पौधों एवं जन्तुओं की संरचना व कार्य, परिवेश का प्रभाव
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1 पौधे की संरचना: जड़, तना और पत्ती (Structure of a Plant)
एक सामान्य पौधे के दो मुख्य भाग होते हैं: मिट्टी के नीचे जड़ तंत्र और मिट्टी के ऊपर प्ररोह तंत्र (तना, पत्ती, फूल, फल)। हर भाग का अपना काम होता है, और सब मिलकर पौधे को जीवित रखते हैं। यहाँ तीनों प्रमुख भागों की संरचना, कार्य और रूपांतरण समझाए गए हैं।
जड़ (Root)
- कार्य: पौधे को मिट्टी में जकड़ना, मिट्टी से जल और खनिज सोखना, कुछ में भोजन का भंडारण।
- मूल रोम (Root hairs): जड़ की सतह पर बारीक रोम जो जल और खनिज के अवशोषण का क्षेत्र बढ़ाते हैं।
- मूसला जड़ (Tap root): एक मुख्य जड़; द्विबीजपत्री पौधों में (चना, आम, सरसों)। रेशेदार जड़ (Fibrous): धागे जैसी जड़ें; एकबीजपत्री में (गेहूँ, धान, मक्का)।
| रूपांतरित जड़ | उदाहरण | कार्य |
|---|---|---|
| भंडारण जड़ | गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, शकरकंद | भोजन संचय |
| स्तंभ मूल (Prop root) | बरगद | सहारा |
| जटा / अवस्तंभ मूल (Stilt root) | मक्का, गन्ना | सहारा |
| श्वसन मूल (Pneumatophore) | मैंग्रोव (सुंदरवन) | दलदल में हवा लेना |
तना (Stem)
- कार्य: पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देना, जड़ों से जल/खनिज और पत्तियों से भोजन का संवहन।
- तने में गाँठें (Nodes) और पर्व (Internodes) होते हैं; गाँठ से पत्तियाँ और शाखाएँ निकलती हैं।
| रूपांतरित तना | उदाहरण | कार्य |
|---|---|---|
| कंद (Tuber) | आलू | भोजन संचय |
| प्रकंद (Rhizome) | अदरक, हल्दी | भोजन संचय, प्रजनन |
| शल्क-कंद (Bulb) | प्याज़, लहसुन | भोजन संचय |
| प्रतान (Tendril) | अंगूर, खीरा | चढ़ने में सहायक |
| पर्णाभ स्तंभ (Phylloclade) | नागफनी (कैक्टस) | प्रकाश-संश्लेषण, जल-संचय |
पत्ती (Leaf)
- भाग: पर्णफलक (Lamina), पर्णवृंत (Petiole), शिराएँ (Veins)।
- कार्य: प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाना, वाष्पोत्सर्जन, श्वसन (रंध्रों से गैस-विनिमय)।
- रूपांतरण: कैक्टस में काँटे (जल हानि घटाना), मटर में प्रतान, घटपर्णी में घड़ा।
भ्रम से बचें
आलू जड़ नहीं, तना है। उसकी आँखों (कलिकाओं) से नए अंकुर निकलते हैं। शकरकंद जड़ है, आलू तना।
2 पुष्प, परागण, निषेचन, फल एवं बीज (Flower, Pollination, Fruit and Seed)
फूल पौधे का जनन अंग है। फूल से ही आगे चलकर फल और बीज बनते हैं, जिनसे नया पौधा उगता है। फूल की बनावट, परागण की विधियाँ और बीज के फैलाव को समझने से पौधों के जनन की पूरी कहानी जुड़ जाती है।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| बाह्यदल (Sepal) | कली की सुरक्षा; प्रायः हरे |
| दल / पंखुड़ी (Petal) | रंगीन; कीटों को आकर्षित करना |
| पुमंग (Stamen): परागकोष + तंतु | नर जनन अंग; परागकण बनाना |
| जायांग (Pistil): वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय | मादा जनन अंग; अंडाशय में बीजांड |
