समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा
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1 समता, समानता और समावेशन का अर्थ (Equity, Equality and Inclusion)
इन तीन शब्दों को लोग अक्सर एक जैसा मान लेते हैं, पर शिक्षा में इनका अर्थ अलग है। समानता में सबको बराबर साधन दिए जाते हैं, जबकि समता में हर व्यक्ति की ज़रूरत के अनुसार साधन दिए जाते हैं ताकि सब एक जैसे परिणाम तक पहुँच सकें। समावेशन का अर्थ है कि कोई भी बच्चा शिक्षा-व्यवस्था से बाहर न रहे। पहले इनका अंतर स्पष्ट समझ लें।
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| समानता (Equality) | सबको एक जैसे अवसर और साधन | सब बच्चों को एक ही पुस्तक और एक ही आकार की कुर्सी |
| समता / न्यायसंगतता (Equity) | ज़रूरत के अनुसार अलग-अलग सहायता, ताकि सबको समान परिणाम की संभावना मिले | दृष्टिबाधित बच्चे को ब्रेल पुस्तक; कमज़ोर आर्थिक स्थिति वाले को छात्रवृत्ति |
| समावेशन (Inclusion) | सभी बच्चों को एक ही कक्षा में शामिल करना और कक्षा को सबके अनुकूल बनाना | विशेष आवश्यकता वाला बच्चा सामान्य कक्षा में, आवश्यक सहायता के साथ |
बहिष्करण से समावेशन तक
| व्यवस्था | अर्थ |
|---|---|
| बहिष्करण (Exclusion) | बच्चे को विद्यालय में प्रवेश ही न मिलना |
| पृथक्करण (Segregation) | विशेष बच्चों के लिए अलग विद्यालय/कक्षा, सामान्य बच्चों से दूर |
| एकीकरण (Integration) | बच्चे को सामान्य विद्यालय में रखना, पर बच्चे से अपेक्षा कि वह खुद को व्यवस्था के अनुसार ढाले |
| समावेशन (Inclusion) | विद्यालय और कक्षा स्वयं को बदलकर हर बच्चे के अनुकूल बनते हैं |
भ्रम से बचें
एकीकरण और समावेशन का अंतर परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है। एकीकरण में "बच्चा बदलता है", जबकि समावेशन में "व्यवस्था बदलती है"।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 का अध्याय 6 "समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा: सबके लिए अधिगम" है। इसके अनुसार शिक्षा केवल पहुँच (Access) तक सीमित नहीं, बल्कि सहभागिता, विद्यालय में टिके रहना (Retention) और सार्थक अधिगम-परिणाम भी सुनिश्चित होने चाहिए।
2 समावेशी शिक्षा का अर्थ, सिद्धांत एवं लाभ (Inclusive Education)
समावेशी शिक्षा इस विश्वास पर टिकी है कि हर बच्चा सीख सकता है और हर बच्चे को अपने पास के विद्यालय में सबके साथ पढ़ने का अधिकार है। इसमें विविधता (भाषा, धर्म, जाति, लिंग, क्षमता, आर्थिक स्थिति) को समस्या नहीं, बल्कि कक्षा की ताकत माना जाता है। यहाँ अर्थ, सिद्धांत और लाभ दिए गए हैं।
समावेशी शिक्षा
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) = ऐसी शिक्षा-प्रणाली जिसमें सभी बच्चे, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, भाषाई या सांस्कृतिक स्थिति कुछ भी हो, एक साथ सामान्य विद्यालय की कक्षा में पढ़ते हैं और विद्यालय हर बच्चे की ज़रूरत के अनुसार स्वयं को ढालता है।
- सिद्धांत: शिक्षा सबका अधिकार; कोई बच्चा अस्वीकार (Rejection) नहीं; हर बच्चा अद्वितीय; विविधता का सम्मान; पास के विद्यालय में प्रवेश; सहयोग और भागीदारी।
- विद्यालय की जिम्मेदारी: पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि, मूल्यांकन और भवन को लचीला बनाना।
- लाभ (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को): सामाजिक स्वीकृति, आत्म-विश्वास, सहपाठियों से सीखने के अवसर।
- लाभ (अन्य बच्चों को): सहानुभूति, सहयोग, विविधता की समझ और सहिष्णुता।
