जैव विविधता संरक्षण एवं जीवों में श्वसन, पाचन व उत्सर्जन
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1 जैव विविधता: अर्थ, स्तर और भारत (Biodiversity)
पृथ्वी पर पौधों, जन्तुओं और सूक्ष्मजीवों की अनगिनत प्रजातियाँ हैं, और हर प्रजाति किसी न किसी रूप में दूसरी से जुड़ी हुई है। जीवन की इस विविधता को जैव विविधता कहते हैं। यह प्रकृति की सबसे बड़ी पूँजी है, और उसे समझना संरक्षण की पहली सीढ़ी है।
परिभाषा
जैव विविधता (Biodiversity) = किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी जीवों (पौधे, जन्तु, सूक्ष्मजीव) की विविधता, उनके आनुवंशिक पदार्थ और वे जिन पारितंत्रों में रहते हैं, उन सबका योग।
| स्तर | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | एक ही प्रजाति के जीवों के जीनों में अंतर | चावल की हज़ारों किस्में; आम की विभिन्न किस्में |
| प्रजाति विविधता | किसी क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या | वन में पेड़, पशु, पक्षी, कीट |
| पारितंत्र विविधता | विविध पारितंत्र | वन, मरुस्थल, आर्द्रभूमि, मूँगा-चट्टान |
- "जैव विविधता" शब्द वॉल्टर रोज़ेन (1985) द्वारा प्रयुक्त और बाद में लोकप्रिय माना जाता है।
- विषुवतीय (भूमध्यरेखीय) क्षेत्रों में जैव विविधता सबसे अधिक होती है; ध्रुवों की ओर घटती जाती है।
- अति-विविध देश (Megadiverse): भारत विश्व के 17 अति-जैव-विविध देशों में है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: वे क्षेत्र जहाँ बहुत अधिक स्थानिक प्रजातियाँ हैं और जो गंभीर खतरे में हैं (अवधारणा नॉर्मन मायर्स, 1988)। भारत में चार हॉटस्पॉट हैं: हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा और सुंदालैंड (निकोबार द्वीप समूह)।
- स्थानिक (Endemic) प्रजाति: जो केवल किसी एक विशेष क्षेत्र में पाई जाती है।
याद रखें
झारखंड में साल (Sal) राज्य का वृक्ष, हाथी राज्य-पशु, कोयल राज्य-पक्षी और पलाश राज्य-पुष्प है।
2 जैव विविधता का महत्व और उसे खतरे (Importance and Threats)
जैव विविधता हमें भोजन, औषधि, शुद्ध वायु, जल और जलवायु का संतुलन देती है। जब कोई प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो पूरी खाद्य-शृंखला और पारितंत्र पर असर पड़ता है। इस भाग में इसके महत्व, खतरों और जीवों की संकटग्रस्त श्रेणियों को समझें।
जैव विविधता का महत्व
- भोजन, औषधि, लकड़ी, रेशे और अनेक प्राकृतिक उत्पाद।
- पारितंत्र सेवाएँ: परागण, जल-शुद्धिकरण, मिट्टी की उर्वरता, जलवायु-नियमन।
- पर्यावरण-संतुलन, सांस्कृतिक, सौंदर्य और पर्यटन-संबंधी मूल्य।
प्रमुख खतरे
| खतरा | उदाहरण |
|---|---|
| आवास का नाश और विखंडन | वनों की कटाई, शहरीकरण, खनन, बाँध |
| अति-दोहन और अवैध शिकार | हाथीदाँत, खाल, पैंगोलिन की तस्करी |
| प्रदूषण | जल/वायु/मृदा प्रदूषण; कीटनाशक |
| आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ | जलकुंभी, गाजर-घास (पार्थेनियम), लैंटाना |
| जलवायु परिवर्तन | तापमान-वृद्धि, प्रवाल-विरंजन |
| जनसंख्या-दबाव | संसाधनों का अधिक उपयोग |
संकटग्रस्त श्रेणियाँ (IUCN रेड लिस्ट)
| श्रेणी | अर्थ |
|---|---|
| विलुप्त (Extinct) | जीवित सदस्य नहीं बचा |
| गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered) | अत्यंत अधिक खतरा |
| संकटग्रस्त (Endangered) | बहुत खतरा |
| सुभेद्य / असुरक्षित (Vulnerable) | आगे संकट की संभावना |
| निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) | जल्द संकट में जा सकते हैं |
| सबसे कम चिंताजनक (Least Concern) | स्थिति ठीक |
- IUCN (International Union for Conservation of Nature) की रेड डेटा बुक संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची रखती है।
- उदाहरण: डोडो (विलुप्त); बाघ, एशियाई शेर, गंगा डॉल्फ़िन, गिद्ध की कुछ प्रजातियाँ संकटग्रस्त।
- चीता को भारत में 1952 में विलुप्त घोषित किया गया; 2022 में नामीबिया से चीते लाकर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बसाने की परियोजना शुरू हुई।
3 जैव विविधता का संरक्षण: स्वस्थाने और बाह्यस्थाने (Conservation)
संरक्षण का मतलब केवल जानवरों को बंद करके रखना नहीं है, बल्कि पूरे पारितंत्र को सुरक्षित रखना है। संरक्षण के दो बड़े तरीके हैं: प्राकृतिक आवास में ही और आवास से बाहर। दोनों की अपनी भूमिका है, और विज्ञान-शिक्षण में इनका अंतर बार-बार पूछा जाता है।
| आधार | स्वस्थाने (In situ) | बाह्यस्थाने (Ex situ) |
|---|---|---|
| अर्थ | प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षा | आवास से बाहर सुरक्षित स्थान में |
| उदाहरण | राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैव-मंडल आरक्षित, पवित्र उपवन | चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, जीन बैंक, ऊतक संवर्धन |
| लाभ | पूरा पारितंत्र बचता है | संकटग्रस्त प्रजाति को प्रजनन द्वारा बचाना |
- राष्ट्रीय उद्यान (National Park): अधिक संरक्षित; चरागाह, शिकार, खेती आदि पर पूर्ण रोक।
- वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary): पशुओं का संरक्षण; कुछ मानवीय गतिविधियों की सीमित अनुमति।
- जैव-मंडल आरक्षित (Biosphere Reserve): बड़े क्षेत्र जिनमें कोर, बफ़र और संक्रमण क्षेत्र। भारत का पहला नीलगिरि (1986) है।
- पवित्र उपवन (Sacred Groves): धार्मिक आस्था से संरक्षित वन। झारखंड में सरना स्थल और जाहेरथान पारंपरिक पवित्र उपवन हैं।
भारत के प्रमुख संरक्षण-कार्यक्रम और कानून
| पहल | वर्ष / विवरण |
|---|---|
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972; अनुसूचियों में प्रजातियाँ |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973; जिम कॉर्बेट से शुरू |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 |
| जैव विविधता अधिनियम | 2002; राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) |
| चिपको आंदोलन | 1973; पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकना (सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी आदि) |
| बिश्नोई आंदोलन | खेजड़ली, 1730; पेड़ों की रक्षा |
- पलामू टाइगर रिज़र्व (झारखंड) 1973 में बने नौ मूल टाइगर रिज़र्व में से एक है। झारखंड में बेतला राष्ट्रीय उद्यान, दलमा (हाथी), हजारीबाग, तोपचांची, पारसनाथ आदि संरक्षित क्षेत्र हैं।
