भोजन: स्रोत, अवयव, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता
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1 भोजन क्या है और हमें इसकी आवश्यकता क्यों है? (Food and its Need)
हर सजीव को जीवित रहने के लिए ऊर्जा चाहिए, और यह ऊर्जा उसे भोजन से मिलती है। भोजन केवल पेट भरने की चीज़ नहीं है। यह शरीर को बढ़ने, टूट-फूट की मरम्मत करने, बीमारियों से लड़ने और सभी अंगों के सही ढंग से काम करने में मदद करता है। इस विषय की शुरुआत इसी बुनियादी समझ से होती है।
- भोजन (Food) = वे पदार्थ जो जीव ग्रहण करता है और जिनसे उसे ऊर्जा, वृद्धि, मरम्मत और रोगों से सुरक्षा मिलती है।
- पोषण (Nutrition) = भोजन ग्रहण करने से लेकर उसके उपयोग तक की पूरी प्रक्रिया।
- पोषक तत्व (Nutrients) = भोजन में मौजूद वे घटक जिनसे शरीर की ज़रूरतें पूरी होती हैं।
- आहार (Diet) = किसी व्यक्ति द्वारा एक दिन में खाया गया कुल भोजन।
| आवश्यकता | भोजन की भूमिका |
|---|---|
| ऊर्जा | काम करने, चलने, सोचने और शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए |
| वृद्धि | नई कोशिकाएँ और ऊतक बनाने के लिए |
| मरम्मत | घाव भरने और टूटी कोशिकाओं की भरपाई के लिए |
| रोग-प्रतिरोध | शरीर की रक्षा-प्रणाली मज़बूत करने के लिए |
| नियमन | शरीर की क्रियाओं को ठीक से चलाने के लिए |
याद रखें
पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (स्वपोषी, Autotroph), जबकि जन्तु दूसरों पर निर्भर रहते हैं (परपोषी, Heterotroph)।
NEP-2020 से जुड़ाव
NEP-2020 बच्चों की पोषण और स्वास्थ्य को सीखने से जोड़ती है। नीति में विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के साथ पौष्टिक नाश्ता देने का सुझाव है, क्योंकि भूखे या कुपोषित बच्चे का ध्यान पढ़ाई में नहीं लग पाता।
2 भोजन के स्रोत (Sources of Food)
हमारा सारा भोजन अंततः दो ही स्रोतों से आता है: पौधे और जन्तु। यहाँ तक कि जन्तुओं से मिलने वाला भोजन भी, जैसे दूध या मांस, उन्हीं जन्तुओं द्वारा खाए गए पौधों पर निर्भर है। नीचे दोनों स्रोतों को उदाहरण सहित देखें।
1. पादप स्रोत (Plant Sources)
| पौधे का भाग | भोजन के उदाहरण |
|---|---|
| जड़ | गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, शकरकंद |
| तना | आलू (भूमिगत तना), गन्ना, अदरक, प्याज़ (शल्क-कंद) |
| पत्ती | पालक, बथुआ, सरसों का साग, पत्तागोभी, धनिया |
| फूल | फूलगोभी, केले का फूल, ब्रोकली |
| फल | आम, केला, सेब, टमाटर, बैंगन, लौकी |
| बीज | गेहूँ, चावल, चना, मटर, राजमा, मूँगफली, बादाम |
- गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा जैसे अनाज; चना, अरहर, मूँग, उड़द जैसी दालें; और सरसों, मूँगफली, सोयाबीन जैसे तिलहन भी पौधों से मिलते हैं।
- मसाले (हल्दी, जीरा, धनिया, काली मिर्च) और शक्कर (गन्ने या चुकंदर से) भी पादप स्रोत हैं।
- पौधों से पेय: चाय (पत्तियाँ), कॉफ़ी (बीज), नारियल पानी (फल)।
2. जन्तु स्रोत (Animal Sources)
- दूध और दूध के उत्पाद: गाय, भैंस, बकरी से; दही, पनीर, घी, मक्खन।
- अंडे: मुर्गी, बत्तख से।