- लाभ (समाज को): भेदभाव में कमी और अधिक समावेशी नागरिक-समाज।
अंतर्राष्ट्रीय पहल
| पहल | वर्ष | मुख्य बात |
|---|---|---|
| सलामांका वक्तव्य (Salamanca Statement) | 1994 | विशेष आवश्यकता शिक्षा पर यूनेस्को का सम्मेलन (स्पेन); समावेशी विद्यालयों को सबसे उचित व्यवस्था माना गया |
| दिव्यांगजन अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD) | 2006 | समावेशी शिक्षा को अधिकार माना गया; भारत ने 2007 में इसका अनुसमर्थन किया |
| सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG-4) | 2015 | समावेशी और समतामूलक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसर |
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 भारत की SDG-4 (2030) की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इसमें सभी बच्चों को, विशेषकर वंचित समूहों को, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लक्ष्य है।
3 भारत में समावेशी शिक्षा: संवैधानिक एवं नीतिगत यात्रा
भारत में समावेशी शिक्षा की यात्रा संविधान से शुरू होकर कई नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों से गुज़री है। परीक्षा में इनके वर्ष और विषय-वस्तु का मिलान पूछा जाता है। पहले संवैधानिक प्रावधान, फिर कालानुक्रम देखें।
संवैधानिक प्रावधान
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 14 | विधि के समक्ष समता |
| 15 | धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध; 15(3) महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष प्रावधान; 15(4) सामाजिक/शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग, SC/ST के लिए विशेष प्रावधान |
| 21-A | 6–14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (86वाँ संशोधन, 2002) |
| 29(2) | राज्य-पोषित संस्थाओं में धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा के आधार पर प्रवेश से इनकार नहीं |
| 30 | अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थाएँ स्थापित और संचालित करने का अधिकार |
| 45 | राज्य द्वारा 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा |
| 46 | अनुसूचित जाति, जनजाति और दुर्बल वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों की उन्नति |
| 51-A(k) | माता-पिता/संरक्षक द्वारा 6–14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा के अवसर देना (मौलिक कर्तव्य) |
प्रमुख नीतियाँ, कार्यक्रम एवं अधिनियम
| वर्ष | कार्यक्रम/अधिनियम | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 1974 | IEDC (विकलांग बच्चों के लिए समेकित शिक्षा योजना) | विकलांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा देने का आरंभिक केंद्रीय कार्यक्रम |
| 1986/92 | राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कार्य-योजना | समता और समावेश पर बल |
| 1992 | भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम (RCI Act) | विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण का नियमन |
| 1995 | विकलांग व्यक्ति अधिनियम (PwD Act) | सात प्रकार की विकलांगता; 6 से 18 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान |
| 1999 | राष्ट्रीय न्यास अधिनियम | ऑटिज़्म, प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात, बौद्धिक अक्षमता और बहु-विकलांगता के कल्याण हेतु |
| 2000-01 | सर्व शिक्षा अभियान (SSA) | "शून्य अस्वीकृति (Zero Rejection)" का सिद्धांत |
| 2009 | RTE अधिनियम | 6–14 वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार; 2012 के संशोधन से विकलांग बच्चों को भी शामिल किया गया |
