। जल का लगभग 1.33, काँच का लगभग 1.5, हीरे का लगभग 2.4।
- स्नेल का नियम: sin i / sin r = नियतांक।
- दैनिक उदाहरण: तालाब उथला दिखना, पानी में रखा सिक्का ऊपर उठा दिखना, तारों का टिमटिमाना, मरीचिका।
लेंस
| आधार | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|
| आकृति | बीच में मोटा | बीच में पतला |
| किरणें | अभिसारी (मिलाता है) | अपसारी (फैलाता है) |
| उपयोग | दूर-दृष्टि के चश्मे, आवर्धक काँच, कैमरा, सूक्ष्मदर्शी | निकट-दृष्टि के चश्मे, पीप-होल |
| प्रतिबिंब | वास्तविक या आभासी | सदैव आभासी, सीधा, छोटा |
- लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f। क्षमता P = 1/f (मीटर में); मात्रक डायोप्टर (D)। उत्तल की क्षमता धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक।
- आवर्धक काँच में उत्तल लेंस का उपयोग (वस्तु फोकस के भीतर रखने पर बड़ा, सीधा, आभासी प्रतिबिंब)।
प्रिज़्म और वर्ण-विक्षेपण
- प्रिज़्म से गुज़रने पर श्वेत प्रकाश सात रंगों में बँट जाता है। इसे वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) कहते हैं (न्यूटन)।
- रंग क्रम: बैंगनी, जामुनी (नील), नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (VIBGYOR)।
- लाल का विचलन सबसे कम, बैंगनी का सबसे अधिक; लाल की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक।
- इंद्रधनुष: वर्षा की बूँदों में अपवर्तन, आंतरिक परावर्तन और विक्षेपण से; सूर्य की विपरीत दिशा में दिखता है।
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन: सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर प्रकाश पूरा लौट आता है। हीरे की चमक, प्रकाशीय तंतु (Optical Fibre), मरीचिका इसी से।
4 मानव आँख, दृष्टि दोष और रंग (Human Eye and Colours)
आँख प्रकृति का अद्भुत कैमरा है। इसमें लेंस, पर्दा और प्रकाश-संवेदी परत सब मौजूद हैं। आँख की संरचना और उसके दोष समझना दृष्टि-देखभाल के साथ-साथ लेंस के उपयोग को भी स्पष्ट करता है।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| कॉर्निया | पारदर्शी बाहरी परत; अधिकांश अपवर्तन यहीं |
| आइरिस (उपतारा) | पुतली का आकार नियंत्रित; आँख का रंग देता है |
| पुतली (Pupil) | प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करने वाला छिद्र |
| नेत्र लेंस | उत्तल लेंस; फोकस दूरी समायोजित |
| सिलियरी पेशियाँ | लेंस की मोटाई बदलती हैं (समंजन) |
| रेटिना (दृष्टिपटल) | प्रतिबिंब बनता है; शलाकाएँ और शंकु कोशिकाएँ |
| दृक् तंत्रिका | संकेत मस्तिष्क तक पहुँचाती है |
- शलाका (Rods): मंद प्रकाश में देखने के लिए; शंकु (Cones): तेज़ प्रकाश और रंग-दृष्टि के लिए।
- समंजन (Accommodation): आँख की फोकस दूरी बदलकर दूर और पास की वस्तुओं को देखने की क्षमता।
- स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी स्वस्थ आँख के लिए लगभग 25 सेमी।
- रेटिना पर प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनता है; मस्तिष्क उसे सीधा समझता है।
- दृष्टि-स्थायित्व: प्रतिबिंब लगभग 1/16 सेकंड तक रेटिना पर बना रहता है, इसी पर सिनेमा आधारित है।
दृष्टि-दोष और उपचार
| दोष | समस्या | कारण | उपचार |