- महत्वपूर्ण दिवस: विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च; पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल; अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई; विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून; वन्यजीव सप्ताह 1–7 अक्टूबर।
NEP-2020 से जुड़ाव
NEP-2020 जैव विविधता के संरक्षण, वन और वन्यजीव संरक्षण, सतत विकास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात करती है। स्थानीय पर्वों और परंपराओं (जैसे सरहुल) में निहित प्रकृति-संरक्षण का सम्मान बच्चों को सिखाया जा सकता है।
4 जीवों में पाचन (Digestion)
भोजन में जो बड़े अणु होते हैं, वे कोशिका में सीधे नहीं जा सकते। उन्हें छोटे अणुओं में तोड़ना पड़ता है। भोजन को सरल और घुलनशील पदार्थों में तोड़ने की यह पूरी प्रक्रिया पाचन कहलाती है। इसका क्रम और अंगों के कार्य को समझना जीव-विज्ञान में बुनियादी है।
- अंतर्ग्रहण (Ingestion): भोजन ग्रहण करना।
- पाचन (Digestion): भोजन का सरल अणुओं में टूटना।
- अवशोषण (Absorption): पचे भोजन का रक्त में पहुँचना।
- स्वांगीकरण (Assimilation): शरीर द्वारा उपयोग।
- बहिष्करण (Egestion): अपचित भाग का बाहर निकलना।
मनुष्य का पाचन तंत्र
| अंग | कार्य |
|---|---|
| मुख और दाँत | चबाना; वयस्क में 32 दाँत (8 कृंतक, 4 रदनक, 8 अग्र-चर्वणक, 12 चर्वणक); दूध के दाँत 20 |
| लार | लार में एमाइलेज़ (टायलिन) स्टार्च को माल्टोज़ में बदलता है |
| ग्रासनली (Oesophagus) | क्रमाकुंचन (Peristalsis) से भोजन आमाशय में |
| आमाशय (Stomach) | HCl, पेप्सिन; प्रोटीन का पाचन; श्लेष्मा आमाशय को बचाता है |
| यकृत और पित्त | पित्त रस वसा का इमल्सीकरण करता है; यकृत सबसे बड़ी ग्रंथि |
| अग्न्याशय | अग्न्याशयी रस: ट्रिप्सिन, एमाइलेज़, लाइपेज़ |
| छोटी आँत | सबसे अधिक पाचन और अवशोषण; लंबाई लगभग 6–7 मीटर; रसांकुर (Villi) |
| बड़ी आँत | जल का अवशोषण; मल का निर्माण |
| मलाशय व गुदा | मल का संग्रह और निष्कासन |
| पोषक तत्व | अंतिम उत्पाद |
|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | ग्लूकोज़ |
| प्रोटीन | अमीनो अम्ल |
| वसा | वसा अम्ल और ग्लिसरॉल |
- आमाशय का pH लगभग 1.5–2 है। पित्त रस में पाचक एंज़ाइम नहीं होते, पर यह वसा के पाचन में सहायक है।
- रसांकुर (Villi) आँत की भीतरी सतह पर उँगली जैसे उभार हैं जो अवशोषण-क्षेत्र बढ़ाते हैं।
अन्य जीवों में पाचन
- अमीबा: खाद्य रिक्तिका (Food Vacuole) में पाचन।
- जुगाली करने वाले (गाय, भैंस): आमाशय चार कक्षों का: रूमेन, रेटिकुलम, ओमेसम, एबोमेसम। भोजन को निगलकर फिर मुँह में लाकर चबाना (जुगाली)। रूमेन में जीवाणु सेलुलोज़ पचाते हैं।
- पक्षी: चोंच से भोजन निगलना; पेषणी (गिज़र्ड) में दाने पीसना।
5 श्वसन (Respiration)
हम हर पल साँस लेते हैं, पर साँस लेना श्वसन का केवल एक भाग है। असली श्वसन हमारी कोशिकाओं के भीतर होता है, जहाँ भोजन से ऊर्जा मुक्त की जाती है। इसलिए श्वसन को दो स्तरों पर समझना चाहिए: साँस लेना-छोड़ना और कोशिकीय श्वसन।
परिभाषा
श्वसन (Respiration) = वह जैव-रासायनिक क्रिया जिसमें कोशिकाओं में भोजन (ग्लूकोज़) के ऑक्सीकरण से ऊर्जा मुक्त होती है।
- वायवीय श्वसन (Aerobic): ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा (अधिक ऊर्जा; माइटोकॉन्ड्रिया में)।