| 2009 | IEDSS (माध्यमिक स्तर पर विकलांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा) | कक्षा 9–12 के विकलांग बच्चों के लिए |
| 2016 | दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act) | 21 प्रकार की दिव्यांगता; 2017 से लागू |
| 2018 | समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) | SSA, RMSA व शिक्षक-शिक्षा को मिलाकर विद्यालय-पूर्व से कक्षा 12 तक एकीकृत योजना; समावेशी शिक्षा घटक शामिल |
| 2020 | NEP-2020 | समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा पर विशेष अध्याय |
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 पहली बार SEDGs (सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूह) के लिए लैंगिक समावेशन निधि (Gender Inclusion Fund) और विशेष शिक्षा क्षेत्र (Special Education Zones) की व्यवस्था की बात करती है।
4 दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act) 2016 एवं शिक्षा
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण कानून RPwD अधिनियम 2016 है। इसने 1995 के PwD अधिनियम की जगह ली और दिव्यांगता की सूची को सात से बढ़ाकर 21 प्रकार कर दिया। यह कानून 2017 से लागू हुआ। यहाँ शिक्षा-संबंधी मुख्य प्रावधान दिए गए हैं।
- बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disability): जिस व्यक्ति में निर्दिष्ट दिव्यांगता कम से कम 40% हो।
- निःशुल्क शिक्षा: 6 से 18 वर्ष की आयु के बेंचमार्क दिव्यांगता वाले हर बच्चे को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार।
- समावेशी शिक्षा: सरकारें और स्थानीय निकाय दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करें। इसमें भवन, परिवहन, आवश्यक सहायता और उपयुक्त परीक्षा-सुविधाएँ शामिल हैं।
- युक्तियुक्त समायोजन (Reasonable Accommodation): व्यक्ति की ज़रूरत के अनुसार आवश्यक और उचित परिवर्तन।
- आरक्षण: सरकारी नौकरियों में 4% और उच्च शिक्षण संस्थाओं में 5% (बेंचमार्क दिव्यांगता वालों के लिए)।
RPwD अधिनियम 2016 की 21 दिव्यांगताएँ
- दृष्टिहीनता (Blindness)
- अल्प-दृष्टि (Low Vision)
- कुष्ठ रोग से मुक्त व्यक्ति (Leprosy Cured)
- श्रवण बाधित (मूक-बधिर और कम सुनने वाले)
- चलन-दिव्यांगता (Locomotor Disability)
- बौनापन (Dwarfism)
- बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability)
- मानसिक रोग (Mental Illness)
- ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder)
- प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात (Cerebral Palsy)
- मांसपेशीय दुर्विकास (Muscular Dystrophy)
- दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ (Chronic Neurological Conditions)
- विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Specific Learning Disabilities)
- बहु-स्केलेरोसिस (Multiple Sclerosis)
- वाक् एवं भाषा दिव्यांगता (Speech and Language Disability)
- थैलेसीमिया (Thalassemia)
- हीमोफीलिया (Haemophilia)
- सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease)
- बहु-दिव्यांगता, जिसमें दृष्टि-श्रवण दोनों बाधित (Deaf-Blindness) शामिल
- एसिड अटैक पीड़ित (Acid Attack Victim)
- पार्किंसन रोग (Parkinson's Disease)
याद रखें