- मांस और मछली: बकरी, मुर्गी, मछली आदि।
- शहद: मधुमक्खी द्वारा फूलों के रस (पुष्प-मकरंद) से बनता है।
3. आहार के आधार पर जन्तुओं के प्रकार
| प्रकार | आहार | उदाहरण |
|---|---|---|
| शाकाहारी (Herbivore) | केवल पौधे | गाय, हिरण, खरगोश, हाथी |
| मांसाहारी (Carnivore) | केवल जन्तु | शेर, बाघ, बाज, मेंढक |
| सर्वाहारी (Omnivore) | पौधे और जन्तु दोनों | मनुष्य, कौआ, भालू, कुत्ता |
| अपरदभोजी (Detritivore) | मृत व सड़ते पदार्थ | केंचुआ, गिद्ध (मृतभक्षी) |
4. सूक्ष्मजीवों से बने भोजन
- यीस्ट (Yeast) से ब्रेड, इडली, डोसा और खमीर वाले खाद्य बनते हैं।
- लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध से दही बनाते हैं।
- खाने वाली कुकुरमुत्ता (मशरूम) एक कवक (Fungus) है।
भ्रम से बचें
दूध और अंडे जन्तु स्रोत हैं, पर इनसे मिलने वाला भोजन मांस नहीं माना जाता। "मांसाहारी" का तात्पर्य मांस खाने वाले से है, न कि अंडे-दूध से।
NCF-SE 2023 से जुड़ाव
NCF-SE 2023 बच्चों को आस-पास के परिवेश से सीखने पर बल देता है। स्थानीय फल, सब्ज़ी, अनाज (मोटे अनाज/millets सहित) और स्थानीय भोजन-संस्कृति को कक्षा से जोड़ने के अवसर हैं।
3 भोजन के अवयव: पोषक तत्वों का परिचय (Components of Food)
भोजन कोई एक पदार्थ नहीं, बल्कि कई घटकों का मिश्रण है। इन घटकों को पोषक तत्व कहते हैं। मुख्य पोषक तत्व सात हैं, जो शरीर में अलग-अलग काम करते हैं। इस भाग में सभी का सार दिया गया है, और आगे के भागों में हर एक को विस्तार से समझाया गया है।
| पोषक तत्व | मुख्य कार्य | मुख्य स्रोत |
|---|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) | ऊर्जा देना | चावल, गेहूँ, आलू, शक्कर, फल |
| प्रोटीन (Proteins) | वृद्धि और मरम्मत | दाल, दूध, अंडा, मछली, सोयाबीन |
| वसा (Fats) | संचित ऊर्जा, तापमान बनाए रखना | तेल, घी, मक्खन, मेवे |
| विटामिन (Vitamins) | रोगों से बचाव, सही कार्य | फल, सब्ज़ी, दूध, अंडा |
| खनिज लवण (Minerals) | हड्डियाँ, रक्त, तंत्रिकाएँ | दूध, हरी सब्ज़ी, नमक, गुड़ |
| जल (Water) | तरल माध्यम, तापमान संतुलन | पानी, फल, सब्ज़ी, पेय |
| रेशे / रुक्षांश (Roughage) | पाचन में सहायक, कब्ज़ से बचाव | अनाज का छिलका, सब्ज़ी, फल |
- बृहत् पोषक तत्व (Macronutrients): जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में ज़रूरत है, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा।
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): जिनकी कम मात्रा चाहिए, जैसे विटामिन और खनिज।
- ऊर्जा देने वाले: कार्बोहाइड्रेट और वसा। शरीर-निर्माण करने वाले: प्रोटीन। सुरक्षा देने वाले: विटामिन और खनिज।
याद रखें
एक चुटकी याद: ऊर्जा-प्रदाता = कार्बोहाइड्रेट + वसा; निर्माण-कर्ता = प्रोटीन; रक्षक/नियामक = विटामिन + खनिज + जल।
4 कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा (Carbohydrates, Proteins and Fats)
ये तीनों बृहत् पोषक तत्व भोजन का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। इनकी पहचान के लिए सरल परीक्षण भी हैं, जो विज्ञान शिक्षण और परीक्षा, दोनों में महत्वपूर्ण हैं। पहले तीनों का अलग-अलग परिचय देखें, फिर उनके परीक्षण।
कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
- शरीर को सबसे तेज़ और मुख्य ऊर्जा देते हैं।
- प्रकार: शर्करा (Sugar) जैसे ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, सुक्रोज़ (साधारण); स्टार्च (मंड, Starch) और सेलुलोज़ (रेशा) (जटिल)।
- स्रोत: चावल, गेहूँ, आलू, केला, गन्ना, शहद।
- अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट वसा के रूप में जमा हो सकता है।
प्रोटीन (Proteins)
- प्रोटीन अमीनो अम्लों से बनते हैं।
- कार्य: शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत, एंज़ाइम और हार्मोन बनाना, रोग-प्रतिरोध (एंटीबॉडी)।
- पादप स्रोत: दालें, सोयाबीन, मूँगफली, राजमा। जन्तु स्रोत: दूध, अंडा, मछली, मांस।
- जन्तु-प्रोटीन को प्रायः पूर्ण प्रोटीन कहा जाता है, क्योंकि इसमें सभी आवश्यक अमीनो अम्ल होते हैं।
वसा (Fats)
- प्रति ग्राम सबसे अधिक ऊर्जा देती है।
- कार्य: ऊर्जा का संचय, शरीर को ठंड से बचाना (ऊष्मा-रोधी परत), अंगों की सुरक्षा, वसा-विलेय विटामिन (A, D, E, K) के अवशोषण में मदद।
- स्रोत: तेल, घी, मक्खन, मेवे, तिलहन, मांस।
प्रमुख परीक्षण (Food Tests)
| पोषक तत्व | परीक्षण | परिणाम |
|---|---|---|
| स्टार्च | आयोडीन विलयन की कुछ बूँदें | नीला-काला रंग |
| प्रोटीन | कॉपर सल्फेट + कॉस्टिक सोडा (ब्यूरेट परीक्षण) | बैंगनी रंग |
| वसा | भोजन को कागज़ पर रगड़ना | कागज़ पर पारभासी (चिकना) धब्बा |
| ग्लूकोज़ | बेनेडिक्ट विलयन के साथ गर्म करना | ईंट जैसा लाल अवक्षेप |
ऊर्जा का मान
| पोषक तत्व | ऊर्जा प्रति ग्राम (लगभग) |
|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | 4 किलो-कैलोरी |
| प्रोटीन | 4 किलो-कैलोरी |
| वसा | 9 किलो-कैलोरी |
भ्रम से बचें
ऊर्जा की सबसे अधिक मात्रा वसा देती है (9 kcal/g), लेकिन शरीर की ऊर्जा का तात्कालिक और मुख्य स्रोत कार्बोहाइड्रेट ही है।
5 विटामिन एवं उनकी कमी से होने वाले रोग (Vitamins and Deficiency Diseases)
विटामिन ऐसे कार्बनिक पदार्थ हैं जिनकी शरीर को थोड़ी मात्रा में ज़रूरत होती है, पर इनके बिना शरीर ठीक से काम नहीं कर सकता। शरीर इन्हें प्रायः खुद नहीं बना पाता, इसलिए इन्हें भोजन से लेना पड़ता है। इनकी कमी से होने वाले रोग परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
- वसा-विलेय (Fat-soluble): A, D, E, K। ये शरीर में संचित रहते हैं।
- जल-विलेय (Water-soluble): B-समूह और C। इन्हें रोज़ लेना पड़ता है।
| विटामिन | स्रोत | कमी से रोग |
|---|---|---|
| A (रेटिनॉल) | गाजर, पपीता, पालक, दूध, मछली-यकृत तेल | रतौंधी, आँखों का सूखना (ज़ीरोफ्थैल्मिया) |
| B1 (थायमिन) | अनाज का छिलका, दाल, खमीर | बेरी-बेरी |
| B2 (राइबोफ्लेविन) | दूध, अंडा, हरी सब्ज़ी | मुँह के कोनों में दरारें, जीभ में सूजन |
| B3 (नियासिन) | दालें, मूँगफली, मांस | पेलाग्रा |
| B12 (कोबालामिन) | दूध, अंडा, मांस, मछली | हानिकारक रक्ताल्पता (Pernicious Anaemia) |