|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि (मायोपिया) | दूर की वस्तु धुँधली | प्रतिबिंब रेटिना के आगे | अवतल लेंस |
| दूर-दृष्टि (हाइपरमेट्रोपिया) | पास की वस्तु धुँधली | प्रतिबिंब रेटिना के पीछे | उत्तल लेंस |
| जरा-दृष्टि (प्रेस्बायोपिया) | आयु बढ़ने पर पास देखने में कठिनाई | समंजन क्षमता घटना | द्विफोकसी लेंस |
| दृष्टिवैषम्य (अस्टिग्मैटिज़्म) | धुँधला/विकृत | कॉर्निया की असमान वक्रता | बेलनाकार लेंस |
- मोतियाबिंद: नेत्र लेंस का धुँधला होना; शल्य-चिकित्सा से लेंस बदला जाता है।
- वर्णांधता: कुछ रंग पहचानने में असमर्थता (प्रायः लाल-हरा)।
- विटामिन A की कमी से रतौंधी।
- नेत्रदान: मृत्यु के बाद कॉर्निया दान से दृष्टिहीन को रोशनी मिल सकती है।
रंग
- प्राथमिक रंग (प्रकाश): लाल, हरा, नीला (RGB)। इनके मिश्रण से श्वेत प्रकाश।
- प्राथमिक रंग (रंगद्रव्य): लाल, पीला, नीला (या सियान, मैजेंटा, पीला)।
- वस्तु का रंग वही है जो वह परावर्तित करती है; शेष रंग अवशोषित।
5 ऊष्मा और ताप: अर्थ, मापन और थर्मामीटर (Heat and Temperature)
गर्म चाय और ठंडा पानी, दोनों में ऊष्मा है, पर कितनी गर्म या ठंडी है, यह ताप बताता है। ऊष्मा और ताप को अकसर एक समझ लिया जाता है, पर दोनों अलग हैं। इस भाग में उनका अंतर और ताप मापन के यंत्र समझाए गए हैं।
| आधार | ऊष्मा (Heat) | ताप (Temperature) |
|---|---|---|
| अर्थ | ऊर्जा का वह रूप जो गर्म से ठंडे पिंड को जाता है | पिंड की गर्माहट/ठंडक का स्तर (माप) |
| SI मात्रक | जूल (J); अन्य: कैलोरी (1 cal = 4.18 J) | केल्विन (K); सामान्यतः °C |
| मापन यंत्र | कैलोरीमीटर | थर्मामीटर |
| निर्भरता | द्रव्यमान, ताप, पदार्थ | केवल औसत गतिज ऊर्जा |
ताप के पैमाने
| पैमाना | हिमांक | क्वथनांक |
|---|---|---|
| सेल्सियस (°C) | 0 | 100 |
| फ़ारेनहाइट (°F) | 32 | 212 |
| केल्विन (K) | 273 | 373 |
- रूपांतरण: F = (9/5)C + 32; K = C + 273।
- परम शून्य: 0 K = −273.15 °C।
- सेल्सियस और फ़ारेनहाइट बराबर होने पर ताप −40°।
- मानव शरीर का सामान्य ताप 37 °C (98.6 °F)।
थर्मामीटर
- प्रयोगशाला थर्मामीटर: पारा या रंगीन अल्कोहल; −10 से 110 °C।
- डॉक्टरी (क्लिनिकल) थर्मामीटर: 35 से 42 °C तक; इसमें मोड़ (kink) होता है ताकि पारा स्वयं नीचे न उतरे; उपयोग के बाद झटका देना पड़ता है। आजकल डिजिटल/इन्फ्रारेड प्रचलित।
- पारे की खूबियाँ: चमकदार, समान प्रसार, ऊष्मा का सुचालक, उच्च क्वथनांक (357 °C)। पर यह विषैला है, इसलिए पारे वाले थर्मामीटर चरणबद्ध रूप से हटाए जा रहे हैं।
- थर्मामीटर को धोकर और बगल या मुँह में सही जगह लगाकर पढ़ें; पाठ्यांक पढ़ते समय आँख सीध में रखें।
विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता: 1 kg पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने में लगी ऊष्मा। जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक (लगभग 4200 J/kg·°C)।
- इसी कारण समुद्र तट का मौसम सम रहता है और जल का उपयोग शीतलक के रूप में होता है।
- गुप्त ऊष्मा: अवस्था-परिवर्तन के समय ताप बदले बिना ली/दी गई ऊष्मा। बर्फ़ की गलन की गुप्त ऊष्मा ≈ 334 kJ/kg; भाप की वाष्पन गुप्त ऊष्मा ≈ 2260 kJ/kg।