परीक्षा में सूची का पूरा क्रम नहीं, बल्कि कुल संख्या (21) और नए जुड़े प्रकार (जैसे ऑटिज़्म, विशिष्ट अधिगम अक्षमता, एसिड अटैक पीड़ित, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, सिकल सेल रोग, पार्किंसन) अधिक पूछे जाते हैं।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 कहती है कि दिव्यांग बच्चे नियमित स्कूली प्रक्रिया में पूरी तरह भाग ले सकें। इसके लिए क्रॉस-डिसेबिलिटी प्रशिक्षण प्राप्त विशेष शिक्षक, आवश्यकता वाले स्थानों पर संसाधन केंद्र (Resource Centres), तथा सहायक उपकरण और प्रौद्योगिकी आधारित साधन उपलब्ध कराने की बात है। भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) को पूरे देश में मानकीकृत किया जाएगा।
5 वंचित एवं हाशिए के समूह (Socio-Economically Disadvantaged Groups)
हर बच्चा विद्यालय तक पहुँचकर भी सीख नहीं पाता, क्योंकि कई तरह की बाधाएँ उसके रास्ते में आती हैं। NEP-2020 ऐसे समूहों को सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूह (Socially and Economically Disadvantaged Groups, SEDGs) कहती है और उन पर विशेष ध्यान देने की बात करती है। नीचे इनके वर्ग और संभावित बाधाएँ दी गई हैं।
| वर्ग | उदाहरण | सामान्य बाधाएँ |
|---|---|---|
| लैंगिक पहचान (Gender) | बालिकाएँ, महिलाएँ, ट्रांसजेंडर विद्यार्थी | लैंगिक भेदभाव, घरेलू जिम्मेदारियाँ, असुरक्षा, शौचालय की कमी |
| सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान | अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक | सामाजिक भेदभाव, भाषा-बाधा, पाठ्यक्रम में प्रतिनिधित्व की कमी |
| भौगोलिक पहचान | दूरदराज़ गाँव, पहाड़ी/जनजातीय क्षेत्र, छोटे कस्बे | दूरी, परिवहन, शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव |
| दिव्यांगता | सभी प्रकार की दिव्यांगता, अधिगम-अक्षमता सहित | अवसंरचना, सहायक उपकरण व प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, सामाजिक दृष्टिकोण |
| सामाजिक-आर्थिक स्थिति | प्रवासी मज़दूरों के बच्चे, निम्न-आय परिवार, अनाथ, शहरी गरीब, बाल-श्रमिक, मानव-तस्करी से प्रभावित बच्चे | आर्थिक कठिनाई, बार-बार स्थान बदलना, काम के लिए पढ़ाई छोड़ना |
- बहुआयामी वंचना: कई बच्चे एक साथ एक से अधिक वर्ग में आते हैं (जैसे आदिवासी क्षेत्र की दिव्यांग बालिका), इसलिए उन्हें अधिक सहायता की ज़रूरत होती है।
- ट्रांसजेंडर बच्चे: सर्वोच्च न्यायालय ने NALSA मामले (2014) में ट्रांसजेंडर को "तृतीय लिंग" की मान्यता दी और शिक्षा में उनके लिए विशेष अवसरों की बात कही। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 में भी शिक्षा में समावेश का प्रावधान है।
- प्रवासी बच्चे: मौसमी प्रवास से बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इसके लिए आवासीय/मौसमी छात्रावास, सेतु पाठ्यक्रम (Bridge Course) और आसान स्थानांतरण की व्यवस्था उपयोगी है।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 में SEDGs पर विशेष ज़ोर है, और इनके लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र (SEZ), लैंगिक समावेशन निधि, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार, SC/ST/OBC और अन्य SEDGs के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन, तथा बाल भवन (Bal Bhavan) जैसी व्यवस्थाएँ बताई गई हैं।
6 लैंगिक समानता एवं बालिका शिक्षा (Gender Equity)
भारत में बालिकाओं की शिक्षा के सामने अनेक सामाजिक बाधाएँ रही हैं, जैसे जल्दी विवाह, घरेलू कामकाज, असुरक्षा और पुरानी मान्यताएँ। लैंगिक समानता का अर्थ केवल लड़कियों को विद्यालय लाना नहीं, बल्कि लड़के-लड़कियों को सीखने, खेलने और आगे बढ़ने के बराबर अवसर देना है। यहाँ प्रमुख कारण, कार्यक्रम और कक्षा-व्यवहार दिए गए हैं।
