चीजें जो हम बनाते और करते हैं
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1 चीजें जो हम बनाते और करते हैं: परिचय
मनुष्य केवल उपभोग नहीं करता, वह बनाता भी है और काम भी करता है। रोटी बनाना, मिट्टी का बर्तन गढ़ना, टोकरी बुनना, कपड़ा सिलना, खेत जोतना, गीत गाना, खेल खेलना, ये सब हमारी रचनात्मकता और श्रम के रूप हैं। इस विषय के माध्यम से बच्चे अपने आसपास के काम-धंधों और उनसे जुड़े लोगों को पहचानना और उनका सम्मान करना सीखते हैं।
- बनाई जाने वाली चीज़ें: भोजन, कपड़े, बर्तन, घर, औज़ार, खिलौने, चित्र, वाद्य-यंत्र।
- की जाने वाली गतिविधियाँ: खेती, पशुपालन, व्यापार, पढ़ाना, इलाज, सफाई, खेलना, गाना-नाचना, त्योहार मनाना।
- हर वस्तु के पीछे किसी का श्रम, कौशल और ज्ञान होता है।
- श्रम की गरिमा: कोई भी ईमानदारी का काम छोटा नहीं होता।
- ये विषय हाथ और मस्तिष्क दोनों के साथ-साथ उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
2 आसपास के पेशे और कारीगर (Occupations and Artisans)
समाज में अनेक लोग अलग-अलग काम करके एक-दूसरे की ज़रूरतें पूरी करते हैं। यह परस्पर निर्भरता समाज को जोड़ती है। कारीगर अपने हाथ के कौशल से रोज़मर्रा की चीज़ें बनाते हैं, जबकि सेवा-प्रदाता सेवाएँ देते हैं।
| व्यक्ति | वे क्या बनाते / करते हैं |
|---|---|
| किसान | अनाज, सब्ज़ी, फल उगाना |
| कुम्हार | मिट्टी के बर्तन, दीये, खिलौने |
| बढ़ई | लकड़ी का फ़र्नीचर, दरवाज़े |
| लोहार | लोहे के औज़ार, हल, कुदाल |
| जुलाहा / बुनकर | हथकरघे पर कपड़ा |
| दर्ज़ी | सिलाई-कपड़े |
| मोची | जूते-चप्पल की मरम्मत |
| सुनार | आभूषण |
| राजमिस्त्री | मकान, दीवार बनाना |
| नाई, धोबी | व्यक्तिगत एवं कपड़े की सफाई सेवा |
| डॉक्टर / नर्स / ANM | स्वास्थ्य सेवा |
| शिक्षक | शिक्षा |
| पुलिस, सैनिक, दमकलकर्मी | सुरक्षा |
| डाकिया | डाक वितरण |
| सफाईकर्मी | स्वच्छता |
- प्राथमिक क्षेत्र: खेती, पशुपालन, खनन, मत्स्यपालन; द्वितीयक: उद्योग/निर्माण; तृतीयक: सेवाएँ।
- आधुनिक काल में मशीनें कई काम तेज़ कर देती हैं, पर हस्तशिल्प की अपनी पहचान और सुंदरता बनी हुई है।
3 झारखंड के प्रमुख हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद
झारखंड अपनी जनजातीय कला, बाँस-शिल्प, धातु-ढलाई, रेशम और लाख जैसी विशिष्टताओं के लिए जाना जाता है। ये कलाएँ न केवल आजीविका देती हैं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में झारखंड की ऐसी विशेषताओं पर प्रश्न आते रहते हैं।
| शिल्प / उत्पाद | विशेषता |
|---|---|
| तसर रेशम (Tasar silk) | झारखंड तसर रेशम का प्रमुख उत्पादक राज्य; चाईबासा, सरायकेला-खरसावाँ, गोड्डा, दुमका आदि क्षेत्रों में |
| लाख (Lac) | झारखंड देश का प्रमुख लाख-उत्पादक राज्य; खूँटी, रांची आदि क्षेत्रों में चूड़ियाँ व सजावटी वस्तुएँ |
| ढोकरा (डोकरा) कला | मोम-साँचा पद्धति से धातु-ढलाई; आदिवासी शिल्प |
| बाँस-शिल्प | टोकरी, सूप, चटाई, फ़र्नीचर, सजावटी सामान |
| पत्थर-शिल्प | पत्थर की मूर्तियाँ और बर्तन |
| पैटकर चित्रकला (Paitkar) | स्क्रोल पेंटिंग; आमादुबी (पूर्वी सिंहभूम) की प्रसिद्ध लोककला |