- अवायवीय श्वसन (Anaerobic): ऑक्सीजन के बिना; कम ऊर्जा। यीस्ट में → एथेनॉल + CO₂ (किण्वन); मनुष्य की मांसपेशियों में (भारी व्यायाम) → लैक्टिक अम्ल (इससे थकान और दर्द)।
- श्वसन बनाम दहन: दोनों में ऊर्जा निकलती है, पर श्वसन नियंत्रित, धीमी और एंज़ाइम-आधारित है; दहन तेज़ और अनियंत्रित।
मनुष्य का श्वसन तंत्र
- नासिका (नाक) → ग्रसनी → कंठ (Larynx, स्वर-यंत्र) → श्वासनली (Trachea) → श्वसनी (Bronchi) → श्वसनिकाएँ → वायुकोष (Alveoli) (गैस-विनिमय का स्थान)।
- डायाफ्राम और पसलियों की गति से साँस ली जाती है। अंतःश्वसन: डायाफ्राम नीचे, पसलियाँ ऊपर-बाहर; छाती का आयतन बढ़ता है। उच्छ्वसन: डायाफ्राम ऊपर, पसलियाँ भीतर।
- वयस्क में औसतन 15–18 बार प्रति मिनट साँस ली जाती है।
- वायुकोष की पतली दीवार और रक्त-केशिकाओं के बीच ऑक्सीजन रक्त में और CO₂ बाहर निकलती है। रक्त का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ले जाता है।
- अंतःश्वसन की वायु में O₂ लगभग 21% और उच्छ्वसित वायु में लगभग 16%; CO₂ लगभग 0.04% से बढ़कर लगभग 4%।
- धूम्रपान फेफड़ों को हानि पहुँचाता है: कैंसर, ब्रोंकाइटिस, दमा।
अन्य जीवों में श्वसन
| जीव | श्वसन-अंग |
|---|---|
| अमीबा, हाइड्रा | सीधे शरीर की सतह से विसरण |
| केंचुआ | नम त्वचा |
| कीट (तिलचट्टा, टिड्डा) | श्वास-रंध्र (Spiracles) और श्वासनली नलिकाएँ |
| मछली | गिल (क्लोम) |
| मेंढक | त्वचा और फेफड़े (दोनों) |
| पक्षी, सरीसृप, स्तनधारी | फेफड़े |
| पौधे | पत्तियों के रंध्र, तने के वातरंध्र (Lenticels), जड़ों की सतह |
भ्रम से बचें
पौधे भी श्वसन करते हैं, दिन-रात। पौधों में श्वसन और प्रकाश-संश्लेषण दोनों चलते हैं, पर दिन में प्रकाश-संश्लेषण अधिक होने से बाहर O₂ निकलती दिखती है।
6 उत्सर्जन (Excretion)
शरीर में चलने वाली क्रियाओं से कुछ अनचाहे और हानिकारक पदार्थ बनते हैं, जैसे यूरिया, कार्बन डाइऑक्साइड और अतिरिक्त लवण। इन्हें शरीर से बाहर निकालना ज़रूरी है, वरना ये नुकसान करेंगे। यह काम उत्सर्जन तंत्र करता है, जिसमें वृक्क की भूमिका मुख्य है।
परिभाषा
उत्सर्जन (Excretion) = शरीर से उपापचयी अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया।
| अंग | उत्सर्जित पदार्थ |
|---|---|
| वृक्क (गुर्दे) | यूरिया, यूरिक अम्ल, अतिरिक्त जल और लवण (मूत्र) |
| फेफड़े | कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प |
| त्वचा | पसीना (जल, लवण, थोड़ा यूरिया) |
| यकृत | पित्त वर्णक; अमोनिया को यूरिया में बदलना |
मानव उत्सर्जन तंत्र
- दो वृक्क (सेम के बीज के आकार के, पेट के पिछले भाग में), मूत्रवाहिनी (Ureter), मूत्राशय (Urinary Bladder), मूत्रमार्ग (Urethra)।
- नेफ्रॉन (Nephron) वृक्क की कार्यात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में लगभग दस लाख नेफ्रॉन होते हैं।
- कार्य: रक्त को छानकर अपशिष्ट अलग करना, मूत्र बनाना; जल और लवण का संतुलन।
- मूत्र में लगभग 95% जल होता है; पीला रंग यूरोक्रोम वर्णक के कारण।
- अपोहन (Dialysis) वृक्क के विफल होने पर कृत्रिम वृक्क द्वारा रक्त की सफ़ाई है। वृक्क प्रत्यारोपण दूसरा उपाय है।
अन्य जीवों में उत्सर्जन