| कार्यक्रम | वर्ष | उद्देश्य |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम (मध्याह्न भोजन, NP-NSPE) | 1995 | पोषण के साथ नामांकन और उपस्थिति में वृद्धि; 2021 में "पीएम पोषण" नाम |
| कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) | 2004 | शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में उपेक्षित वर्गों की बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय |
| बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ | 22 जनवरी 2015 | घटते बाल लिंगानुपात को सुधारना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना |
- कक्षा में लैंगिक संवेदनशीलता: लड़के-लड़कियों को बराबर प्रश्न पूछने, नेतृत्व करने और खेलने के अवसर।
- पाठ्यपुस्तकों में लैंगिक रूढ़ियाँ हटाना (जैसे केवल माँ को रसोई में और पिता को दफ़्तर में दिखाना)।
- सुरक्षित विद्यालय: अलग शौचालय, पर्याप्त प्रकाश, सुरक्षित रास्ते, महिला शिक्षिकाओं की उपस्थिति।
- लिंग के आधार पर विषय या खेल का बँटवारा न करना।
भ्रम से बचें
"लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में" जैसी धारणाएँ रूढ़ि (Stereotype) हैं। शिक्षक को इनसे बचना चाहिए, क्योंकि शिक्षक की अपेक्षा बच्चे के प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 में लैंगिक समावेशन निधि की स्थापना की बात है, जिसका उपयोग बालिकाओं और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को समान गुणवत्ता की शिक्षा दिलाने में होगा। नीति में सुरक्षित और सहयोगी विद्यालय वातावरण तथा लैंगिक संवेदनशील पाठ्यक्रम की भी बात है।
7 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे: पहचान, बाधाएँ एवं सहायता
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Children with Special Needs, CWSN) वे हैं जिन्हें सीखने के लिए सामान्य से अलग या अतिरिक्त सहायता चाहिए। इसमें दिव्यांग बच्चे भी आते हैं और प्रतिभाशाली या अधिगम-अक्षमता वाले बच्चे भी। शिक्षक का पहला काम इन्हें जल्दी पहचानना और सही सहायता देना है।
पहचान के संकेत
- बार-बार आँखों के पास लाकर पढ़ना या श्यामपट्ट न पढ़ पाना (दृष्टि संबंधी)।
- पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना या बार-बार "क्या?" पूछना (श्रवण संबंधी)।
- लगातार पढ़ने, लिखने या गणित में कठिनाई, जबकि अन्य क्षेत्रों में समझ अच्छी हो (विशिष्ट अधिगम-अक्षमता)।
- बोलने में अटकना या स्पष्ट न बोल पाना (वाक् संबंधी)।
- सामाजिक संवाद या आँख मिलाने में कठिनाई, दोहराव वाला व्यवहार (ऑटिज़्म के संकेत)।
- शारीरिक गतिविधि में कठिनाई (चलन-संबंधी)।
समावेशन में बाधाएँ
| बाधा का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| दृष्टिकोण संबंधी (Attitudinal) | शिक्षकों, सहपाठियों या अभिभावकों की नकारात्मक सोच, उपहास, कम अपेक्षा |
| भौतिक (Physical) | रैंप, उपयुक्त शौचालय, फर्नीचर, रास्तों की कमी |
| पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-विधि | एक ही तरीके से पढ़ाना, कठोर पाठ्यक्रम, सहायक सामग्री का अभाव |
| मूल्यांकन संबंधी | परीक्षा में अतिरिक्त समय, लिपिक (Scribe), वैकल्पिक प्रारूप की सुविधा न मिलना |
| संस्थागत/नीतिगत | प्रशिक्षित शिक्षक और संसाधनों की कमी, जागरूकता की कमी |
| संचार संबंधी | सांकेतिक भाषा, ब्रेल या सरल भाषा का अभाव |
याद रखें
बाधा बच्चे में नहीं, अक्सर व्यवस्था में होती है। समावेशी सोच में पूछा जाता है "बच्चे में क्या कमी है?" की जगह "व्यवस्था में क्या बदलने की ज़रूरत है?"