| C (एस्कॉर्बिक अम्ल) | आँवला, नींबू, संतरा, अमरूद, टमाटर | स्कर्वी (मसूड़ों से रक्तस्राव) |
| D (कैल्सिफेरॉल) | धूप, दूध, अंडे की जर्दी, मछली-तेल | रिकेट्स (बच्चों में), अस्थि-मृदुता (वयस्कों में) |
| E (टोकोफेरॉल) | वनस्पति तेल, मेवे, अंकुरित अनाज | प्रजनन-संबंधी और कोशिका-झिल्ली की समस्याएँ |
| K | हरी पत्तेदार सब्ज़ी | रक्त का थक्का न जमना |
- विटामिन D हमारी त्वचा में सूर्य के प्रकाश में बनता है।
- विटामिन K आँत के जीवाणु भी कुछ मात्रा में बनाते हैं।
- विटामिन C खाना पकाने और अधिक गर्म करने पर नष्ट हो सकता है, इसलिए सलाद या हल्का पकाया भोजन लाभकारी है।
- विटामिन A की कमी से अंधापन तक हो सकता है, इसलिए इसे बच्चों के लिए विशेष ज़रूरी माना जाता है।
याद रखें
जोड़ी बनाकर याद करें: A–रतौंधी; B1–बेरी-बेरी; C–स्कर्वी; D–रिकेट्स; K–रक्त का थक्का।
6 खनिज लवण, जल और रेशे (Minerals, Water and Roughage)
खनिज लवण भी सूक्ष्म मात्रा में चाहिए, लेकिन इनके बिना हड्डियाँ, रक्त, तंत्रिकाएँ और मांसपेशियाँ ठीक से काम नहीं करतीं। जल और रेशे पोषक तत्व कहलाते हैं, पर इनकी भूमिका बाकी तत्वों से अलग है। नीचे सभी को क्रम से देखें।
खनिज लवण (Minerals)
| खनिज | मुख्य कार्य | कमी से हानि |
|---|---|---|
| कैल्शियम | हड्डी, दाँत, रक्त का थक्का, मांसपेशी | कमज़ोर हड्डियाँ, दाँत की समस्या |
| लोहा (Iron) | रक्त के हीमोग्लोबिन का निर्माण | रक्ताल्पता / एनीमिया |
| आयोडीन | थायरॉक्सिन हार्मोन बनाना | घेंघा (Goitre) |
| सोडियम, पोटैशियम | तंत्रिका संकेत, जल-संतुलन | मांसपेशी में ऐंठन, कमज़ोरी |
| फॉस्फोरस | हड्डी, दाँत, ऊर्जा-अणु (ATP) | हड्डियों में कमज़ोरी |
| फ्लोराइड | दाँतों का इनेमल मज़बूत करना | दंत-क्षय (अधिक मात्रा से फ्लोरोसिस) |
- स्रोत: कैल्शियम: दूध, दही, रागी; लोहा: पालक, गुड़, चुकंदर; आयोडीन: आयोडीन-युक्त नमक, समुद्री भोजन।
- घेंघा की रोकथाम के लिए आयोडीन-युक्त नमक का उपयोग करना चाहिए।
जल (Water)
- शरीर का लगभग दो-तिहाई (65–70%) भाग जल है।
- भोजन को घोलकर पाचन व अवशोषण में सहायक; रक्त का प्रमुख घटक; पसीने से शरीर का तापमान नियंत्रित; मल-मूत्र द्वारा अपशिष्ट बाहर निकालना।
- पानी की कमी से निर्जलीकरण (Dehydration) होता है। दस्त में ORS (मौखिक पुनर्जलीकरण घोल) लाभकारी है।
रेशे / रुक्षांश (Roughage / Dietary Fibre)
- ये मुख्यतः सेलुलोज़ होते हैं, जिनका शरीर में पाचन नहीं होता, इसलिए इनसे ऊर्जा नहीं मिलती।
- फिर भी ये ज़रूरी हैं: भोजन को आँत में आगे बढ़ाते हैं, कब्ज़ से बचाव करते हैं।
- स्रोत: साबुत अनाज, दालें, फल, सब्ज़ियाँ, छिलके सहित भोजन।
भ्रम से बचें
रेशे में पोषक तत्व नहीं पचते, फिर भी इन्हें भोजन का आवश्यक भाग माना जाता है। रेशे को "बेकार" समझना गलत है।
7 संतुलित आहार एवं ऊर्जा की आवश्यकता (Balanced Diet)
स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ़ ज़्यादा खाना काफ़ी नहीं, बल्कि सही अनुपात में सभी पोषक तत्व लेना ज़रूरी है। इसी को संतुलित आहार कहते हैं। हर व्यक्ति की ज़रूरत उसकी आयु, लिंग, काम और स्वास्थ्य के अनुसार अलग होती है।