- द्विलिंगी पुष्प: पुमंग और जायांग दोनों (गुड़हल, सरसों)। एकलिंगी पुष्प: एक ही (पपीता, लौकी, मक्का)।
- परागण (Pollination): परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचना। स्व-परागण (उसी फूल या उसी पौधे पर) और पर-परागण (दूसरे पौधे के फूल पर)।
- परागण के वाहक: कीट, वायु, जल, पक्षी। कीट-परागित फूल रंगीन और सुगंधित होते हैं; वायु-परागित (गेहूँ, मक्का) हल्के परागकण वाले होते हैं।
- निषेचन (Fertilisation): नर और मादा युग्मक का मिलना; इससे युग्मनज (ज़ाइगोट) बनता है।
- निषेचन के बाद अंडाशय से फल और बीजांड से बीज बनता है।
बीज का प्रकीर्णन (Seed Dispersal)
| माध्यम | उदाहरण |
|---|---|
| वायु | हल्के, रोएँदार या पंखयुक्त बीज: आक (मदार), सेमल, सिंहपर्णी, मेपल |
| जल | नारियल, कमल |
| जन्तु | गोखरू, चिरचिटा (काँटे/हुक), आम, जामुन (खाकर बीज फैलाना) |
| विस्फोट | मटर, सेम, अरंडी, भिंडी की फलियाँ |
- बीज के भाग: बीज-चोल, भ्रूण (मूलांकुर, प्रांकुर), बीजपत्र।
- अंकुरण (Germination) के लिए जल, उचित ताप और वायु (ऑक्सीजन) चाहिए।
- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): बिना बीज के नया पौधा, जैसे आलू की आँख, गुलाब की कलम, पत्थरचट्टा की पत्ती, अदरक का प्रकंद।
3 पौधों में जल एवं भोजन का परिवहन (Transport in Plants)
ऊँचे-ऊँचे पेड़ों की जड़ें मिट्टी से जल सोखती हैं और वह जल पत्तियों तक पहुँचता है। पत्तियों में बना भोजन भी पूरे पौधे में बँटता है। यह सब पौधे के भीतर बिछे विशेष नलिकाओं के जाल से होता है। इस प्रक्रिया को समझना पौधे की संरचना और कार्य के बीच संबंध दिखाता है।
| ऊतक | काम | दिशा |
|---|---|---|
| जाइलम (Xylem) | जल और खनिज का परिवहन | जड़ से पत्ती (ऊपर की ओर) |
| फ्लोएम (Phloem) | बने हुए भोजन का परिवहन | पत्ती से सभी भागों में |
- जल का अवशोषण: मूल-रोम परासरण (Osmosis) द्वारा जल सोखते हैं।
- वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्ती के रंध्रों से जलवाष्प का निकलना। इससे जल ऊपर खिंचता है (वाष्पोत्सर्जन-कर्षण), और पौधा ठंडा रहता है।
- रंध्र द्वार-कोशिकाओं के खुलने-बंद होने से नियंत्रित होते हैं। गर्मी में अधिक जल-हानि रोकने के लिए ये बंद होने लगते हैं।
- रंध्र दिन में प्रायः खुले और रात में बंद रहते हैं (अधिकांश पौधों में)।
याद रखें
प्रयोग: एक पौधे की टहनी को रंगीन जल (लाल स्याही) में रखें। कुछ घंटे बाद तने की पतली काट में रंगीन जाइलम नलिकाएँ दिखेंगी।
4 मानव शरीर की संरचना: कंकाल, संधि एवं पेशी (Skeleton, Joints and Muscles)
जन्तुओं का शरीर अलग-अलग अंगों और तंत्रों का समूह है। मनुष्य के शरीर की संरचना जानना जन्तु-विज्ञान की बुनियाद है और विद्यालय-पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा। सबसे पहले शरीर को आकार, सहारा और गति देने वाले कंकाल और पेशी तंत्र को देखें।
- वयस्क मनुष्य में 206 हड्डियाँ होती हैं। नवजात शिशु में लगभग 270–300 (बाद में कुछ जुड़ जाती हैं)।
- सबसे लंबी हड्डी: जाँघ की फीमर; सबसे छोटी: कान की स्टेप्स (रकाब)।