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 और NCF दोनों शीघ्र पहचान (Early Identification) और समय पर हस्तक्षेप पर बल देते हैं। आधारभूत चरण (ECCE) में ही बच्चों की विशेष ज़रूरतों को पहचानने की व्यवस्था की बात है।
8 समावेशी कक्षा की रणनीतियाँ (Strategies for Inclusive Classroom)
समावेशी शिक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि कक्षा में रोज़ के व्यवहार से बनती है। शिक्षक छोटे बदलावों से कक्षा को सबके लिए सुलभ बना सकता है। यहाँ व्यावहारिक रणनीतियाँ संक्षेप में हैं।
- सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प (Universal Design for Learning, UDL): पाठ को शुरू से ऐसे बनाना कि अधिक से अधिक बच्चे सीख सकें। इसके तीन सिद्धांत हैं: जुड़ाव के अनेक साधन (Engagement), प्रस्तुति के अनेक साधन (Representation) और अभिव्यक्ति/क्रिया के अनेक साधन (Action & Expression)।
- वैयक्तिकृत शिक्षा योजना (Individualised Education Plan, IEP): बच्चे की विशिष्ट ज़रूरत के अनुसार लिखित लक्ष्य, सहायता और समीक्षा की योजना।
- युक्तियुक्त समायोजन (Reasonable Accommodation): अतिरिक्त समय, बड़े अक्षरों वाली सामग्री, लिपिक, उपयुक्त बैठने की जगह।
- सहायक तकनीक (Assistive Technology): ब्रेल, स्क्रीन रीडर, श्रवण-यंत्र, बड़े आकार का प्रिंट, चित्र-आधारित संवाद-साधन।
- भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL): श्रवण-बाधित बच्चों के लिए। इसके लिए ISLRTC (2015) स्थापित है।
- सहपाठी सहायता (Peer Support) और सहयोगात्मक अधिगम।
- संसाधन कक्ष और भ्रमणशील शिक्षक (Resource Room / Itinerant Teacher): अतिरिक्त शैक्षिक सहायता के लिए।
- बाधा-मुक्त वातावरण: रैंप, चौड़े दरवाज़े, पर्याप्त रोशनी, स्पष्ट संकेतक।
- विभेदित शिक्षण और बहु-स्तरीय सामग्री (वैयक्तिक भिन्नताओं वाले टॉपिक में पढ़ा गया)।
- अभिभावकों और विशेषज्ञों के साथ सहयोग।
भ्रम से बचें
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सामान्य कक्षा में रखकर कोई सहायता न देना "समावेशन" नहीं, बल्कि उपेक्षा है। सही सहायता और समायोजन समावेशन की शर्त हैं।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 में सहायक उपकरण, संसाधन केंद्र, विशेष शिक्षक और ISL के मानकीकरण के साथ शिक्षक-शिक्षा में समावेशन का प्रशिक्षण भी शामिल है। इससे सामान्य शिक्षक भी विविध ज़रूरतों वाले बच्चों को पढ़ा पाएँगे।
9 RTE अधिनियम 2009 में समता एवं समावेश के प्रावधान
RTE अधिनियम केवल शिक्षा का अधिकार नहीं देता, बल्कि वंचित वर्ग के बच्चों के लिए विशेष सुविधाएँ भी तय करता है। इसमें समता के कई ठोस प्रावधान हैं जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं। नीचे इन्हें तालिका में रखा है।
| धारा | प्रावधान |
|---|---|
| धारा 4 | विद्यालय-बाहर या देर से प्रवेश लेने वाले बच्चे के लिए विशेष प्रशिक्षण (Special Training) ताकि वह उम्र के अनुरूप कक्षा में आ सके |
| धारा 12(1)(c) | निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 (या प्री-प्राइमरी) में कम से कम 25% सीटें कमज़ोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए; सरकार प्रति-बच्चे व्यय की प्रतिपूर्ति करती है |
| धारा 13 | प्रवेश में कैपिटेशन फीस और बच्चे या माता-पिता की स्क्रीनिंग पर रोक |
| धारा 16 | प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक बच्चे को रोका या निष्कासित नहीं किया जाएगा |
| धारा 17 | शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक |
| धारा 21 | विद्यालय प्रबंध समिति (SMC): कम से कम तीन-चौथाई सदस्य अभिभावक/संरक्षक, वंचित वर्गों का समानुपातिक प्रतिनिधित्व और 50% महिलाएँ |