परिभाषा
संतुलित आहार (Balanced Diet) = वह आहार जिसमें सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, जल और रेशे) उचित मात्रा और अनुपात में हों।
- ऊर्जा की माप किलो-कैलोरी (kcal) में होती है। 1 kcal ≈ 4.18 किलोजूल (kJ)।
- अधिक ऊर्जा चाहिए: बढ़ते बच्चे, किशोर, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, कठिन शारीरिक श्रम करने वाले लोग।
- भोजन-समूह (अनाज, दालें, फल-सब्ज़ी, दूध-उत्पाद, तेल) में से सभी का सही संयोजन आवश्यक है।
- स्थानीय और मौसमी भोजन पौष्टिक और किफ़ायती होता है।
- दाल और अनाज एक साथ खाने से प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर होती है, जैसे खिचड़ी, दाल-चावल।
- जंक फ़ूड में वसा, नमक और चीनी अधिक, पोषक तत्व कम होते हैं।
| स्थिति | परिणाम |
|---|---|
| अल्प-पोषण (कम मात्रा/कम पोषक) | दुर्बलता, वृद्धि में कमी |
| अतिपोषण (बहुत अधिक खाना) | मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग का खतरा |
| असंतुलित (किसी तत्व की कमी) | विशिष्ट कमी-जन्य रोग |
कुपोषण (Malnutrition)
- कुपोषण = आहार में पोषक तत्वों की कमी या असंतुलन (अधिकता भी)।
- क्वाशिओरकर (Kwashiorkor): मुख्यतः प्रोटीन की कमी; पेट फूला हुआ, पैरों में सूजन।
- मैरास्मस (Marasmus): प्रोटीन और कैलोरी दोनों की कमी; शरीर बहुत दुबला, "हड्डी का ढाँचा"।
- एनीमिया: लोहे (और B12/फोलिक अम्ल) की कमी।
NEP-2020 और सरकारी पहलें
NEP-2020 में पोषण, स्वास्थ्य-जाँच और स्वास्थ्य-कार्ड पर ध्यान है। सरकार की पीएम पोषण (पूर्व में मध्याह्न भोजन), पोषण अभियान/पोषण 2.0 तथा ईट राइट इंडिया (FSSAI) जैसी पहलें इसी दिशा में हैं।
8 भोजन का उपयोग, पकाना और परिरक्षण (Use and Preservation of Food)
हम भोजन खाते हैं, पर उसका सही उपयोग तभी होता है जब वह शरीर तक पूरी पोषकता के साथ पहुँचे। इसके लिए भोजन को पकाने और संरक्षित करने के तरीके मायने रखते हैं। इस भाग में भोजन के उपयोग, पकाने के असर और परिरक्षण (Preservation) को समझाया गया है।
शरीर में भोजन का उपयोग
- ऊर्जा देना: कार्बोहाइड्रेट और वसा का ऑक्सीकरण (श्वसन) कर ऊर्जा बनाना।
- शरीर-निर्माण: प्रोटीन से नई कोशिकाएँ।
- नियमन व सुरक्षा: विटामिन, खनिज और जल से।
- पचा हुआ भोजन रक्त के द्वारा शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचता है।
पकाने का असर
- पकाने से भोजन स्वादिष्ट, सुपाच्य और सुरक्षित (जीवाणु नष्ट) बनता है।
- अधिक पकाने या बार-बार गर्म करने से कुछ विटामिन (विशेषकर C और B) नष्ट हो जाते हैं।
- चावल/सब्ज़ी का पानी फेंकने से घुले हुए विटामिन और खनिज चले जाते हैं।
- सब्ज़ी को काटने से पहले धोना चाहिए, काटने के बाद नहीं।
भोजन परिरक्षण (Food Preservation)
| विधि | उदाहरण / सिद्धांत |
|---|---|
| सुखाना (धूप में) | अनाज, मटर, मछली, मेथी; नमी हटने से जीवाणु नहीं पनपते |
| नमक लगाना | अचार, मछली, मांस; नमी खींचकर जीवाणु रोकना |
| चीनी/शीरा | जैम, जेली, मुरब्बा |
| तेल/सिरका | अचार; हवा से बचाव |