- कंकाल के कार्य: शरीर को आकार और सहारा, नाज़ुक अंगों की रक्षा (खोपड़ी मस्तिष्क की, पसलियाँ हृदय-फेफड़ों की), गति, रक्त-कोशिकाओं का निर्माण (अस्थि-मज्जा)।
- कंकाल: हड्डी (कठोर) और उपास्थि (Cartilage) (कोमल, जैसे कान और नाक)।
| संधि (Joint) | उदाहरण | गति |
|---|---|---|
| कंदुक-खल्लिका (Ball and Socket) | कंधा, कूल्हा | चारों ओर घूमना |
| कब्ज़ा संधि (Hinge) | घुटना, कोहनी | एक दिशा में मुड़ना |
| धुराग्र (Pivot) | गर्दन (सिर) | दाएँ-बाएँ घुमाना |
| स्थिर (Fixed) | खोपड़ी की हड्डियाँ | गति नहीं |
- पेशियाँ (Muscles) सिकुड़कर और फैलकर गति पैदा करती हैं। ये हड्डियों से टेंडन (कंडरा) द्वारा जुड़ी होती हैं।
- ऐच्छिक पेशी (हाथ-पैर) हमारी इच्छा से चलती है। अनैच्छिक पेशी (आँत, रक्त-वाहिकाएँ) अपने आप। हृदय पेशी केवल हृदय में, अनैच्छिक और कभी न थकने वाली।
- द्विशिर (बाइसेप्स) और त्रिशिर (ट्राइसेप्स) पेशियाँ बाँह को मोड़ने और सीधा करने में जोड़ी में काम करती हैं।
5 परिसंचरण तंत्र: हृदय और रक्त (Circulatory System)
शरीर की हर कोशिका को भोजन और ऑक्सीजन चाहिए, और कोशिकाओं के अपशिष्ट को बाहर निकालना भी है। यह पूरा परिवहन रक्त और हृदय की मदद से होता है। इसलिए रक्त-संचरण तंत्र शरीर का वितरण-जाल है, जिसमें हृदय पंप और रक्त-वाहिकाएँ पाइपलाइन का काम करती हैं।
| घटक | कार्य |
|---|---|
| हृदय | रक्त को पंप करना; 4 कक्ष (2 आलिंद + 2 निलय) |
| धमनी (Artery) | हृदय से रक्त शरीर में ले जाती है; दीवार मोटी |
| शिरा (Vein) | शरीर से रक्त हृदय में लाती है; वाल्व होते हैं |
| केशिका (Capillary) | धमनी और शिरा के बीच; पदार्थों का विनिमय |
- हृदय छाती में थोड़ा बाईं ओर स्थित है। वयस्क में औसतन 72 धड़कन प्रति मिनट।
- दोहरा परिसंचरण: मनुष्य में रक्त एक चक्र में दो बार हृदय से गुज़रता है (फुफ्फुसीय और दैहिक परिसंचरण)।
- नाड़ी (Pulse): धमनी में हृदय की धड़कन से बनी तरंग।
- रक्तचाप: सामान्यतः लगभग 120/80 mmHg। इसे स्फिग्मोमैनोमीटर से मापते हैं।
रक्त के घटक
| घटक | कार्य |
|---|---|
| लाल रुधिर कणिका (RBC) | हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन का परिवहन; आयु लगभग 120 दिन |
| श्वेत रुधिर कणिका (WBC) | रोगाणुओं से रक्षा |
| रक्त बिंबाणु (Platelets) | रक्त का थक्का जमाना |
| प्लाज़्मा | तरल भाग; पोषक तत्व, हार्मोन, अपशिष्ट का परिवहन |
- रक्त समूह (A, B, AB, O) की खोज कार्ल लैंडस्टीनर (1901) ने की।
- O ऋणात्मक को सर्वदाता और AB धनात्मक को सर्वग्राही माना जाता है।
- हीमोग्लोबिन में लोहा होता है; इसकी कमी से एनीमिया।
6 तंत्रिका तंत्र, संवेदी अंग और अंतःस्रावी तंत्र
शरीर में हर क्षण असंख्य क्रियाएँ चलती हैं: कुछ तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली और कुछ धीमी, लंबी अवधि की। पहली तरह की क्रियाओं का नियंत्रण तंत्रिका तंत्र और संवेदी अंग करते हैं, जबकि दूसरी का हार्मोन। इस भाग में दोनों नियंत्रण-तंत्रों का परिचय है।
तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