| सोहराय-खोवर चित्रकला | 2020 में झारखंड का पहला GI टैग |
| मिट्टी के बर्तन और खिलौने | कुम्हारों द्वारा |
| सबाई घास की रस्सी, चटाई | ग्रामीण दस्तकारी |
- हथकरघा (Handloom): 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
- ODOP (One District One Product): हर ज़िले के विशिष्ट उत्पाद को बढ़ावा।
- GI टैग: किसी क्षेत्र की विशिष्ट वस्तु को पहचान देता है (जैसे सोहराय-खोवर)।
- "वोकल फ़ॉर लोकल" का आशय स्थानीय उत्पादों को अपनाना और बढ़ावा देना है।
- PM विश्वकर्मा योजना (सितंबर 2023): पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण और ऋण-सहायता।
- स्किल इंडिया (2015) कौशल-विकास हेतु राष्ट्रीय मिशन है।
याद रखें
GI टैग (Geographical Indication): किसी उत्पाद की ख़ास गुणवत्ता या पहचान उसके क्षेत्र से जुड़ी हो, तब यह कानूनी पहचान मिलती है।
4 कचरे से कला और स्वयं बनाकर सीखना (Best out of Waste)
पुराने डिब्बे, बोतल, कपड़ों की कतरन, गत्ते और अखबार से उपयोगी और सुंदर चीज़ें बनाई जा सकती हैं। यह पर्यावरण-संरक्षण, रचनात्मकता और मितव्ययिता तीनों सिखाता है। बच्चों को शुरू से ही चीज़ें फेंकने से पहले उनके पुनः उपयोग के बारे में सोचना चाहिए।
| पुरानी चीज़ | नई वस्तु |
|---|---|
| प्लास्टिक की बोतल | गमला, पेन-स्टैंड, पक्षी-पात्र |
| पुराना अख़बार | थैला, लिफ़ाफ़ा, पेपर-मशे के खिलौने |
| कपड़े की कतरन | झोला, पायदान, गुड़िया |
| पुराने कार्ड | सजावटी चित्र, बुकमार्क |
| अंडे की ट्रे | रंग-पैलेट, पौधा-नर्सरी |
| पुराने टायर | बगीचे का गमला, झूला |
- बनाने के सरल चरण: सोचना → योजना/चित्र बनाना → सामग्री जुटाना → बनाना → परखना → सुधारना।
- सुरक्षा: कैंची, चाकू और गोंद का प्रयोग बड़ों की देखरेख में; आग से दूर।
- मिट्टी की कला: चिकनी मिट्टी से बर्तन/खिलौने; पूर्णतः प्राकृतिक और सुरक्षित।
- रंगाई: फूलों-पत्तियों से प्राकृतिक रंग (हल्दी - पीला, चुकंदर - लाल, पालक - हरा)।
5 खेल, संगीत-नृत्य और त्योहार: जो हम करते हैं
खेल, गीत और नृत्य बच्चों के विकास के लिए उतने ही ज़रूरी हैं जितना पढ़ना-लिखना। झारखंड में प्रकृति-पर्वों के साथ गीत-नृत्य की गहरी परंपरा है। इन गतिविधियों में बच्चे सहयोग, अनुशासन, पहचान और खुशी सीखते हैं।
- पारंपरिक खेल: कबड्डी, खो-खो, गिल्ली-डंडा, लंगड़ी, छुपम-छुपाई, कंचे, पिट्ठू।
- हॉकी का झारखंड से गहरा नाता है; जयपाल सिंह मुंडा ने 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की (स्वर्ण पदक)।
- संगीत-वाद्य: मांदर, नगाड़ा, बाँसुरी, ढोल, शहनाई।
- झारखंड के लोक-नृत्य: छऊ (सरायकेला-खरसावाँ, यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में), करम, जदुर, पाइका, डमकच, फगुआ।
- पर्व: सरहुल (वसंत), करम (भादो), सोहराय (फसल), टुसू (मकर संक्रांति के आसपास), जनी शिकार आदि।
- राष्ट्रीय पर्व: 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर।
- दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व जैसे पर्व मिल-जुलकर मनाने से सद्भाव बढ़ता है।
याद रखें