| ठंडा करना (रेफ्रिजरेशन) | कम तापमान पर जीवाणु की वृद्धि धीमी |
| पाश्चुरीकरण | दूध को लगभग 63°C पर 30 मिनट (या 72°C पर 15 सेकंड) गर्म करके तुरंत ठंडा करना |
| डिब्बाबंदी (Canning) | पैक करके उच्च ताप पर निर्जर्मीकरण |
| रासायनिक परिरक्षक | सोडियम बेंज़ोएट आदि (सीमित मात्रा) |
- पाश्चुरीकरण का नाम लुई पाश्चर (Louis Pasteur) पर है।
- भोजन खराब होने का मुख्य कारण सूक्ष्मजीव (जीवाणु, कवक) हैं।
खाद्य अपमिश्रण (Food Adulteration)
- अपमिश्रण = शुद्ध खाद्य में घटिया या हानिकारक पदार्थ मिलाना। जैसे दूध में पानी, हल्दी में रंग, मिर्च में ईंट का चूरा।
- भारत में खाद्य सुरक्षा FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण; खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006) के अधीन है।
- खरीदते समय FSSAI लाइसेंस, एक्सपायरी तिथि, सामग्री-सूची देखनी चाहिए।
9 स्वास्थ्य का अर्थ एवं रोग (Health and Disease)
स्वस्थ रहना केवल बीमार न होना नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य का दायरा इससे बड़ा है। शिक्षक के लिए यह समझ ज़रूरी है ताकि वह बच्चों में स्वास्थ्य की सही आदतें विकसित कर सके। इस भाग में स्वास्थ्य, रोग के प्रकार और रोकथाम की मूल बातें हैं।
परिभाषा
WHO (1948) के अनुसार स्वास्थ्य = पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की अवस्था, केवल रोग या दुर्बलता का न होना ही नहीं।
- स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक: आहार, स्वच्छता, व्यायाम, नींद, पर्यावरण, आनुवंशिकता, आर्थिक व सामाजिक स्थिति।
- संक्रामक रोग (Communicable): रोगाणुओं से फैलते हैं। जैसे हैज़ा, टाइफाइड, टी.बी., चिकनपॉक्स, खसरा, मलेरिया।
- असंक्रामक रोग (Non-communicable): फैलते नहीं। जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, कमी-जन्य रोग।
| रोग-वाहक / माध्यम | उदाहरण |
|---|---|
| जल-जनित | हैज़ा, टाइफाइड, पीलिया (हेपेटाइटिस A) |
| वायु-जनित | सर्दी-ज़ुकाम, टी.बी., खसरा, इन्फ्लूएंज़ा |
| वाहक (मच्छर) | मलेरिया (मादा एनोफिलीज़), डेंगू (एडीज़), चिकनगुनिया |
| प्रत्यक्ष संपर्क | खुजली, दाद |
| रक्त/शारीरिक द्रव | हेपेटाइटिस B, HIV |
- रोकथाम: टीकाकरण, स्वच्छ पेयजल, हाथ धोना, मच्छर नियंत्रण (जमा पानी न रहने देना), संतुलित आहार।
- टीकाकरण (Vaccination) से शरीर में रोग के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता बनती है। एडवर्ड जेनर ने चेचक का टीका विकसित किया।
- शरीर के सफ़ेद रक्त कणिकाएँ और एंटीबॉडी रोगाणुओं से लड़ते हैं।
NEP-2020 से जुड़ाव
NEP-2020 बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, परामर्श और स्वास्थ्य-जाँच को स्कूली शिक्षा का हिस्सा मानती है। विद्यालय को स्वास्थ्य और स्वच्छता की आदतें सिखाने का स्थान बनाना है।
10 स्वच्छता एवं सुरक्षित जल (Hygiene and Safe Water)
अच्छा भोजन भी गंदगी के कारण बीमारी का कारण बन सकता है। स्वच्छता की आदतें अधिकतर रोगों को पहले ही रोक देती हैं। यह खंड व्यक्तिगत स्वच्छता से लेकर पेयजल की शुद्धि और सरकारी स्वच्छता अभियान तक की जानकारी देता है।