- भाप से जलन ज़्यादा होती है, क्योंकि इसमें गुप्त ऊष्मा अधिक होती है।
6 ऊष्मा का संचरण: चालन, संवहन और विकिरण (Transfer of Heat)
चूल्हे पर रखे बर्तन का हैंडल गर्म हो जाना, कमरे के ऊपर गर्म हवा का उठना और दूर सूर्य से धूप का आना, ये तीनों ऊष्मा के तीन अलग-अलग संचरण हैं। हर संचरण का माध्यम और ढंग अलग है, इसलिए इनका अंतर समझना ज़रूरी है।
| आधार | चालन (Conduction) | संवहन (Convection) | विकिरण (Radiation) |
|---|---|---|---|
| माध्यम | ठोस | द्रव और गैस | माध्यम नहीं चाहिए |
| कण | कण अपने स्थान पर कंपन करते हैं | कण स्वयं गति कर ऊष्मा ले जाते हैं | विद्युत-चुंबकीय तरंगें |
| उदाहरण | गर्म चम्मच, तवा | जल उबलना, हवा की धाराएँ | सूर्य की धूप, अंगीठी की गर्मी |
| गति | धीमी | मध्यम | प्रकाश की चाल |
- सुचालक: चाँदी, ताँबा, ऐलुमिनियम, लोहा। कुचालक: लकड़ी, प्लास्टिक, काँच, हवा, ऊन, थर्मोकोल।
- हवा ऊष्मा की कुचालक है; ऊनी कपड़ों, रज़ाई और दोहरी दीवार में फँसी हवा ऊष्मा को रोकती है।
- बर्तनों का तल ताँबे/ऐलुमिनियम का और हैंडल प्लास्टिक/लकड़ी का इसी कारण।
- सर्दी में धातु ठंडी लगती है, क्योंकि वह हमारे शरीर की ऊष्मा तेज़ी से खींचती है।
संवहन के उदाहरण
- स्थल समीर (रात को) और सागर समीर (दिन को) की उत्पत्ति।
- रोशनदान ऊँचाई पर लगाने से गर्म हवा बाहर निकलती है।
- हीटर नीचे और एसी ऊपर लगाना।
- मानसून पवनें, चक्रवात, समुद्री धाराएँ।
विकिरण के नियम
- काली और खुरदरी सतह ऊष्मा का अच्छा अवशोषक और उत्सर्जक; चमकीली और सफ़ेद सतह अच्छी परावर्तक।
- गर्मी में सफ़ेद/हल्के रंग और सर्दी में गहरे रंग के कपड़े पहने जाते हैं।
- थर्मस फ़्लास्क तीनों संचरणों को रोकता है: दोहरी काँच की दीवार (बीच में निर्वात), चाँदी की परत (विकिरण), कॉर्क की डाट (चालन-संवहन)।
- ग्रीनहाउस में भी विकिरण का उपयोग होता है (ताप को भीतर रोकना)।
7 ऊष्मीय प्रसार और अवस्था-परिवर्तन (Thermal Expansion and Change of State)
गर्मी में रेल की पटरियाँ फैल जाती हैं और बर्फ़ गर्म होकर पानी बन जाती है। ये दोनों घटनाएँ ऊष्मा के प्रभाव हैं। इस भाग में पदार्थों के फैलने-सिकुड़ने और उनके अवस्था बदलने की जानकारी दी गई है।
- गर्म करने पर अधिकांश पदार्थ फैलते और ठंडा करने पर सिकुड़ते हैं।
- ठोसों में प्रसार: रेल की पटरियों में, पुलों में, बिजली के तारों में खाली जगह (expansion joint) छोड़ी जाती है।
- द्रवों में प्रसार: थर्मामीटर इसी पर आधारित।
- गैसों में प्रसार सबसे अधिक होता है।
- द्विधात्विक पट्टी (Bimetallic strip) दो भिन्न धातुओं की; गर्म करने पर मुड़ती है। प्रेस, फ़्रिज थर्मोस्टेट में उपयोग।
जल का असंगत प्रसार
- जल 0 °C से 4 °C तक गर्म करने पर सिकुड़ता है और 4 °C पर घनत्व अधिकतम (1000 kg/m³) होता है।
- इसी कारण ठंड में झील की ऊपरी सतह पर बर्फ़ जमती है, नीचे जल (4 °C) बना रहता है और जलचर जीवित रहते हैं।
- जमने पर पानी का आयतन बढ़ता है, इसीलिए ठंड में नल की पाइप फट जाती है।
अवस्था-परिवर्तन
| प्रक्रिया | परिवर्तन |
|---|---|
| गलन | ठोस → द्रव |
| क्वथन / वाष्पन | द्रव → गैस |
| संघनन | गैस → द्रव |
| हिमीकरण | द्रव → ठोस |
| ऊर्ध्वपातन | ठोस → गैस (सीधे); कपूर, नैफ़थलीन, शुष्क बर्फ़ (CO₂) |