- मुख्य भाग: मस्तिष्क (Brain), मेरुरज्जु (Spinal Cord) और तंत्रिकाएँ।
- तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) तंत्रिका तंत्र की इकाई है: डेंड्राइट, कोशिका-काय, एक्सॉन।
- मस्तिष्क के भाग: प्रमस्तिष्क (सोचना, स्मृति), अनुमस्तिष्क (संतुलन), मस्तिष्क-स्तंभ/मेडुला (श्वसन, हृदय-गति)।
- प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action): अचानक उद्दीपन पर बिना सोचे तुरंत होने वाली क्रिया (जैसे गर्म वस्तु से हाथ हटाना); इसका नियंत्रण मेरुरज्जु से।
संवेदी अंग
| अंग | मुख्य बातें |
|---|---|
| आँख | कॉर्निया, पुतली, आइरिस, लेंस, रेटिना (छड़ और शंकु कोशिकाएँ); छड़: मंद प्रकाश, शंकु: रंग |
| कान | बाह्य, मध्य (3 छोटी हड्डियाँ: मैलियस, इंकस, स्टेप्स) और आंतरिक कान; कर्णावर्त (सुनना), अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ (संतुलन) |
| नाक | गंध |
| जीभ | स्वाद: मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, उमामी |
| त्वचा | स्पर्श, दबाव, ताप, पीड़ा |
- निकट-दृष्टि (Myopia): पास की वस्तु दिखे, दूर की नहीं; अवतल लेंस से सुधार। दीर्घ-दृष्टि (Hypermetropia): दूर की दिखे, पास की नहीं; उत्तल लेंस।
- विटामिन A की कमी से रतौंधी।
अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System)
| ग्रंथि | हार्मोन / कार्य |
|---|---|
| पीयूष (Pituitary) | "मास्टर ग्रंथि"; वृद्धि हार्मोन; अन्य ग्रंथियों का नियंत्रण |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन (चयापचय); आयोडीन की ज़रूरत |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इंसुलिन (रक्त शर्करा घटाना); कमी से मधुमेह |
| अधिवृक्क (Adrenal) | एड्रीनलिन (संकटकालीन "लड़ो या भागो" प्रतिक्रिया) |
| वृषण / अंडाशय | टेस्टोस्टेरोन / एस्ट्रोजन (जनन) |
- हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं, जो रक्त द्वारा लक्ष्य अंग तक पहुँचते हैं।
- किशोरावस्था (Adolescence) में हार्मोन के कारण शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इस दौरान पोषण, संतुलित जानकारी और भावनात्मक सहारा ज़रूरी है।
7 सजीवों पर परिवेश का प्रभाव: अनुकूलन (Adaptation)
मरुस्थल के ऊँट, जल की मछली और पहाड़ की याक, सब अलग-अलग माहौल में रहते हैं, फिर भी अपने-अपने स्थान पर आराम से जी पाते हैं। इसका कारण यह है कि इनकी संरचना और आदतें अपने परिवेश के अनुसार ढल गई हैं। इसी को अनुकूलन कहते हैं, और यह जीव-विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है।
परिभाषा
अनुकूलन (Adaptation) = जीव के वे लक्षण (संरचनात्मक, क्रियात्मक या व्यवहारगत) जो उसे अपने वासस्थान में जीवित रहने और जनन करने में सहायता करते हैं। ये लंबे समय में विकसित होते हैं।
| वासस्थान | जीव | अनुकूलन |
|---|---|---|
| मरुस्थल | ऊँट | कूबड़ में वसा-संचय; चौड़े गद्देदार खुर; लंबी पलकें; कम पानी में जीवन; गाढ़ा मूत्र |
| मरुस्थल | नागफनी (कैक्टस) | पत्तियाँ काँटों में बदलीं; मोटा मांसल तना (जल-संचय); मोमी परत; गहरी जड़ें |