| प्रकार | मुख्य बातें |
|---|---|
| व्यक्तिगत स्वच्छता | नियमित स्नान, दाँत-सफ़ाई, साफ़ कपड़े, नाखून काटना, खाने से पहले व शौच के बाद साबुन से हाथ धोना |
| भोजन की स्वच्छता | ढककर रखना, कच्चे-पके को अलग रखना, ताज़ा खाना, फल-सब्ज़ी धोना |
| घर/परिवेश की स्वच्छता | कचरे का सही निपटान, जमा पानी न रखना, शौचालय का उपयोग |
| सामुदायिक स्वच्छता | नालियों की सफ़ाई, कूड़े का प्रबंधन, स्वच्छ जल-स्रोत |
पेयजल को शुद्ध करने के तरीके
- छानना / फ़िल्टर करना: अशुद्धियाँ हटाने के लिए।
- उबालना: अधिकांश रोगाणुओं को मारने का प्रभावी घरेलू तरीका।
- क्लोरीनीकरण (Chlorination): क्लोरीन की गोलियाँ/ब्लीचिंग पाउडर से कीटाणु नष्ट करना।
- फिटकरी (Alum) से अवसादन: गंदगी नीचे बैठ जाती है, फिर साफ़ पानी निथार लेते हैं।
- पराबैंगनी (UV) और RO आधारित उपकरण।
- हाथ धोना दस्त, हैज़ा और कई संक्रमणों से बचाव की सबसे सरल और सस्ती आदत है।
- स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ। विद्यालयों में "स्वच्छ विद्यालय" पर भी ज़ोर है।
- जल-जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण घरों में नल से पेयजल पहुँचाना है।
याद रखें
कक्षा में गतिविधि: बच्चों से "हाथ धोने के 6 चरण" का अभ्यास कराएँ, और कैसे गंदे हाथ रोग फैलाते हैं, इसे समझाने के लिए सरल प्रयोग/चित्र दिखाएँ।
NEP-2020 / NCF-SE से जुड़ाव
NEP-2020 और NCF दोनों स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य को अनुभव आधारित गतिविधियों से सिखाने पर ज़ोर देते हैं। विद्यालय को स्वच्छ और सुरक्षित परिवेश देने की जवाबदेही है।
11 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
12 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. कौन-सा पोषक तत्व शरीर को सर्वाधिक ऊर्जा प्रति ग्राम देता है?
Q2. स्टार्च की उपस्थिति की जाँच में आयोडीन विलयन किस रंग में बदलता है?
Q3. वसा की जाँच के लिए भोजन को कागज़ पर रगड़ने पर क्या दिखता है?
Q4. रतौंधी किस विटामिन की कमी से होती है?
Q5. स्कर्वी रोग किसकी कमी से होता है?
Q6. बच्चों में रिकेट्स किसकी कमी से होता है?
Q7. बेरी-बेरी रोग का कारण क्या है?
Q8. घेंघा (Goitre) किस खनिज की कमी से होता है?
Q9. निम्नलिखित में से कौन-सा विटामिन जल-विलेय है?
Q10. रेशे (Roughage) का मुख्य लाभ क्या है?
Q11. प्रोटीन की कमी से बच्चों में होने वाला रोग कौन-सा है?
Q12. मैरास्मस किसकी कमी से होता है?
Q13. दूध को लगभग 63°C पर 30 मिनट गर्म कर तुरंत ठंडा करने की विधि क्या कहलाती है?
Q14. WHO के अनुसार स्वास्थ्य का अर्थ क्या है?
Q15. मलेरिया फैलाने वाला मच्छर कौन-सा है?
Q16. निम्न में से कौन पादप का "तना" भाग है जिसे हम सब्ज़ी के रूप में खाते हैं?
Q17. स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ?
Q18. मनुष्य किस श्रेणी का जन्तु है?
Q19. भोजन में मिलावट की निगरानी के लिए भारत में कौन-सी संस्था है?
Q20. दालें मुख्यतः किस पोषक तत्व का अच्छा स्रोत हैं?
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