| अनुसूची | शिक्षक-छात्र अनुपात: प्राथमिक स्तर पर 30:1 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 35:1 |
- 2012 का संशोधन RTE में दिव्यांग बच्चों को "वंचित समूह" में शामिल करता है और गंभीर या बहु-दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षा का विकल्प भी देता है।
- RTE के अंतर्गत विद्यालय-क्षेत्र (Neighbourhood School) की अवधारणा है, ताकि बच्चे को पास के विद्यालय में शिक्षा मिल सके।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 का लक्ष्य 3 से 18 वर्ष तक सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है, जबकि RTE अधिनियम 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए है। साथ ही विद्यालय परिसर/कॉम्प्लेक्स की अवधारणा से संसाधनों के साझा उपयोग और दूरदराज़ के बच्चों तक पहुँच बढ़ाने की बात है।
10 समावेशी विद्यालय एवं शिक्षक की भूमिका
समावेशी विद्यालय की सफलता सबसे अधिक शिक्षक के दृष्टिकोण और व्यवहार पर निर्भर करती है। अच्छा शिक्षक हर बच्चे में क्षमता देखता है और कक्षा को ऐसा बनाता है जहाँ कोई स्वयं को अलग या कमतर महसूस न करे। नीचे शिक्षक की भूमिका और समावेशी विद्यालय के लक्षण दिए गए हैं।
शिक्षक की भूमिका
- सकारात्मक दृष्टिकोण: "हर बच्चा सीख सकता है" की सोच रखना।
- पहचान: बच्चों की ज़रूरतों को समय पर पहचानना और अभिलेख रखना।
- योजना: पाठ-योजना में विविधता, लचीलापन और वैकल्पिक गतिविधियाँ रखना।
- सहयोग: विशेष शिक्षक, अभिभावक, स्वास्थ्य कर्मी और समुदाय के साथ मिलकर काम करना।
- समान व्यवहार: किसी भी बच्चे की जाति, धर्म, लिंग, भाषा या क्षमता के आधार पर भेदभाव न करना।
- सम्मानजनक भाषा: "अपंग", "पागल", "कमज़ोर बच्चा" जैसे शब्द की जगह सम्मानजनक शब्दावली, जैसे "दिव्यांग" और "विशेष आवश्यकता वाला बच्चा"।
- साथियों में संवेदनशीलता पैदा करना और चिढ़ाने-बहिष्कार पर रोक।
समावेशी विद्यालय के लक्षण
- सभी बच्चों का स्वागत और प्रवेश; कोई "अस्वीकृति" नहीं।
- लचीला पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधियाँ और मूल्यांकन।
- बाधा-मुक्त भवन और सहायक साधन।
- सहयोगी विद्यालय प्रबंध समिति और सामुदायिक भागीदारी।
- शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण और सहायता।
याद रखें
कक्षा में विविधता को खुलकर स्वीकार करें। बच्चों की पृष्ठभूमि, भाषा और अनुभवों को कक्षा के संसाधन की तरह उपयोग करें।
NEP-2020 के अनुसार
NEP-2020 में शिक्षक-शिक्षा के पाठ्यक्रम में समावेशन, लैंगिक संवेदनशीलता और विविधता को शामिल करने की बात है। इसके साथ 4-वर्षीय एकीकृत B.Ed. का लक्ष्य है, ताकि शिक्षक पूरी तैयारी के साथ विविध कक्षाओं का नेतृत्व कर सकें।
11 NEP-2020, NCF-FS एवं NCF-SE में समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा
नई शिक्षा-नीति और पाठ्यचर्या ढाँचों का मूल मंत्र है "कोई भी बच्चा पीछे न छूटे"। यह नीति पहुँच से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर बच्चा विद्यालय में आए, टिके और सार्थक रूप से सीखे। नीचे तीनों दस्तावेज़ों की समावेशन संबंधी मुख्य बातें दी गई हैं।
| दस्तावेज़ | समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा से जुड़ी मुख्य बातें |
|---|---|
| NEP-2020 | अध्याय 6: समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा; SEDGs (लैंगिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, भौगोलिक पहचान, दिव्यांगता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति); Gender Inclusion Fund; Special Education Zones; राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार; दिव्यांग बच्चों के लिए संसाधन केंद्र, सहायक उपकरण और विशेष शिक्षक; ISL का मानकीकरण; बाल भवन; बहुभाषावाद और मातृभाषा में शिक्षा |