| जलीय | मछली | धारारेखीय शरीर; पंख; गिल से श्वसन; शल्क |
| जलीय | कमल/जलीय पौधे | खोखले तने, तैरने वाली पत्तियाँ, पत्ती पर मोम |
| पर्वतीय | याक | मोटे घने बाल, मज़बूत शरीर |
| पर्वतीय | चीड़/देवदार | शंक्वाकार आकार, ढलवाँ शाखाएँ (बर्फ फिसल जाए); सुई-जैसी पत्तियाँ |
| ध्रुवीय | ध्रुवीय भालू, पेंगुइन | सफ़ेद फर, मोटी वसा-परत, ऊष्मारोधी |
| दलदल/तटीय | मैंग्रोव | श्वसन-मूल, स्तंभ-मूल |
| घास मैदान | हिरण, शेर | हिरण: तेज़ दौड़, पार्श्व में आँखें (सतर्क); शेर: तेज़ दृष्टि, शक्तिशाली जबड़े, आगे की ओर आँखें |
| वृक्ष | गिलहरी, बंदर, तोता | पैने पंजे/पकड़ने वाली पूँछ/मज़बूत चोंच |
| रात्रिचर | उल्लू, चमगादड़ | तेज़ रात्रि-दृष्टि; चमगादड़ में ध्वनि-तरंग से दिशा-निर्धारण |
अनुकूलन के प्रकार
- संरचनात्मक: शारीरिक बनावट (ऊँट के खुर, मछली के पंख)।
- क्रियात्मक (शरीर-क्रिया-संबंधी): शरीर-क्रिया में बदलाव (ऊँट का कम मूत्र, ध्रुवीय भालू की वसा)।
- व्यवहारगत: आदतें (प्रवास, शीत-निद्रा, छिपना)।
- छद्मावरण (Camouflage): गिरगिट, छड़ी-कीट, पत्ती-कीट शिकार से बचने के लिए रंग-रूप बदलते या मिलते हैं।
- शीत-निद्रा (Hibernation): सर्दी में लंबे समय तक सोना (भालू, मेंढक)। ग्रीष्म-निद्रा (Aestivation): गर्मी में निष्क्रिय होना (घोंघा, मछली की कुछ प्रजातियाँ)।
- प्रवास (Migration): मौसम बदलने पर दूर जाना। जैसे साइबेरियाई सारस भारत में सर्दी बिताने आते हैं।
8 उद्दीपन, अनुक्रिया और जैव-विकास (Response, Acclimatisation and Evolution)
पौधे और जन्तु अपने परिवेश के बदलावों को महसूस करके प्रतिक्रिया देते हैं। यह प्रतिक्रिया कभी तुरंत होती है, कभी जीवनकाल में धीरे-धीरे, और कभी कई पीढ़ियों में। इन तीनों स्तरों के भेद को समझना परीक्षा और कक्षा-शिक्षण, दोनों के लिए आवश्यक है।
पौधों में गति और अनुवर्तन
| अनुवर्तन | उद्दीपन | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रकाशानुवर्तन | प्रकाश | तना प्रकाश की ओर (धनात्मक); जड़ विपरीत (ऋणात्मक) |
| गुरुत्वानुवर्तन | गुरुत्व | जड़ नीचे की ओर (धनात्मक); तना ऊपर (ऋणात्मक) |
| जलानुवर्तन | जल | जड़ जल की ओर |
| स्पर्शानुवर्तन | स्पर्श | प्रतान का आधार के चारों ओर लिपटना |
- छुईमुई (Mimosa pudica) स्पर्श करने पर पत्तियाँ तुरंत मुरझाकर बंद कर लेती है। यह गति (स्पर्श-प्रति-अनुक्रिया) का प्रसिद्ध उदाहरण है।
- पादप हार्मोन: ऑक्सिन (कोशिका-दीर्घन, प्रकाशानुवर्तन), जिबरेलिन (तने की वृद्धि), साइटोकाइनिन (कोशिका-विभाजन), एब्सिसिक अम्ल (वृद्धि रोकना, रंध्र बंद करना), एथिलीन (फल पकाना)।
अनुकूलन बनाम अनुकूलित होना
| आधार | अनुकूलन (Adaptation) | अनुकूलित होना (Acclimatisation) |
|---|---|---|
| समय | कई पीढ़ियों में | एक ही जीवनकाल में, थोड़े समय में |
| प्रकृति | आनुवंशिक, स्थायी | अस्थायी, परिवर्तनीय |
| उदाहरण | ऊँट की संरचना | पहाड़ पर चढ़ने पर शरीर में RBC बढ़ना; गर्मी की आदत पड़ना |