छऊ नृत्य को 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया। यह झारखंड (सरायकेला), पश्चिम बंगाल (पुरुलिया) और ओडिशा (मयूरभंज) में प्रचलित है।
6 NEP-2020 के संदर्भ में: करके सीखना, शिल्प और व्यावसायिक शिक्षा
NEP-2020 शिक्षा में कला, शिल्प और व्यावसायिक अनुभव को पूरी तरह पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात करती है। बच्चों को स्थानीय कारीगरों से सीखने के अवसर देना श्रम की गरिमा बढ़ाता है और रटंत शिक्षा से दूर ले जाता है। NCF-FS 2022 भी खेल और गतिविधि-आधारित अधिगम का समर्थन करता है।
- कक्षा 6-8 में स्थानीय व्यावसायिक अनुभव और बैगलेस दिन (NEP-2020: कक्षा 6 से इंटर्नशिप सहित अनुभव)।
- स्थानीय कारीगर को कक्षा में आमंत्रित करना, जैसे कुम्हार, बुनकर, लोहार।
- कला-समेकित शिक्षा (Art-integrated learning) के रूप में पाठ को शिल्प से जोड़ना।
- हस्तशिल्प प्रदर्शनी और विद्यालय में मेला।
- स्थानीय लोककथाएँ, नृत्य और गीत को शिक्षण में शामिल करना।
- श्रम की गरिमा: हर पेशे का सम्मान और लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ना (लड़कियाँ भी बढ़ई या इलेक्ट्रीशियन बन सकती हैं)।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 के अनुसार कार्य-आधारित शिक्षा स्थानीय कारीगरों से सीख, कला-समेकन, श्रम की गरिमा और लैंगिक समानता के साथ दी जाए।
7 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
8 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब मनाया जाता है?
Q2. झारखंड का कौन-सा शिल्प मोम-साँचा पद्धति से धातु-ढलाई से जुड़ा है?
Q3. पैटकर चित्रकला किस क्षेत्र की प्रसिद्ध लोककला है?
Q4. झारखंड का पहला GI टैग किसे मिला?
Q5. PM विश्वकर्मा योजना किसके लिए है?
Q6. छऊ नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में किस वर्ष शामिल किया गया?
Q7. जयपाल सिंह मुंडा ने 1928 के किस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की?
Q8. कुम्हार क्या बनाता है?
Q9. "वोकल फ़ॉर लोकल" का मुख्य आशय क्या है?
Q10. प्राथमिक क्षेत्र (Primary sector) का उदाहरण कौन-सा है?
Q11. कथन (A): हस्तशिल्प को बढ़ावा देना कारीगरों की आजीविका के लिए आवश्यक है। कथन (R): हस्तशिल्प परंपरा और कौशल को जीवित रखता है। सही विकल्प?
Q12. पुरानी बोतल से पौधे का गमला बनाना 3R के किस सिद्धांत का उदाहरण है?
Q13. स्किल इंडिया मिशन किस वर्ष शुरू हुआ?
Q14. सरहुल पर्व किस ऋतु से जुड़ा है?
Q15. करम पर्व मुख्यतः किस महीने के आसपास मनाया जाता है?
Q16. निम्नलिखित में से कौन-सा कारीगर लोहे के औज़ार बनाता है?
Q17. एक शिक्षक कुम्हार को कक्षा में बुलाकर बच्चों को मिट्टी की कला दिखवाता है। इसका सबसे उपयुक्त शैक्षिक लाभ क्या है?
Q18. NEP-2020 के अनुसार विद्यालयी शिक्षा में कला और शिल्प की क्या स्थिति होनी चाहिए?
Q19. यदि कोई छात्र कहे कि "लड़कियाँ बढ़ई नहीं बन सकतीं", तो शिक्षक की उचित प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए?
Q20. GI टैग का क्या अर्थ है?
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