| NCF-FS 2022 | हर बच्चा अनूठा; सभी पृष्ठभूमि के बच्चों का स्वागत; घर की भाषा और संस्कृति का सम्मान; विशेष आवश्यकता की शीघ्र पहचान और सहायता; लैंगिक और सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त वातावरण |
| NCF-SE 2023 | समावेशी, बहुभाषी और बहु-विषयक पाठ्यचर्या; दिव्यांग बच्चों और वंचित समूहों के लिए अनुकूल शिक्षण और आकलन; विषय-चयन में लचीलापन |
- मातृभाषा: कम से कम कक्षा 5 तक (संभव हो तो कक्षा 8 और आगे) शिक्षा का माध्यम घर की भाषा/मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा। इससे भाषाई रूप से वंचित बच्चों को लाभ।
- बहुभाषावाद: कक्षा में बहुभाषी बच्चों की भाषाओं को संसाधन मानना।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और पहुँच-योग्यता (Accessibility) के लिए।
- आकलन में समावेशन: परीक्षा में दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएँ।
NEP-2020 का सार
मुख्य सार: NEP-2020 का लक्ष्य "सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" है। समतामूलक शिक्षा का अर्थ ज़रूरत के अनुसार सहायता देना है, और समावेशी शिक्षा का अर्थ यह कि विद्यालय हर बच्चे के लिए खुद को बदले।
12 Quick Revision — एक नज़र में
परीक्षा से ठीक पहले पूरे टॉपिक को दोहराने के लिए यह भाग है। इसमें सबसे ज़रूरी बातें एक ही जगह दी गई हैं।
13 MCQ Practice (20 प्रश्न)
अब तक जो पढ़ा, उसे परखने के लिए नीचे 20 प्रश्न हैं। किसी विकल्प पर क्लिक करते ही सही उत्तर और उसकी व्याख्या दिख जाएगी।
Q1. किस व्यवस्था में बच्चे को सामान्य विद्यालय में रखा जाता है पर उससे अपेक्षा की जाती है कि वह स्वयं को व्यवस्था के अनुसार ढाले?
Q2. "समता (Equity)" का सही अर्थ क्या है?
Q3. सलामांका वक्तव्य (Salamanca Statement) किस वर्ष का है?
Q4. दिव्यांगजन अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD) किस वर्ष अपनाया गया?
Q5. अनुच्छेद 21-A किससे संबंधित है?
Q6. विकलांग बच्चों के लिए समेकित शिक्षा योजना (IEDC) कब शुरू हुई?
Q7. सर्व शिक्षा अभियान में समावेशन के संदर्भ में कौन-सा सिद्धांत अपनाया गया?
Q8. RPwD अधिनियम 2016 में कुल कितनी दिव्यांगताएँ शामिल हैं?
Q9. बेंचमार्क दिव्यांगता का न्यूनतम प्रतिशत कितना है?
Q10. RPwD अधिनियम 2016 के अनुसार बेंचमार्क दिव्यांगता वाले बच्चों को किस आयु तक निःशुल्क शिक्षा का अधिकार है?
Q11. RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के अनुसार निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में कमज़ोर और वंचित वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
Q12. RTE अधिनियम की धारा 4 क्या प्रदान करती है?
Q13. विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) में न्यूनतम कितने सदस्य अभिभावक/संरक्षक होते हैं?
Q14. RTE के अंतर्गत प्राथमिक स्तर पर शिक्षक-छात्र अनुपात कितना निर्धारित है?
Q15. NEP-2020 में SEDGs का पूरा नाम क्या है?
Q16. NEP-2020 में वंचित क्षेत्रों और समूहों के लिए किस प्रकार के क्षेत्र बनाने की बात है?
Q17. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान कब शुरू हुआ?
Q18. सर्वोच्च न्यायालय ने किस मामले (2014) में ट्रांसजेंडर को तृतीय लिंग की मान्यता दी?
Q19. सार्वभौमिक अधिगम अभिकल्प (UDL) का उद्देश्य क्या है?
Q20. वैयक्तिकृत शिक्षा योजना (IEP) क्या है?
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