| जीव | उत्सर्जी अंग |
|---|---|
| अमीबा | संकुचनशील रिक्तिका और विसरण |
| केंचुआ | वृक्कक (Nephridia) |
| कीट | मैल्पीघी नलिकाएँ |
| पौधे | पत्तियाँ झड़ना, छाल, गोंद/रेज़िन, वाष्पोत्सर्जन |
- अमोनिया-उत्सर्जी (Ammonotelic): मछलियाँ। यूरिया-उत्सर्जी (Ureotelic): मनुष्य, मेंढक (वयस्क)। यूरिक-अम्ल-उत्सर्जी (Uricotelic): पक्षी, सरीसृप, कीट (जल की बचत)।
7 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: जैव विविधता और जीवन-क्रियाएँ
जैव विविधता का संरक्षण और शरीर की जीवन-क्रियाएँ, दोनों ऐसे विषय हैं जिनमें बच्चा जो सीखता है, उसे अपने जीवन में उतार सकता है। नीति इस पर ज़ोर देती है कि बच्चे केवल तथ्य न जानें, बल्कि प्रकृति और अपने शरीर के प्रति संवेदनशील भी बनें। शिक्षण के सुझाव यहाँ हैं।
- जैव विविधता सर्वेक्षण: स्कूल परिसर और आस-पास के पेड़-पौधे, पक्षी, कीट गिनना और सूची बनाना।
- स्थानीय संरक्षण-परंपराएँ: सरना स्थल, पवित्र उपवन, वृक्षों से जुड़े पर्वों की चर्चा।
- वन-भ्रमण और राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा: अनुभव-आधारित सीखना।
- पाचन/श्वसन के मॉडल: गुब्बारे और प्लास्टिक की बोतल से फेफड़ों का मॉडल; आटे/रोटी को देर तक चबाने पर मिठास का अनुभव (लार की एमाइलेज़)।
- व्यायाम और साँस: व्यायाम के बाद साँस और नाड़ी की गिनती; प्राणायाम-योग का परिचय।
- स्वस्थ आदतें: समय पर भोजन, पर्याप्त पानी, धूम्रपान/नशे से दूरी।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 चाहती है कि विज्ञान की पढ़ाई प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति ज़िम्मेदारी भी सिखाए। जैव विविधता और जीवन-क्रियाओं का शिक्षण अनुभव, मॉडल और परिवेश से जुड़ा हो।
8 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
9 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. जैव विविधता हॉटस्पॉट की अवधारणा किसने दी?
Q2. भारत में जैव विविधता हॉटस्पॉट की संख्या कितनी है?
Q3. निम्न में से कौन-सा भारत का जैव विविधता हॉटस्पॉट है?
Q4. प्राकृतिक आवास में ही संरक्षण को क्या कहते हैं?
Q5. निम्न में से कौन-सा बाह्यस्थाने संरक्षण का उदाहरण है?
Q6. प्रोजेक्ट टाइगर कब शुरू हुआ?
Q7. IUCN की रेड डेटा बुक किसकी सूची रखती है?
Q8. झारखंड का राज्य-पशु कौन-सा है?
Q9. अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस कब मनाया जाता है?
Q10. लार में पाया जाने वाला एंज़ाइम किसका पाचन करता है?
Q11. मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कौन-सी है?
Q12. वसा के इमल्सीकरण में कौन-सा रस सहायक है?
Q13. पोषक तत्वों का अवशोषण मुख्यतः कहाँ होता है?
Q14. फेफड़ों में गैस-विनिमय किस भाग में होता है?
Q15. यीस्ट में अवायवीय श्वसन से क्या बनता है?
Q16. भारी व्यायाम में मांसपेशियों में किसके जमा होने से दर्द होता है?
Q17. कीटों में श्वसन किसके द्वारा होता है?
Q18. वृक्क की कार्यात्मक इकाई क्या है?
Q19. पक्षियों और सरीसृपों में मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट क्या है?
Q20. कीटों में उत्सर्जन किन नलिकाओं द्वारा होता है?
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