- वाष्पन (Evaporation) हर ताप पर, केवल सतह पर होता है और शीतलन करता है (पसीना, घड़े का जल)।
- क्वथन (Boiling) निश्चित ताप पर, पूरे द्रव में।
- वाष्पन की दर बढ़ती है: ताप बढ़ने, क्षेत्रफल बढ़ने, हवा तेज़ होने और आर्द्रता कम होने पर।
- ऊँचाई पर क्वथनांक घटता है (दाब कम)। प्रेशर कुकर में दाब बढ़ने से क्वथनांक बढ़ता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
- साधारण नमक मिलाने से जल का क्वथनांक बढ़ता और हिमांक घटता है।
- बर्फ़ पर नमक डालना हिमांक घटाकर बर्फ़ पिघलाता है।
8 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: प्रकाश और ऊष्मा का शिक्षण
प्रकाश और ऊष्मा के शिक्षण में बच्चों के आस-पास की चीज़ें ही सबसे अच्छी प्रयोगशाला हैं। धूप, छाया, दर्पण और चाय के कप से ही कई अवधारणाएँ खोजी जा सकती हैं। नीचे ऐसी गतिविधियाँ और सावधानियाँ दी गई हैं।
- छाया-खेल: दिन भर छाया की लंबाई और दिशा का अवलोकन; धूप-घड़ी बनाना।
- पिन-होल कैमरा बनाकर उलटा प्रतिबिंब देखना।
- कैलाइडोस्कोप / पेरिस्कोप बनाना।
- आवर्धक काँच से वस्तुएँ देखना (सूर्य को सीधे या आवर्धक से न देखें)।
- ऊष्मा-प्रयोग: अलग-अलग पदार्थों की चम्मचें गर्म जल में डालकर चालन की तुलना; काले-सफ़ेद कपड़े की धूप में तुलना।
- सौर कुकर / सोलर पानी-हीटर की मॉडल-परियोजना।
- सुरक्षा: गर्म पदार्थ, काँच और पारे के थर्मामीटर के प्रयोग में पर्याप्त सावधानी; सूर्य-ग्रहण को नंगी आँख से न देखना।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 और NCF-SE अनुभव-आधारित और खोज-आधारित शिक्षण पर बल देते हैं। बच्चों को स्वयं अनुमान लगाने, प्रयोग करने और निष्कर्ष निकालने के अवसर मिलें।
9 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
10 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. प्रकाश की निर्वात में चाल लगभग कितनी है?
Q2. सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग कितना समय लेता है?
Q3. प्रकाश-वर्ष किसका मात्रक है?
Q4. सूर्य ग्रहण कब होता है?
Q5. परावर्तन के नियम के अनुसार सही संबंध क्या है?
Q6. वाहन के पीछे देखने वाले साइड-मिरर में कौन-सा दर्पण होता है?
Q7. समतल दर्पण में बना प्रतिबिंब कैसा होता है?
Q8. दर्पण की फोकस दूरी f और वक्रता त्रिज्या R में क्या संबंध है?
Q9. जल में रखी छड़ी टेढ़ी दिखने का कारण क्या है?
Q10. दूर-दृष्टि दोष के निवारण के लिए कौन-सा लेंस प्रयुक्त होता है?
Q11. निकट-दृष्टि दोष में कौन-सा लेंस प्रयुक्त होता है?
Q12. लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है?
Q13. प्रिज़्म द्वारा श्वेत प्रकाश के सात रंगों में बँटने को क्या कहते हैं?
Q14. आँख में प्रतिबिंब कहाँ बनता है?
Q15. मंद प्रकाश में देखने के लिए कौन-सी कोशिकाएँ उत्तरदायी हैं?
Q16. मानव शरीर का सामान्य ताप फ़ारेनहाइट में कितना है?
Q17. ताप का SI मात्रक क्या है?
Q18. ऊष्मा का संचरण निर्वात में किस विधि से होता है?
Q19. द्रवों और गैसों में ऊष्मा का संचरण मुख्यतः किस विधि से होता है?
Q20. जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है?
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