- जैव-विकास (Evolution): समय के साथ जीवों में परिवर्तन। चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण (Natural Selection) का सिद्धांत दिया ("On the Origin of Species", 1859)। उनके अनुसार परिवेश के अनुकूल लक्षण वाले जीव अधिक जीवित रहकर जनन करते हैं।
- लैमार्क ने "उपार्जित लक्षणों की वंशागति" का विचार दिया, जो बाद में अस्वीकृत हुआ।
- अनुकूलन आकस्मिक या इच्छा से नहीं होता। यह परिवर्तनों और प्राकृतिक वरण का परिणाम है।
भ्रम से बचें
"जिराफ़ ने गर्दन खींचकर लंबी की" यह लैमार्कवाद है, जो आज सही नहीं माना जाता। आधुनिक मत: जिन जिराफ़ों में प्राकृतिक रूप से लंबी गर्दन थी, वे अधिक जीवित रहे।
9 NEP-2020 एवं NCF-SE के संदर्भ में: शिक्षण-सुझाव
पौधों और जन्तुओं की संरचना की सबसे अच्छी समझ वास्तविक नमूनों को देखने, छूने और खोलकर देखने से आती है, चित्र रटने से नहीं। नीति का आग्रह है कि बच्चे अपने परिवेश से ही सीखें। यहाँ कक्षा में आज़माने योग्य कुछ सुझाव हैं।
- नमूना-प्रयोग: अलग-अलग फूल, पत्ती, जड़ लाकर भागों की पहचान; गुड़हल की चीरकर फूल के भाग देखना।
- बीज-अंकुरण परियोजना: चना/मूँग को अंकुरित करना, परिस्थिति बदलकर तुलना।
- परागण-अवलोकन: बगीचे में तितली-मधुमक्खी का फूलों पर आना देखना।
- अनुकूलन के चार्ट और खेल: "यह जीव कहाँ रहता है और क्यों?" पर चर्चा।
- मानव शरीर: छोटे बच्चों के लिए खेल और मॉडल; अपनी नाड़ी गिनना; प्रतिवर्ती क्रिया का सुरक्षित प्रदर्शन।
- संवेदनशीलता: जीवों को बिना हानि पहुँचाए अवलोकन; अहिंसा और करुणा का भाव।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 और NCF-SE में जीवों की संरचना को अवलोकन, जाँच और परिवेश से जोड़कर पढ़ाने की बात है। बच्चे अपने आसपास के पौधों-जन्तुओं से ही शुरुआत करें।
10 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
11 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. पौधे का कौन-सा भाग जल और खनिज को मिट्टी से सोखता है?
Q2. आलू पौधे का कौन-सा रूपांतरित भाग है?
Q3. गाजर किस प्रकार की रूपांतरित संरचना है?
Q4. फूल का नर जनन अंग कौन-सा है?
Q5. परागकणों का वर्तिकाग्र पर पहुँचना क्या कहलाता है?
Q6. नारियल के बीज का प्रकीर्णन किस माध्यम से होता है?
Q7. पौधों में जल का परिवहन कौन-सा ऊतक करता है?
Q8. वाष्पोत्सर्जन किन छिद्रों से होता है?
Q9. वयस्क मनुष्य में कुल हड्डियों की संख्या कितनी होती है?
Q10. मानव शरीर की सबसे लंबी हड्डी कौन-सी है?
Q11. कंधे की संधि किस प्रकार की है?
Q12. मनुष्य के हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
Q13. ऑक्सीजन का परिवहन करने वाला रक्त घटक कौन-सा है?
Q14. रक्त समूहों की खोज किसने की?
Q15. इंसुलिन का निर्माण कहाँ होता है?
Q16. "मास्टर ग्रंथि" किसे कहा जाता है?
Q17. निकट-दृष्टि दोष में किस लेंस का उपयोग होता है?
Q18. ऊँट के कूबड़ में क्या संचित होता है?
Q19. कैक्टस में पत्तियाँ किसमें रूपांतरित हो जाती हैं?
Q20. प्राकृतिक वरण का सिद्धांत किसने दिया?
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